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3500 यूनिट प्रति व्यक्ति बिजली से साकार होगा विकसित भारत का सपना : पंकज अग्रवाल
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बायोमास पर राष्ट्रीय सम्मेलन में बोले ऊर्जा सचिव
संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद सेक्टर-33 स्थित राष्ट्रीय विद्युत प्रशिक्षण संस्थान (एनपीटीआई) में एबीसी एक्सीलरेटिंग बायोमास को फायरिंग पर राष्ट्रीय बायोमास सम्मेलन का आयोजन मंगलवार को किया गया। इस सम्मेलन का आयोजन विद्युत मंत्रालय के समर्थ मिशन के तहत किया गाया। जिसका उद्देश्य थर्मल पावर प्लांटों में बायोमास के उपयोग को बढ़ावा देना है।
कार्यक्रम का उद्घाटन ऊर्जा सचिव पंकज अग्रवाल (आईएएस) ने किया। उन्होंने कहा कि देश में प्रति व्यक्ति सालाना बिजली खपत को 1400 यूनिट से बढ़ाकर 3500 यूनिट करना लक्ष्य है, जिससे विकसित भारत की परिकल्पना साकार हो सकेगी। उन्होंने यह भी बताया कि बायोमास सह-प्रज्वलन की दर अब 5000 टन प्रतिदिन हो चुकी है, जिसे जल्द 10,000 टन तक पहुंचाया जाएगा। सम्मेलन में विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों, किसानों और उद्यमियों ने भाग लिया। बायोमास पर आधारित उत्पादों की प्रदर्शनी भी लगाई गई, जिसे सराहा गया। एनपीटीआई की महानिदेशक डॉ. तृप्ता ठाकुर ने सभी प्रतिभागियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह सम्मेलन स्वच्छ ऊर्जा और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक सार्थक पहल है।
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संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद सेक्टर-33 स्थित राष्ट्रीय विद्युत प्रशिक्षण संस्थान (एनपीटीआई) में एबीसी एक्सीलरेटिंग बायोमास को फायरिंग पर राष्ट्रीय बायोमास सम्मेलन का आयोजन मंगलवार को किया गया। इस सम्मेलन का आयोजन विद्युत मंत्रालय के समर्थ मिशन के तहत किया गाया। जिसका उद्देश्य थर्मल पावर प्लांटों में बायोमास के उपयोग को बढ़ावा देना है।
कार्यक्रम का उद्घाटन ऊर्जा सचिव पंकज अग्रवाल (आईएएस) ने किया। उन्होंने कहा कि देश में प्रति व्यक्ति सालाना बिजली खपत को 1400 यूनिट से बढ़ाकर 3500 यूनिट करना लक्ष्य है, जिससे विकसित भारत की परिकल्पना साकार हो सकेगी। उन्होंने यह भी बताया कि बायोमास सह-प्रज्वलन की दर अब 5000 टन प्रतिदिन हो चुकी है, जिसे जल्द 10,000 टन तक पहुंचाया जाएगा। सम्मेलन में विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों, किसानों और उद्यमियों ने भाग लिया। बायोमास पर आधारित उत्पादों की प्रदर्शनी भी लगाई गई, जिसे सराहा गया। एनपीटीआई की महानिदेशक डॉ. तृप्ता ठाकुर ने सभी प्रतिभागियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह सम्मेलन स्वच्छ ऊर्जा और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक सार्थक पहल है।
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