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Faridabad News: फरीदाबाद-दिल्ली के बीच एलिवेटेड कॉरिडोर से लाखों लोगों को जाम से मिलेगी राहत

Thu, 19 Feb 2026 11:30 PM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Thu, 19 Feb 2026 11:30 PM IST
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The elevated corridor between Faridabad and Delhi will provide relief from traffic jams to lakhs of people.
एनएचएआई ने विस्तृत परियोजना रिपोर्ट का काफी काम पूरा किया, अब तक दो करोड़ रुपये खर्च
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मोहित शुक्ला

फरीदाबाद। फरीदाबाद से दिल्ली के बीच रोजाना लगने वाले जाम से जूझ रहे लाखों लोगों के लिए राहत की दिशा में बड़ा कदम उठा है। दक्षिणी दिल्ली के सबसे व्यस्त चिकित्सा और ट्रैफिक केंद्रों में शामिल एम्स और महिपालपुर बाईपास को फरीदाबाद-गुरुग्राम रोड से जोड़ने के लिए प्रस्तावित एलिवेटेड कॉरिडोर परियोजना अब औपचारिक प्रक्रिया में प्रवेश कर चुकी है। एनएचएआई ने इसकी विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार करने का काफी काम पूरा कर लिया है।

यह परियोजना धरातल पर उतरती है तो फरीदाबाद से दक्षिणी दिल्ली की दूरी समय के लिहाज से आधी रह सकती है। खासकर गंभीर मरीजों, नौकरीपेशा लोगों और एयरपोर्ट जाने वाले यात्रियों को सीधा लाभ मिलेगा। एनएचएआई के दिल्ली क्षेत्रीय कार्यालय की ओर से जारी आदेश के मुताबिक डीपीआर तैयार करने का जिम्मा दो एजेंसी को सौंपा गया है। वहीं इसका काफी काम पूरा हो चुका है। इसमें करीब दो करोड़ रुपये का खर्च आया है।
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एजेंसी जमीनी सर्वे, ट्रैफिक स्टडी, मिट्टी की जांच, संरचनात्मक डिजाइन, संभावित भूमि अधिग्रहण और यूटिलिटी शिफ्टिंग का आकलन कर रही है। अनुमान है कि यह कॉरिडोर फरीदाबाद-गुरुग्राम रोड को महिपालपुर बाईपास से एलिवेटेड ढांचे के जरिए जोड़ेगा जिससे रेड लाइट और लोकल ट्रैफिक का असर काफी कम हो जाएगा।
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जाम से जूझते शहर को मिलेगी राहत

फरीदाबाद से रोजाना करीब 1.5 से 2 लाख लोग दिल्ली की ओर कामकाज के लिए निकलते हैं। बदरपुर बॉर्डर, आश्रम चौक और महरौली-गुरुग्राम रोड पर पीक आवर्स में 8 से 12 किलोमीटर लंबा जाम आम बात है। कई बार 25-30 किलोमीटर की दूरी तय करने में दो से ढाई घंटे तक लग जाते हैं। एलिवेटेड कॉरिडोर बनने के बाद सफर का समय 50 प्रतिशत तक घटने का अनुमान है। यानी जहां अभी एम्स या महिपालपुर पहुंचने में औसतन डेढ़ से दो घंटे लगते हैं वहीं यह समय घटकर 40-60 मिनट के बीच रह सकता है।

गंभीर मरीजों के लिए बनेगा लाइफलाइन बनेगा कॉरिडोर

फरीदाबाद के सरकारी और निजी अस्पतालों से रोजाना हार्ट अटैक, ब्रेन स्ट्रोक, ट्रॉमा और अन्य गंभीर मामलों में मरीजों को दिल्ली रेफर किया जाता है। स्थानीय स्वास्थ्य सूत्रों के अनुसार प्रतिदिन 40 से 60 मरीज ऐसे होते हैं जिन्हें उच्च स्तरीय इलाज के लिए दिल्ली भेजना पड़ता है जिनमें बड़ी संख्या एम्स की होती है। अक्सर एंबुलेंस जाम में फंस जाती है जिससे गोल्डन ऑवर का नुकसान होता है। प्रस्तावित कॉरिडोर के चालू होने के बाद एंबुलेंस को बिना रुकावट सीधी कनेक्टिविटी मिल सकेगी, जिससे गंभीर मरीजों की जान बचाने में अहम मदद मिलेगी।


10 विशेषज्ञों की टीम करेगी निगरानी

परियोजना की तकनीकी जटिलता को देखते हुए एनएचएआई ने 10 विशेषज्ञों की टीम नियुक्त की है। टीम लीडर के रूप में वरिष्ठ हाईवे इंजीनियर राजेंद्र प्रसाद सिंह प्रोजेक्ट का नेतृत्व करेंगे। टीम में ब्रिज डिजाइन इंजीनियर, ट्रैफिक विशेषज्ञ, पर्यावरण विशेषज्ञ और भूमि अधिग्रहण व यूटिलिटी एक्सपर्ट शामिल हैं। उद्देश्य यह है कि निर्माण के दौरान बिजली लाइनों, पाइपलाइनों या अन्य ढांचागत अड़चनों से देरी न हो।



इन इलाकों को होगा सीधा फायदा

फरीदाबाद-गुरुग्राम रोड से जुड़े सेक्टर और कॉलोनियां को इससे सीधा लाभ मिलेगा इसमें सैनिक कॉलोनी, एनआईटी फरीदाबाद, ग्रीनफील्ड कॉलोनी जैसे रिहायशी क्षेत्र शामिल हैं वहीं आईजीआई एयरपोर्ट जाने वाले यात्रियों को भी इसका लाभ मिलेगा। रियल एस्टेट विशेषज्ञों का मानना है कि बेहतर कनेक्टिविटी से इन इलाकों में संपत्ति के दामों में 10-20 प्रतिशत तक उछाल संभव है। साथ ही उद्योग और व्यापारिक गतिविधियों को भी गति मिल सकती है।



समय, ईंधन और प्रदूषण तीनों में होगा सुधार

यह कॉरिडोर बनने के बाद इस रूट पर चलने वाले लाखों वाहन 30 से 40 मिनट कम चलेंगे तो ईंधन की बड़ी बचत होगी। ट्रैफिक जाम में खड़े वाहनों से होने वाला कार्बन उत्सर्जन भी घटेगा। अनुमान है कि लंबी अवधि में यह कॉरिडोर फरीदाबाद और दक्षिणी दिल्ली के वायु गुणवत्ता सूचकांक पर सकारात्मक असर डाल सकता है। फरीदाबाद के लोग लंबे समय से दिल्ली के लिए तेज और वैकल्पिक मार्ग की मांग कर रहे थे। अब कागजी प्रक्रिया से आगे बढ़ता यह एलिवेटेड कॉरिडोर शहर की यातायात और स्वास्थ्य सुविधाओं की तस्वीर बदलने की दिशा में निर्णायक कदम माना जा रहा है।
डीपीआर का काम अभी चल रहा है। इसके बाद आगे की प्रक्रिया पर काम किया जाएगा। - मोहम्मद सैफी, सीजीएम (टी) एनएचएआई
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