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Faridabad News: सुकून सेंटर घर जोड़ने में बन रहा सहायक
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यौन उत्पीड़न और घरेलू हिंसा से परेशान गर्भवती महिलाओं की काउंसलिंग की जाती है
भारती दुबे
फरीदाबाद। बीके अस्पताल की पहली मंजिल पर बना सुकून सेंटर गर्भवती महिलाओं को सुकून दे रहा है। यौन उत्पीड़न और घरेलू हिंसा से परेशान गर्भवती महिलाओं की काउंसलिंग कर उनके घर जोड़ने का कार्य कर रहा है। ऐसे में महिलाएं दो से तीन दिन में वापस अपने घर लौट जाती हैं।
सुकून सेंटर में केवल गर्भवती महिलाओं को रखा जाता है। सेंटर गर्भवतियों को उनके परिवार से मिलवाने का सराहनीय कार्य कर रहा है। सेंटर पर यौन उत्पीड़न और घरेलू हिंसा से परेशान महिलाओं की काउंसलिंग की जाती है ताकि वे शांत मन से अपने घर वापस लौट सकें। इसके अलावा यदि गर्भवती महिला को कोई परेशानी है तो उसका इलाज भी किया जाता है। सुकून सेंटर में रहने के लिए महिलाओं को अपना एक पहचान पत्र साथ ले जाना होता है- जैसे आधार कार्ड, राशन कार्ड आदि।
दो बेड का सेंटर, माह में लगभग 15 महिलाएं पहुंच रहीं
काउंसलर कंचन गोयल ने बताया कि सेंटर में दो बेड हैं। यहां माह में लगभग 15 गर्भवती महिलाएं पहुंचती हैं। जिनका पूरा ख्याल रखा जाता है। उनको एक समय का खाना भी दिया जाता है। उनकी काउंसलिंग कर उनकी परेशानी का समाधान निकाला जाता है। कुछ गर्भवती महिलाएं गुस्से में अपने घर से भागकर सेंटर में आती हैं। कुछ यौन उत्पीड़न की शिकार गर्भवती महिलाएं पुलिस प्रशासन के साथ यहां पहुंचती हैं।
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अधिकतर गर्भवती ओपीडी से सेंटर पहुंच रहीं
घरेलू कलह से परेशान महिलाएं कई बार अस्पताल की ओपीडी में अपनी चोट का इलाज कराने पहुंचती हैं, जिसके बाद चिकित्सक उन्हें सेंटर पर पहुंचकर काउंसलिंग की सलाह देते हैं। वहीं काउंसलर खुद भी ओपीडी के कई चक्कर लगाकर ऐसी महिलाओं की तलाश करती हैं, जिसके बाद उनकी काउंसलिंग व उपचार किया जाता है।
तीन दिन से अधिक होने पर वन स्टॉप सेंटर भेज दिया जाता है
काउंसलर ने बताया कि सेंटर में गर्भवती महिलाएं तीन दिन से अधिक नहीं रुकती हैं। काउंसलिंग के बाद कुछ महिलाएं खुद अपने परिवार के पास लौट जाती हैं। कुछ महिलाओं के परिवारजन मनाकर उन्हें अपने साथ घर ले जाते हैं। यदि कोई महिला अपने घर नहीं जाना चाहती है तो उसे अस्पताल में बने वन स्टॉप सेंटर भेज दिया जाता है।
महिला के कहने पर शिकायत दर्ज कराने में मदद कर रहा सेंटर
सेंटर में यदि कोई महिला अपने परिवार में या किसी और के खिलाफ शिकायत दर्ज कराना चाहती है तो अस्पताल महिला को शिकायत करने में मदद करता हैं। पुलिस प्रशासन इसमें पूर्ण रूप से सहयोग करता है। वहीं गर्भवती के घर लौटने के बाद सेंटर की ओर से उनसे बात कर फॉलोअप भी लिया जाता है।
अविवाहित नाबालिग किशोरियां भी पुलिस प्रशासन के साथ आती हैं
सेंटर पर यौन उत्पीड़न से पीड़ित अविवाहिता किशोरियां भी पुलिस प्रशासन व परिवार के साथ पहुंचती हैं। जहां काउंसलिंग कर उनका इलाज भी किया जाता है। इसके बाद वे वापस अपने परिवार के साथ घर लौट जाती हैं। वहीं जिन महिलाओं के साथ गलत होता है वे भी आती हैं, जिनकी काउंसलिंग की जाती है।
-- -- वर्जन
सेंटर पर यौन उत्पीड़न और घरेलू हिंसा से परेशान गर्भवती महिलाओं की काउंसलिंग की जाती है। काउंसलिंग के बाद अधिकतर महिलाएं खुद अपने घर लौट जाती हैं। इसके अलावा फोन पर भी काउंसलिंग की जाती है। - डॉ. अपर्णा, नोडल अधिकारी, सुकून सेंटर
