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Faridabad News: शिक्षा के सहारे आतंक का खेल, टेरर फंडिंग से शुरू किया मदरसा
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डॉ. मुज्जमिल ने अल-फलाह यूनिवर्सिटी से 700 मीटर दूर 200 गज का प्लॉट खरीदवाकर बनाया मदरसा
बेसमेंट पर लेंटर डालकर इमाम इश्तियाक ने शुरू किया 20 से अधिक बच्चों को पढ़ाना
14 लाख रुपये में खरीदा था प्लॉट, इसके दस्तावेज इमाम इश्तियाक के नाम
अमर उजाला ब्यूरो
फरीदाबाद। अल-फलाह यूनिवर्सिटी के व्हाइट कॉलर टेरर मॉड्यूल लिंक में पकड़े गए डॉ. मुज्जमिल ने शिक्षा के सहारे आतंक का खेल भी शुरू किया था। टेरर फंडिंग से यूनिवर्सिटी से लगभग 700 मीटर की दूरी पर एक 200 गज का प्लॉट खरीदकर मदरसा तैयार कराया गया। यहां इमाम इश्तियाक 20 से अधिक बच्चों को तालीम देता था।
आधिकारिक सूत्रों की मानें तो 14 लाख रुपये में ये प्लॉट लगभग डेढ़ साल पहले खरीदा गया। इस प्लॉट के दस्तावेज इमाम इश्तियाक के नाम पर मिले हैं। सूत्रों के अनुसार ये प्लॉट खरीदने के लिए रुपये डॉ. मुज्जमिल ने ही इश्तियाक को दिए थे। इसके साथ ही यहां निर्माण कार्य के लिए भी टेरर फंडिंग के रुपयों का प्रयोग किया गया। प्लॉट पर बेसमेंट का लेंटर डाला गया है। इसमें पंखे व लाइट की व्यवस्था है और नीचे कच्चा फर्श है। इसी जगह पर बैठाकर इमाम 20 से अधिक बच्चों को तालीम बीते कुछ दिनों से देने लगा था।
जांच एजेंसी के सूत्रों ने ये भी बताया कि निर्माण कार्य के दौरान इस साइट पर पानी की उपलब्धता के लिए एक समरसिबल भी कराया गया। इसे कराने के खर्च में आने वाले रुपये भी डॉ. मुज्जमिल ने ही इश्तियाक को दिए थे।
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रुपयों को लेकर हुआ था डॉ. उमर और डॉ. मुज्जमिल के बीच मन-मुटाव
जांच एजेंसी के सूत्रों की मानें तो पाकिस्तानी हैंडलर के संपर्क में अधिकतर मुज्जमिल रहता था। उसके जरिये ही डॉ. उमर भी संपर्क में रहा। कई महीनों तक दोनों के बीच सब ठीक चलता रहा। बाद में डॉ. उमर को लगा कि डॉ. मुज्जमिल को उससे ज्यादा त्वज्जो मिल रही है। टेरर फंडिंग के रुपये भी डॉ. मुज्जमिल के पास ही आते थे जो वो आगे संबंधित लोगों को देता था। सूत्रों के अनुसार सितंबर महीने के दौरान डॉ. उमर और डॉ. मुज्जमिल के बीच कहासुनी हो गई थी। ये कहासुनी रुपयों को लेकर हुई थी। इसके बाद से डॉ. उमर अपनी राह अलग से बनाने लगा था।
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बेसमेंट पर लेंटर डालकर इमाम इश्तियाक ने शुरू किया 20 से अधिक बच्चों को पढ़ाना
14 लाख रुपये में खरीदा था प्लॉट, इसके दस्तावेज इमाम इश्तियाक के नाम
अमर उजाला ब्यूरो
फरीदाबाद। अल-फलाह यूनिवर्सिटी के व्हाइट कॉलर टेरर मॉड्यूल लिंक में पकड़े गए डॉ. मुज्जमिल ने शिक्षा के सहारे आतंक का खेल भी शुरू किया था। टेरर फंडिंग से यूनिवर्सिटी से लगभग 700 मीटर की दूरी पर एक 200 गज का प्लॉट खरीदकर मदरसा तैयार कराया गया। यहां इमाम इश्तियाक 20 से अधिक बच्चों को तालीम देता था।
आधिकारिक सूत्रों की मानें तो 14 लाख रुपये में ये प्लॉट लगभग डेढ़ साल पहले खरीदा गया। इस प्लॉट के दस्तावेज इमाम इश्तियाक के नाम पर मिले हैं। सूत्रों के अनुसार ये प्लॉट खरीदने के लिए रुपये डॉ. मुज्जमिल ने ही इश्तियाक को दिए थे। इसके साथ ही यहां निर्माण कार्य के लिए भी टेरर फंडिंग के रुपयों का प्रयोग किया गया। प्लॉट पर बेसमेंट का लेंटर डाला गया है। इसमें पंखे व लाइट की व्यवस्था है और नीचे कच्चा फर्श है। इसी जगह पर बैठाकर इमाम 20 से अधिक बच्चों को तालीम बीते कुछ दिनों से देने लगा था।
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जांच एजेंसी के सूत्रों ने ये भी बताया कि निर्माण कार्य के दौरान इस साइट पर पानी की उपलब्धता के लिए एक समरसिबल भी कराया गया। इसे कराने के खर्च में आने वाले रुपये भी डॉ. मुज्जमिल ने ही इश्तियाक को दिए थे।
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रुपयों को लेकर हुआ था डॉ. उमर और डॉ. मुज्जमिल के बीच मन-मुटाव
जांच एजेंसी के सूत्रों की मानें तो पाकिस्तानी हैंडलर के संपर्क में अधिकतर मुज्जमिल रहता था। उसके जरिये ही डॉ. उमर भी संपर्क में रहा। कई महीनों तक दोनों के बीच सब ठीक चलता रहा। बाद में डॉ. उमर को लगा कि डॉ. मुज्जमिल को उससे ज्यादा त्वज्जो मिल रही है। टेरर फंडिंग के रुपये भी डॉ. मुज्जमिल के पास ही आते थे जो वो आगे संबंधित लोगों को देता था। सूत्रों के अनुसार सितंबर महीने के दौरान डॉ. उमर और डॉ. मुज्जमिल के बीच कहासुनी हो गई थी। ये कहासुनी रुपयों को लेकर हुई थी। इसके बाद से डॉ. उमर अपनी राह अलग से बनाने लगा था।