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होली पर चढ़ा महंगाई का रंग, गुलाल से लेकर पिचकारी तक के दाम 20 फीसदी बढ़े
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फरीदाबाद। कोरोना मरीजों की संख्या में कमी होने के कारण इस बार होली के त्योहार पर जमकर गुलाल उड़ने के आसार हैं। व्यापारियों ने इसके लिए रंग और पिचकारियां खरीदनी शुरू कर दी हैं। लेकिन, इस बार दाम पहले से ज्यादा है। गुलाल और पिचकारी पर करीब 15 से 20 फीसदी तक दाम में उछाल देखने को मिले रहे हैं।
ओल्ड फरीदाबाद निवासी गोविंद गर्ग ने बताया कि वह हर साल होली के सामान की दुकान लगाते हैं। पिछले दो वर्षों से कोरोना के कारण व्यापार में घाटा हो रहा था। इस बार सरकार द्वारा कोविड नियमों से प्रतिबंध हटाने के कारण बाजार में तेजी है। इस बार बिक्री ज्यादा होने के आसार हैं। लोग द्वारा खुलकर होली मनाने के आसार हैं। गोविंद का कहना है कि दाम में इस बार इजाफा हुआ है। दरअसल, होली का सामान करीब छह माह पहले बनना शुरू हो जाता है। जिस समय सामान बनाया जा रहा था, कोरोना की लहर चल रही थी। इसलिए निर्माताओं ने ज्यादा मात्रा में सामान नहीं बनाया। त्योहार से करीब बीस दिन पहले प्रतिबंध हटा दिए गए, इससे माल की मांग बढ़ गई है।
देसी पिचकारी की मांग ज्यादा
सेक्टर सात निवासी हरिओम अग्रवाल का कहना है कि वह हर साल होली का सामान बेचते हैं। चाइनीज के मुकाबले अब भारतीय माल की मांग ज्यादा है। करीब तीन साल से चाइना के माल से लोगों का रुझान कम हुआ है। भारतीय माल में ब्रांडेड सामान आना शुरू हो गया है। इसमें मुर्गा छाप सबसे ज्यादा चलता है। भारतीय पिचकारी की वापसी की गारंटी भी मिल रही है। ये सस्ती और मजबूत है, इसलिए चीन का माल अब कम व्यापारी रख रहे हैं। गुलाल सबसे ज्यादा हाथरस से आया है।
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निगम अभियान के डर से कम सामान खरीद रहे दुकानदार
एनआईटी में हर साल गुलाल बेचने वाले गुलशन भाटिया का कहना है कि निगम की तोड़फोड़ की कार्रवाई से डरकर छोटे व्यापारी सामान कम खरीद रहे हैं। दुकानदारों को डर है कि कहीं विभाग दोबारा से अभियान न चला दे। गुलशन का कहना है कि त्योहार पर सामान सड़क किनारे फड़ लगाकर ही बेचा जाता है, तभी ग्राहकी सही होती है। ऐसे में यदि ज्यादा सामान रख लिया और निगम ने तोड़फोड़ शुरू कर दी तो ज्यादा नुकसान हो सकता है।
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ओल्ड फरीदाबाद निवासी गोविंद गर्ग ने बताया कि वह हर साल होली के सामान की दुकान लगाते हैं। पिछले दो वर्षों से कोरोना के कारण व्यापार में घाटा हो रहा था। इस बार सरकार द्वारा कोविड नियमों से प्रतिबंध हटाने के कारण बाजार में तेजी है। इस बार बिक्री ज्यादा होने के आसार हैं। लोग द्वारा खुलकर होली मनाने के आसार हैं। गोविंद का कहना है कि दाम में इस बार इजाफा हुआ है। दरअसल, होली का सामान करीब छह माह पहले बनना शुरू हो जाता है। जिस समय सामान बनाया जा रहा था, कोरोना की लहर चल रही थी। इसलिए निर्माताओं ने ज्यादा मात्रा में सामान नहीं बनाया। त्योहार से करीब बीस दिन पहले प्रतिबंध हटा दिए गए, इससे माल की मांग बढ़ गई है।
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देसी पिचकारी की मांग ज्यादा
सेक्टर सात निवासी हरिओम अग्रवाल का कहना है कि वह हर साल होली का सामान बेचते हैं। चाइनीज के मुकाबले अब भारतीय माल की मांग ज्यादा है। करीब तीन साल से चाइना के माल से लोगों का रुझान कम हुआ है। भारतीय माल में ब्रांडेड सामान आना शुरू हो गया है। इसमें मुर्गा छाप सबसे ज्यादा चलता है। भारतीय पिचकारी की वापसी की गारंटी भी मिल रही है। ये सस्ती और मजबूत है, इसलिए चीन का माल अब कम व्यापारी रख रहे हैं। गुलाल सबसे ज्यादा हाथरस से आया है।
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निगम अभियान के डर से कम सामान खरीद रहे दुकानदार
एनआईटी में हर साल गुलाल बेचने वाले गुलशन भाटिया का कहना है कि निगम की तोड़फोड़ की कार्रवाई से डरकर छोटे व्यापारी सामान कम खरीद रहे हैं। दुकानदारों को डर है कि कहीं विभाग दोबारा से अभियान न चला दे। गुलशन का कहना है कि त्योहार पर सामान सड़क किनारे फड़ लगाकर ही बेचा जाता है, तभी ग्राहकी सही होती है। ऐसे में यदि ज्यादा सामान रख लिया और निगम ने तोड़फोड़ शुरू कर दी तो ज्यादा नुकसान हो सकता है।