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फरीदाबाद में लोगों की सुरक्षा कर रही टीन एज पुलिस

Sat, 02 Jan 2021 10:38 PM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Sat, 02 Jan 2021 10:38 PM IST
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Teen age police protecting people in Faridabad
स्कूल के छात्रों से रूबरू होते पुलिस आयुक्त ओपी सिंह। - फोटो : Faridabad
फरीदाबाद (कैलाश गठवाल)। पुलिस के नाम से ही आम लोगों में दहशत सी होने लगती है, लेकिन फरीदाबाद में पुलिस लोगों की दोस्त बनकर काम कर रही है। ये संभव हो पाया है पुलिस आयुक्त ओपी सिंह की पहल पर। ओपी सिंह ने लगातार प्रयासों के जरिए बच्चों के मन में खास छवि बनाई है तो युवाओं को पुलिस का दोस्त बनाया है। उनका मानना है कि शहर से अपराध को कम करने के साथ साथ आपराधिक मानसिकता को खत्म किया जा सके तो हम अपने शहर को सुरक्षित बना सकते हैं। यही कारण है कि वह स्कूल - कॉलेज के विद्यार्थियों को भी पुलिस की तरह काम करना सिखा रहे हैं और उन्हें %टीन एज पुलिस% का नाम देकर बेखौफ जनता प्रहरी बनाने में जुटे हैं। (संवाद)
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युवा बने जन प्रहरी
टीन एज पुलिस के अंतर्गत पुलिस स्कूल व कॉलेज के विद्यार्थियों के साथ मिलकर उनके कानूनी हक के बारे में जागरूक कर रही है। युवाओँ को बताया जा रहा है कि कैसे किसी संदिग्ध को पहचाना जा सकता है। किसी साथी के व्यवहार में बदलाव देखें तो किसे सूचना दें। अपराध होता दिखे तो क्या करें। इसके साथ ही युवाओं को अपने आसपास के लोगों को जागरूक करने की जिम्मेदारी भी दी गई है। युवाओं को उनके इलाके के थाना प्रभारी, बीट कांस्टेबल व पुलिस अधिकारियों के नबरों की लिस्ट भी दी गई। पुलिस की इस मुहिम में अब तक 125 से ज्यादा युवा शामिल हो चुकेे हैं। ये युवा पुलिस का सहयोग कर रहे हैँ।
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नशे के खिलाफ अभियान
पुलिस ने बीते तीन महीनों में नशे के खिलाफ अभियान चलाया और एक करोड़ से ज्यादा का गांजा, स्मैक, नशीली दवाइयां व इंजेक्शन बरामद किए। दिसंबर माह में पुलिस ने %नो योर केस स्टेटस% कार्यक्रम की शुरुआत की। इसमें सभी थानों व चौकी में महीने के आखिरी शनिवार व रविवार को शिकायतकर्ता अपनी शिकायत के स्टेटस के बारे में जान सकते हैं। इसके लिए अलग से अधिकारी की मौजूदगी भी सुनिश्चित की जा रही है।
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पहली बार के अपराधियों को सुधारने का मौका:
पुलिस ने ऐसे आरोपी, जिनका पुराना कोई आपराधिक रिकार्ड नहीं है, उन्हें सुधारने व मुख्य धारा में लाने के लिए एक काउंसलिंग कार्यक्रम की शुरुआत की। ऐसे आरोपी जो गलत संगत या नशे के कारण अपराध कर बैठे। उनके जेल से आने के बाद उनकी नौकरी दिलाने या रोजगार शुरू करने में सहायता करना भी इस कार्यक्रम में शामिल है।
182 दिनों में 200 से ज्यादा गुमशुदा बच्चों को परिवार से मिलाया
पुलिस आयुक्त की पहल पर पुलिस ने गुमशुदा बच्चों को खोजने के लिए तेजी से काम किया। इसी का परिणाम है कि बीते 182 दिनों में 200 से ज्यादा बच्चों को पुलिस उनके परिजनों से मिला चुकी है। ओपी सिंह सोशल मीडिया पर भी काफी एक्टिव रहते हैं, अमूमन लोग ट्वीट कर उन्हें इस तरह के मामलों की शिकायत करते हैं। अलग-अलग सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर फॉलोअर भी टीनएजर ही ज्यादा हैं।

आपराधिक मानसिकता खत्म करना उद्देश्य
पुलिस का काम केवल अपराधियों को पकड़ना ही नहीं, लोगों के दिमाग से आपराधिक मानसिकता को खत्म करना भी है। लोग नशे के चक्कर में फंस कर छोटे मोटे अपराध कर देते हैं। जेल में जाने के बाद उनका संपर्क बड़े अपराधियों से होता है और फिर समाज में और अधिक अपराधी शामिल हो जाते हैं। हमने नशे के खिलाफ अभियान चलाया और पहली बार के अपराधियों को मुख्य धारा में जोड़ने के लिए कार्यक्रम की शुरुआत की। जल्द ही पुलिस पाठशाला कार्यक्रम चलाया जाएगा, जिसमें बुजुर्गों के साथ पुलिस का सीधा संवाद होगा।
ओपी सिंह, पुलिस आयुक्त
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