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Faridabad News: सेक्टर-20 में रेहड़ी-पटरी कारोबार पर संकट
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- महंगे गैस सिलिंडर और कामगारों के पलायन से बढ़ी परेशानी
संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। सेक्टर-20 स्थित रेहड़ी-पटरी वाले दुकानदार के कामकाज पर गैस संकट का असर पड़ रहा है। पहले जहां सस्ते कीमतों के कारण बड़ी संख्या में ग्राहक आते थे। अब कीमतें बढ़ने पर ग्राहकों की संख्या में कमी आई है। दुकानदारों का कहना है कि शहर से कामगारों के पलायन के कारण उनकी बिक्री प्रभावित हो रही है।
बढ़ती महंगाई के बीच व्यावसायिक गैस सिलिंडर की कीमतों में लगातार वृद्धि हो रही है, जिससे खाद्य सामग्री की लागत भी बढ़ गई है। इसके चलते दुकानदारों को खाने-पीने की वस्तुओं के दाम बढ़ाने पड़ रहे हैं। दोपहर के समय पहले जहां बड़ी संख्या में कामगार रेहड़ी-पटरी पर भोजन या नाश्ता करने पहुंचते थे, अब महंगे दामों के कारण आने से कतरा रहे हैं। इस कारण कई दुकानदारों के लिए घर का खर्च चलाना भी मुश्किल हो गया है।
हमें भी सामान महंगे दामों पर मिल रहे हैं। हम जानते हैं कि दाम बढ़ाने से हमारे ग्राहक कम होंगे, लेकिन हम मजबूर हैं।-बंटी, दुकानदार
सिर्फ अपना पेट नहीं पालना है, बल्कि पूरे घर का खर्च हमारे जिम्मे हैं। या तो हम महंगे दामों पर सिलिंडर खरीदें या दुकान बंद करके गांव लौट जाएं।-किशन
पहले 50-60 रुपये में अच्छा खाना मिल जाता था, अब वही चीज 80-100 रुपये में मिल रही है। इससे रोजाना बाहर खाना मुश्किल हो गया है।-राहुल
दाम बढ़ने से अब हमें बजट को ध्यान में रखते हुए खर्च करना पड़ रहा है। अगर स्थिति नहीं सुधरी तो गांव लौटने को मजबूर होना पड़ेगा।-प्रमोद
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संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। सेक्टर-20 स्थित रेहड़ी-पटरी वाले दुकानदार के कामकाज पर गैस संकट का असर पड़ रहा है। पहले जहां सस्ते कीमतों के कारण बड़ी संख्या में ग्राहक आते थे। अब कीमतें बढ़ने पर ग्राहकों की संख्या में कमी आई है। दुकानदारों का कहना है कि शहर से कामगारों के पलायन के कारण उनकी बिक्री प्रभावित हो रही है।
बढ़ती महंगाई के बीच व्यावसायिक गैस सिलिंडर की कीमतों में लगातार वृद्धि हो रही है, जिससे खाद्य सामग्री की लागत भी बढ़ गई है। इसके चलते दुकानदारों को खाने-पीने की वस्तुओं के दाम बढ़ाने पड़ रहे हैं। दोपहर के समय पहले जहां बड़ी संख्या में कामगार रेहड़ी-पटरी पर भोजन या नाश्ता करने पहुंचते थे, अब महंगे दामों के कारण आने से कतरा रहे हैं। इस कारण कई दुकानदारों के लिए घर का खर्च चलाना भी मुश्किल हो गया है।
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हमें भी सामान महंगे दामों पर मिल रहे हैं। हम जानते हैं कि दाम बढ़ाने से हमारे ग्राहक कम होंगे, लेकिन हम मजबूर हैं।-बंटी, दुकानदार
सिर्फ अपना पेट नहीं पालना है, बल्कि पूरे घर का खर्च हमारे जिम्मे हैं। या तो हम महंगे दामों पर सिलिंडर खरीदें या दुकान बंद करके गांव लौट जाएं।-किशन
पहले 50-60 रुपये में अच्छा खाना मिल जाता था, अब वही चीज 80-100 रुपये में मिल रही है। इससे रोजाना बाहर खाना मुश्किल हो गया है।-राहुल
दाम बढ़ने से अब हमें बजट को ध्यान में रखते हुए खर्च करना पड़ रहा है। अगर स्थिति नहीं सुधरी तो गांव लौटने को मजबूर होना पड़ेगा।-प्रमोद