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Faridabad News: सूरजकुंड मेले में प्रतिभा का प्रदर्शन करेंगे विद्यार्थी
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10 विद्यालयों के बच्चे अलग-अलग दिन कार्यक्रम में प्रस्तुति देंगे
संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। जिला प्रशासन की ओर से सूरजकुंड मेले में 2 से 7 अक्तूबर तक दिवाली उत्सव का आयोजन किया जाएगा। इस अवसर पर मेले में सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा, जिसमें विद्यालयों के बच्चे अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करेंगे। इन कार्यक्रमों का आयोजन दोपहर 12 बजे से शाम 5 बजे तक किया जाएगा।
इस दौरान मेले में हरियाणवी नृत्य, पंजाबी, राजस्थानी, गुजराती, देशभक्ति गीत एवं नृत्य, रासलीला, रामलीला, कृष्णलीला आदि का आयोजन किया जाएगा। सभी विद्यालयों के बच्चों ने कार्यक्रम में भाग लेने के लिए रिहर्सलों शुरू कर दी है। सूरजकुंड मेले में 10 विद्यालयों के बच्चे कार्यक्रम में प्रस्तुति देंगे। जिला शिक्षा कार्यालय द्वारा सभी विद्यालयों के लिए अलग-अलग तारीख तय की गई है।
छात्रों को आने-जाने में होती है परेशानी
विद्यालयों के बच्चों और अध्यापकों का कहना है कि प्रशासन की ओर से वाहन की व्यवस्था न होने के कारण उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ता है। कार्यक्रमों में भाग लेने के लिए विद्यालय को खुद वाहन की व्यवस्था करनी पड़ती है। इससे अध्यापक और बच्चों को दिक्कत होती है। अध्यापकों ने कहा कि विभाग को इसके लिए प्रबंध करना चाहिए। विद्यालय के बच्चों को अक्सर प्रतियोगिताओं में भाग लेने के लिए दूर-दराज जाना पड़ता है।
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संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। जिला प्रशासन की ओर से सूरजकुंड मेले में 2 से 7 अक्तूबर तक दिवाली उत्सव का आयोजन किया जाएगा। इस अवसर पर मेले में सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा, जिसमें विद्यालयों के बच्चे अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करेंगे। इन कार्यक्रमों का आयोजन दोपहर 12 बजे से शाम 5 बजे तक किया जाएगा।
इस दौरान मेले में हरियाणवी नृत्य, पंजाबी, राजस्थानी, गुजराती, देशभक्ति गीत एवं नृत्य, रासलीला, रामलीला, कृष्णलीला आदि का आयोजन किया जाएगा। सभी विद्यालयों के बच्चों ने कार्यक्रम में भाग लेने के लिए रिहर्सलों शुरू कर दी है। सूरजकुंड मेले में 10 विद्यालयों के बच्चे कार्यक्रम में प्रस्तुति देंगे। जिला शिक्षा कार्यालय द्वारा सभी विद्यालयों के लिए अलग-अलग तारीख तय की गई है।
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छात्रों को आने-जाने में होती है परेशानी
विद्यालयों के बच्चों और अध्यापकों का कहना है कि प्रशासन की ओर से वाहन की व्यवस्था न होने के कारण उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ता है। कार्यक्रमों में भाग लेने के लिए विद्यालय को खुद वाहन की व्यवस्था करनी पड़ती है। इससे अध्यापक और बच्चों को दिक्कत होती है। अध्यापकों ने कहा कि विभाग को इसके लिए प्रबंध करना चाहिए। विद्यालय के बच्चों को अक्सर प्रतियोगिताओं में भाग लेने के लिए दूर-दराज जाना पड़ता है।
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