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Faridabad News: गंभीर प्रदूषण का कारण पराली या कुछ और, बताएगी रिपोर्ट

Sat, 05 Aug 2023 06:00 PM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Sat, 05 Aug 2023 06:00 PM IST
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Stubble or something else is the reason for serious pollution, the report will tell
टेरी सर्दी और गर्मी में लिए डेटा का लैब में अध्ययन करने में जुटा, दो माह में जारी होगी रिपोर्ट
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अमर उजाला ब्यूरो

फरीदाबाद। द एनर्जी एंड रिसोर्सेज इंस्टीट्यूट (टेरी) सर्दी और गर्मी के मौसम में वायु प्रदूषण के डेटा का लैब में अध्ययन करने में जुटा गया है। इसमें पार्टिकुलेट मैटर-2.5 से भी अति सूक्ष्म कणों का पता लगाया जाएगा। साथ ही इस बात का पता लगाया जाएगा कि शहर में प्रदूषण गंभीर होने में कौन-कौन से कारण रहते हैं। इसमें पराली समेत अन्य कारणों पर ध्यान रखा जा रहा है। रिपोर्ट दो माह में जारी हो सकती है।

टेरी के सीनियर रिर्सचर वेद प्रकाश शर्मा ने बताया कि जिले में प्रदूषण के कारणों का पता लगाने के लिए शहर को पांच भागों में बंटाकर दो सीजन का डेटा मशीनों से लिया जा चुका है। उन्होंने बताया कि प्रशासन से भी इससे संबंधित डटा लिया गया है। इसके अलावा फील्ड सर्वे से डाटा लिया गया है। ऐसे में लैब के साथ सांख्यिकी अध्ययन किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि प्रशासन से वर्तमान में वाहनों की संख्या के साथ पांच साल पहले शहर में पंजीकृत वाहनों का डेटा लिया गया है। जांच के दौरान पीएम 2.5 से भी कम आकार वाले कणों की लैब में जांच की जा रही है। इसमें कणों के उत्पत्ति के आधार पर ही पता चल सकेगा कि स्थानीय स्तर पर कण बने या बाहर से आए हैंं। अधिकारी ने बताया कि इससे रीयल टाइम सोर्स अपोर्शनमेंट स्टडी से प्रदूषण की तस्वीर साफ होगी। सभी प्रकार के डेटा की रिपोर्ट को अलग-अलग मॉडलों के आधार पर जांचा जाएगा। इससे हर मौसम में होने वाले प्रदूषण की सही तस्वीर मिल सकेगी।
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बता दें कि जिले में प्रदूषण एक गंभीर समस्या है। जिले में करीब 28 हजार छोटी-बड़ी कंपनियां हैं। वहीं, हाईवे समेत अन्य सड़कों पर वाहनों के दबाव और टूटी सड़कों से भी प्रदूषण होता है। कई बार पंजाब और हरियाणा के किसानों द्वारा पराली जलाने से भी दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण की समस्या होने की बात सामने आती है। ऐसे में टेरी के अध्ययन से यह पता चल सकेगा कि प्रदूषण ज्यादा होने पर पराली या अन्य कौन से कारण प्रमुख रूप से जिम्मेदार है। नेशनल क्लीन एयर प्रोग्राम (एनसीएपी) के तहत नगर निगम टेरी से प्रदूषण के कारणों का अध्ययन करा रहा है जिससे प्रदूषण की समस्या पर निजात पाई जाए।
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पीएम 2.5

1. पीएम 2.5 वायुमंडलीय कण पदार्थ को संदर्भित करता है, जिसमें 2.5 माइक्रोमीटर से कम व्यास होता है, जो मानव बाल के व्यास के लगभग 3 प्रतिशत होता है। आम तौर पर पीएम 2.5 के रूप में लिखा जाता है। इस श्रेणी में कण इतने छोटे होते हैं कि उन्हें केवल इलेक्ट्रॉन माइक्रोस्कोप की मदद से ही पता लगाया जा सकता है, ये पीएम 10 के समकक्षों से भी छोटे होते हैं।
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