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सुषमा स्वराज का फरीदाबाद से भी रहा है गहरा जुड़ाव

Wed, 07 Aug 2019 11:00 PM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Wed, 07 Aug 2019 11:00 PM IST
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Sushma Swaraj also has a deep connection with Faridabad
सुषमा स्वराज का फरीदाबाद से भी रहा है गहरा जुड़ाव
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फरीदाबाद। पूर्व विदेश मंत्री और हरियाणा की बेटी सुषमा स्वराज का फरीदाबाद से भी गहरा जुड़ाव रहा है। जिले के कई नेता उनकी मदद से राजनीति के शिखर पर पहुंचे। जब भी शहर से कोई शख्स उनसे मिलने उनके निवास पर पहुंचता तो वे पूरी आत्मीयता के साथ मिलती थीं। फरीदाबाद में भी कई बार उन्होंने आकर स्थानीय लोगों में जोश भरने का काम किया। छात्र जीवन से राजनीति में सक्रिय हुईं सुषमा स्वराज जब भी विद्यार्थियों के कार्यक्रम में शामिल होने पहुंचीं, तो उन्हें भी राजनीति में आने के लिए प्रेरित किया। मंगलवार रात जैसे ही उनके निधन की सूचना आई तो शहर के लोगों में शोक की लहर दौड़ गई।
ऐसा लगा मेरी मां दोबारा बिछड़ गई
पूर्व विधायक चंदर भाटिया बताते हैं कि सुषमा स्वराज का जाना किसी पार्टी के लिए नहीं बल्कि पूरे देश के लिए क्षति है, जिसकी भरपाई नहीं हो सकती है। उन्होंने कहा कि सुषमा स्वराज के जाने से ऐसा लग रहा है कि उनकी मां दोबारा उनसे बिछड़ गई। चंदर भाटिया ने बताया कि सुषमा स्वराज के उनके परिवार से गहरे रिश्ते थे। चंदर भाटिया ने बताया कि वे उनके पिता स्व. कुंदन लाल भाटिया को राखी बांधती थीं। उन्होंने पहले कुंदन लाल भाटिया और फिर चंदर भाटिया को दो बार हरियाणा विधानसभा में पहुंचाने में बहुत मदद की थी। जब भी वे फरीदाबाद आतीं तो उनके परिवार से मिले बिना नहीं जाती थीं। चंदर भाटिया ने कहा कि वे एक ऐसी शख्सियत थीं, जिनके दिल में हमेशा लोगों के लिए प्यार और सम्मान होता था।
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हर किसी से आत्मीयता से मिलती थीं
चार्टर्ड अकाउंटेंट सतीश मित्तल बताते हैं कि सुषमा स्वराज के पिता पंडित छैल मोहन एसडी कॉलेज, पलवल में कार्यरत थे। सुषमा स्वराज का जन्म पलवल में हुआ था। मगर जन्म के कुछ ही समय बाद उनकी माता का निधन हो गया। इस कारण उनका लालन पालन और शिक्षा दीक्षा अंबाला उनके ननिहाल में हुई। सतीश मित्तल बताते हैं कि वे भी पलवल से संबंध रखते हैं। ऐसे में जब वे पहली बार सुषमा स्वराज से मिले और बताया कि वे पलवल के रहने वाले हैं तो वे उनसे खूब आत्मीयता के साथ मिलीं। विशेषकर उनके 1987 में विधायक बनने के बाद, जब वह ताऊ देवीलाल के नेतृत्व में मंत्री बनीं। सतीश मित्तल के अनुसार, जब वह खाद्य एवं आपूर्ति मंत्री थी तो उस समय वे हरियाणा राज्य उपभोक्ता संरक्षण परिषद के मनोनीत सदस्य थे। ऐसे में उस समय उनकी सुषमा स्वराज के साथ आधिकारिक चर्चा भी होती थी। उसके बाद जब 1997 में वे फरीदाबाद जिला उपभोक्ता न्यायालय में तत्कालीन बंसीलाल सरकार द्वारा मनोनीत किए गए, उसमें भी सुषमा स्वराज ने अपना अहम योगदान दिया था। उनके निधन से देश ने एक ऐसा कुशल नेता और प्रभावशाली वक्ता खो दिया है, जिसकी पूर्ति लगभग असंभव है।
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हर बार कुछ नया सीखने को मिलता था
भाजपा फरीदाबाद मंडल के अध्यक्ष प्रवीण चौधरी बताते हैं कि सुषमा स्वराज के साथ उन्हें काम करने का कई बार मौका मिला। जब वे हरियाणा की राजनीति में थीं तो उस समय उनके फरीदाबाद और पलवल प्रवास के दौरान वे अक्सर साथ होते थे। प्रवीण चौधरी बताते हैं कि सुषमा स्वराज बेहद सरल स्वभाव व मिलनसार प्रवृति की थीं। उम्र में काफी बड़ी होने के कारण वे उन्हें दीदी कहा करते थे। जब भी वे किसी कार्यक्रम या सभा में आती थीं तो उनसे हर बार कुछ न कुछ नया सीखने को मिलता था। जब वे मंच पर या किसी सभा में होती थीं तो उनसे धाकड़ वक्ता कोई नहीं होता था। मगर जब घर में होती थीं तो सामान्य गृहणी की तरह रहती थीं। उनका पहनावा, रहन सहन एकदम साधारण होता था। उनका इस तरह से असमय चले जाना पार्टी व देश दोनों के लिए भारी क्षति है।
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