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Faridabad News: लोक संस्कृति, शिल्प और व्यापार का संगम बना सूरजकुंड मेला
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संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। सूरजकुंड मेले में रविवार को बड़ी संख्या में पर्यटकों की भीड़ उमड़ी। पार्टनर कंट्री मिस्र, थीम स्टेट उत्तर प्रदेश और मेघालय के साथ-साथ देश-विदेश से आए शिल्पकारों और कलाकारों की प्रस्तुतियां दर्शकों को आकर्षित कर रही हैं। मेले में लोकगीत, नृत्य और सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने आगंतुकों का दिल जीत लिया।
पर्यटन मंत्री डॉ. अरविंद शर्मा के मार्गदर्शन में 15 फरवरी तक चलने वाले इस मेले में देश के विभिन्न राज्यों और 50 से अधिक देशों से आए कलाकार अपनी सांस्कृतिक विरासत प्रस्तुत कर रहे हैं। इससे आगंतुकों को भारतीय लोक संस्कृति के साथ-साथ वैश्विक विविधता का अनुभव हो रहा है। साथ ही यह मंच कारीगरों को अपनी कला और उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने का अवसर प्रदान कर रहा है।
उत्पादों को मिल रहा बढ़ावा
यह मेला ग्रामीण व हस्तनिर्मित उत्पादों को बढ़ावा देने के साथ पर्यटकों को विविध संस्कृतियों से परिचित करा रहा है। यहां हस्तशिल्प, हैंडलूम, जैविक उत्पाद, सजावटी वस्तुएं, मिट्टी के बर्तन, लकड़ी की नक्काशी, जूट बैग और पारंपरिक वस्त्रों की खरीदारी के लिए लोगों की भीड़ देखी गई। साथ ही हरियाणा, राजस्थान, जम्मू-कश्मीर, उत्तर प्रदेश, पंजाब और बिहार सहित विभिन्न राज्यों के पारंपरिक व्यंजनों का स्वाद भी पर्यटक ले रहे हैं। लोक नृत्य, संगीत और कला प्रस्तुतियों ने मेले को जीवंत माहौल प्रदान किया।
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कारीगरी और वैश्विक एकता का उत्सव
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी और पर्यटन मंत्री डॉ. अरविंद शर्मा के मार्गदर्शन में आयोजित यह शिल्प मेला केवल प्रदर्शनी तक सीमित नहीं है, बल्कि कारीगरी, विरासत और वैश्विक एकता का उत्सव बनता जा रहा है। मेले में युवा पीढ़ी को हरियाणा सहित देश-विदेश की संस्कृति से रूबरू होने का अवसर मिल रहा है, जिससे सांस्कृतिक संवाद को भी बढ़ावा मिल रहा है।
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फरीदाबाद। सूरजकुंड मेले में रविवार को बड़ी संख्या में पर्यटकों की भीड़ उमड़ी। पार्टनर कंट्री मिस्र, थीम स्टेट उत्तर प्रदेश और मेघालय के साथ-साथ देश-विदेश से आए शिल्पकारों और कलाकारों की प्रस्तुतियां दर्शकों को आकर्षित कर रही हैं। मेले में लोकगीत, नृत्य और सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने आगंतुकों का दिल जीत लिया।
पर्यटन मंत्री डॉ. अरविंद शर्मा के मार्गदर्शन में 15 फरवरी तक चलने वाले इस मेले में देश के विभिन्न राज्यों और 50 से अधिक देशों से आए कलाकार अपनी सांस्कृतिक विरासत प्रस्तुत कर रहे हैं। इससे आगंतुकों को भारतीय लोक संस्कृति के साथ-साथ वैश्विक विविधता का अनुभव हो रहा है। साथ ही यह मंच कारीगरों को अपनी कला और उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने का अवसर प्रदान कर रहा है।
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उत्पादों को मिल रहा बढ़ावा
यह मेला ग्रामीण व हस्तनिर्मित उत्पादों को बढ़ावा देने के साथ पर्यटकों को विविध संस्कृतियों से परिचित करा रहा है। यहां हस्तशिल्प, हैंडलूम, जैविक उत्पाद, सजावटी वस्तुएं, मिट्टी के बर्तन, लकड़ी की नक्काशी, जूट बैग और पारंपरिक वस्त्रों की खरीदारी के लिए लोगों की भीड़ देखी गई। साथ ही हरियाणा, राजस्थान, जम्मू-कश्मीर, उत्तर प्रदेश, पंजाब और बिहार सहित विभिन्न राज्यों के पारंपरिक व्यंजनों का स्वाद भी पर्यटक ले रहे हैं। लोक नृत्य, संगीत और कला प्रस्तुतियों ने मेले को जीवंत माहौल प्रदान किया।
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कारीगरी और वैश्विक एकता का उत्सव
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी और पर्यटन मंत्री डॉ. अरविंद शर्मा के मार्गदर्शन में आयोजित यह शिल्प मेला केवल प्रदर्शनी तक सीमित नहीं है, बल्कि कारीगरी, विरासत और वैश्विक एकता का उत्सव बनता जा रहा है। मेले में युवा पीढ़ी को हरियाणा सहित देश-विदेश की संस्कृति से रूबरू होने का अवसर मिल रहा है, जिससे सांस्कृतिक संवाद को भी बढ़ावा मिल रहा है।