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भारती दुबे
फरीदाबाद। बीके अस्पताल की पहली मंजिल पर बना सुकून सेंटर गर्भवती महिलाओं को सुकून दे रहा है। यौन उत्पीड़न और घरेलू हिंसा से परेशान गर्भवती महिलाओं की काउंसलिंग कर उनके घर जोड़ने का कार्य कर रहा है। ऐसे में महिलाएं दो से तीन दिन में वापस अपने घर लौट जाती हैं।
सुकून सेंटर में केवल गर्भवती महिलाओं को रखा जाता है। सेंटर गर्भवतियों को उनके परिवार से मिलवाने का सराहनीय कार्य कर रहा है। सेंटर पर यौन उत्पीड़न और घरेलू हिंसा से परेशान महिलाओं की काउंसलिंग की जाती है ताकि वे शांत मन से अपने घर वापस लौट सकें। इसके अलावा यदि गर्भवती महिला को कोई परेशानी है तो उसका इलाज भी किया जाता है। सुकून सेंटर में रहने के लिए महिलाओं को अपना एक पहचान पत्र साथ ले जाना होता है- जैसे आधार कार्ड, राशन कार्ड आदि।
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दो बेड का सेंटर, माह में लगभग 15 महिलाएं पहुंच रहीं
काउंसलर कंचन गोयल ने बताया कि सेंटर में दो बेड हैं। यहां माह में लगभग 15 गर्भवती महिलाएं पहुंचती हैं। जिनका पूरा ख्याल रखा जाता है। उनको एक समय का खाना भी दिया जाता है। उनकी काउंसलिंग कर उनकी परेशानी का समाधान निकाला जाता है। कुछ गर्भवती महिलाएं गुस्से में अपने घर से भागकर सेंटर में आती हैं। कुछ यौन उत्पीड़न की शिकार गर्भवती महिलाएं पुलिस प्रशासन के साथ यहां पहुंचती हैं।
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अधिकतर गर्भवती ओपीडी से सेंटर पहुंच रहीं
घरेलू कलह से परेशान महिलाएं कई बार अस्पताल की ओपीडी में अपनी चोट का इलाज कराने पहुंचती हैं, जिसके बाद चिकित्सक उन्हें सेंटर पर पहुंचकर काउंसलिंग की सलाह देते हैं। वहीं काउंसलर खुद भी ओपीडी के कई चक्कर लगाकर ऐसी महिलाओं की तलाश करती हैं, जिसके बाद उनकी काउंसलिंग व उपचार किया जाता है।
तीन दिन से अधिक होने पर वन स्टॉप सेंटर भेज दिया जाता है
काउंसलर ने बताया कि सेंटर में गर्भवती महिलाएं तीन दिन से अधिक नहीं रुकती हैं। काउंसलिंग के बाद कुछ महिलाएं खुद अपने परिवार के पास लौट जाती हैं। कुछ महिलाओं के परिवारजन मनाकर उन्हें अपने साथ घर ले जाते हैं। यदि कोई महिला अपने घर नहीं जाना चाहती है तो उसे अस्पताल में बने वन स्टॉप सेंटर भेज दिया जाता है।
महिला के कहने पर शिकायत दर्ज कराने में मदद कर रहा सेंटर
सेंटर में यदि कोई महिला अपने परिवार में या किसी और के खिलाफ शिकायत दर्ज कराना चाहती है तो अस्पताल महिला को शिकायत करने में मदद करता हैं। पुलिस प्रशासन इसमें पूर्ण रूप से सहयोग करता है। वहीं गर्भवती के घर लौटने के बाद सेंटर की ओर से उनसे बात कर फॉलोअप भी लिया जाता है।
अविवाहित नाबालिग किशोरियां भी पुलिस प्रशासन के साथ आती हैं
सेंटर पर यौन उत्पीड़न से पीड़ित अविवाहिता किशोरियां भी पुलिस प्रशासन व परिवार के साथ पहुंचती हैं। जहां काउंसलिंग कर उनका इलाज भी किया जाता है। इसके बाद वे वापस अपने परिवार के साथ घर लौट जाती हैं। वहीं जिन महिलाओं के साथ गलत होता है वे भी आती हैं, जिनकी काउंसलिंग की जाती है।
सेंटर पर यौन उत्पीड़न और घरेलू हिंसा से परेशान गर्भवती महिलाओं की काउंसलिंग की जाती है। काउंसलिंग के बाद अधिकतर महिलाएं खुद अपने घर लौट जाती हैं। इसके अलावा फोन पर भी काउंसलिंग की जाती है। - डॉ. अपर्णा, नोडल अधिकारी, सुकून सेंटर