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Faridabad News: बिना लाइसेंस आईएसआई मार्क लगाकर बेच रहे थे स्टील बार के कपलर, 1005 पीस जब्त
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सेक्टर-23 संजय कॉलोनी में बीआईएस की छापेमारी, कंपनी के खिलाफ होगी कार्रवाई
अमर उजाला ब्यूरो
फरीदाबाद। निर्माण कार्यों में इस्तेमाल होने वाले रिइंफोर्समेंट कपलर पर बिना लाइसेंस के आईएसआई मार्क लगाकर बिक्री और भंडारण किए जाने का मामला सामने आया है। भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस) की फरीदाबाद शाखा की टीम ने सेक्टर-23 स्थित संजय कॉलोनी में एक प्रतिष्ठान पर छापेमारी कर 1005 रिइंफोर्समेंट कपलर जब्त किए हैं।
इन सभी उत्पादों पर बीआईएस का मानक चिह्न लगा हुआ था, जबकि संबंधित प्रतिष्ठान के पास इसके इस्तेमाल का वैध लाइसेंस नहीं था। बीआईएस की टीम ने यह कार्रवाई 21 जुलाई को की। विभाग के अधिकारियों के अनुसार, सेक्टर-23 संजय कॉलोनी स्थित एम/एस चिराग इंटरप्राइजेज के परिसर में तलाशी और जब्ती अभियान चलाया गया। कार्रवाई के दौरान स्टील बार के मैकेनिकल स्प्लाइस के लिए इस्तेमाल होने वाले विभिन्न आकारों के रिइंफोर्समेंट कपलर मिले। इन पर आईएसआई मार्क का इस्तेमाल किया गया था। जांच में सामने आया कि इन उत्पादों के निर्माण या भंडारण के लिए संबंधित प्रतिष्ठान के पास बीआईएस लाइसेंस नहीं था।
रिइंफोर्समेंट कपलर का इस्तेमाल निर्माण कार्यों में स्टील की सरियों को आपस में जोड़ने के लिए किया जाता है। ऐसे उत्पादों की गुणवत्ता सीधे तौर पर निर्माण की मजबूती से जुड़ी होती है। यही वजह है कि मानक के दायरे में आने वाले उत्पादों पर आईएसआई मार्क का इस्तेमाल निर्धारित नियमों के तहत ही किया जा सकता है। बिना वैध लाइसेंस के आईएसआई मार्क लगाकर उत्पाद बेचने या रखने से ग्राहकों के सामने यह भ्रम पैदा हो सकता है कि उत्पाद बीआईएस के मानकों के अनुरूप प्रमाणित है। बीआईएस अधिकारियों ने बताया कि कार्रवाई भारतीय मानक ब्यूरो अधिनियम, 2016 की धारा 17(3) के तहत की गई। टीम का नेतृत्व बीआईएस फरीदाबाद शाखा के निदेशक एवं प्रमुख एमके परमानिक के निर्देशन में वैज्ञानिक-सी एवं उप निदेशक विनीत विद्याधर बंसोड़ ने किया। उनके साथ वैज्ञानिक-सी एवं उप निदेशक राहुल राजपूत और बी. रोहित रेड्डी समेत अन्य कर्मचारी मौजूद रहे।
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कार्रवाई के दौरान जब्त किए गए सभी 1005 कपलर को विभाग ने अपने कब्जे में ले लिया है। अब बीआईएस की ओर से संबंधित प्रतिष्ठान के खिलाफ अधिनियम के तहत कार्रवाई की जाएगी। पहली बार नियमों का उल्लंघन साबित होने पर कानून के तहत दो साल तक की सजा या कम से कम दो लाख रुपये का जुर्माना, जो जब्त किए गए सामान के मूल्य का दस गुना तक हो सकता है, अथवा दोनों का प्रावधान है।
खरीदारी से पहले आईएसआई मार्क की जांच की अपील
बीआईएस ने उपभोक्ताओं और निर्माण क्षेत्र से जुड़े लोगों से अपील की है कि अनिवार्य प्रमाणन के दायरे में आने वाले उत्पाद खरीदते समय केवल आईएसआई मार्क देखकर संतुष्ट न हों, बल्कि उसकी वैधता भी जांचें। विभाग के अनुसार, बाजार में किसी उत्पाद पर मानक चिह्न का इस्तेमाल तभी किया जा सकता है, जब उसके निर्माता या संबंधित इकाई के पास इसके लिए वैध बीआईएस लाइसेंस हो। बीआईएस ने लोगों से अपील की है कि यदि कहीं आईएसआई मार्क का गलत इस्तेमाल, बिना प्रमाणन वाले उत्पाद की बिक्री या अनिवार्य प्रमाणन वाले उत्पाद को बिना लाइसेंस के बेचने की जानकारी मिले तो इसकी शिकायत बीआईएस के माध्यम से की जा सकती है।
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अमर उजाला ब्यूरो
फरीदाबाद। निर्माण कार्यों में इस्तेमाल होने वाले रिइंफोर्समेंट कपलर पर बिना लाइसेंस के आईएसआई मार्क लगाकर बिक्री और भंडारण किए जाने का मामला सामने आया है। भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस) की फरीदाबाद शाखा की टीम ने सेक्टर-23 स्थित संजय कॉलोनी में एक प्रतिष्ठान पर छापेमारी कर 1005 रिइंफोर्समेंट कपलर जब्त किए हैं।
इन सभी उत्पादों पर बीआईएस का मानक चिह्न लगा हुआ था, जबकि संबंधित प्रतिष्ठान के पास इसके इस्तेमाल का वैध लाइसेंस नहीं था। बीआईएस की टीम ने यह कार्रवाई 21 जुलाई को की। विभाग के अधिकारियों के अनुसार, सेक्टर-23 संजय कॉलोनी स्थित एम/एस चिराग इंटरप्राइजेज के परिसर में तलाशी और जब्ती अभियान चलाया गया। कार्रवाई के दौरान स्टील बार के मैकेनिकल स्प्लाइस के लिए इस्तेमाल होने वाले विभिन्न आकारों के रिइंफोर्समेंट कपलर मिले। इन पर आईएसआई मार्क का इस्तेमाल किया गया था। जांच में सामने आया कि इन उत्पादों के निर्माण या भंडारण के लिए संबंधित प्रतिष्ठान के पास बीआईएस लाइसेंस नहीं था।
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रिइंफोर्समेंट कपलर का इस्तेमाल निर्माण कार्यों में स्टील की सरियों को आपस में जोड़ने के लिए किया जाता है। ऐसे उत्पादों की गुणवत्ता सीधे तौर पर निर्माण की मजबूती से जुड़ी होती है। यही वजह है कि मानक के दायरे में आने वाले उत्पादों पर आईएसआई मार्क का इस्तेमाल निर्धारित नियमों के तहत ही किया जा सकता है। बिना वैध लाइसेंस के आईएसआई मार्क लगाकर उत्पाद बेचने या रखने से ग्राहकों के सामने यह भ्रम पैदा हो सकता है कि उत्पाद बीआईएस के मानकों के अनुरूप प्रमाणित है। बीआईएस अधिकारियों ने बताया कि कार्रवाई भारतीय मानक ब्यूरो अधिनियम, 2016 की धारा 17(3) के तहत की गई। टीम का नेतृत्व बीआईएस फरीदाबाद शाखा के निदेशक एवं प्रमुख एमके परमानिक के निर्देशन में वैज्ञानिक-सी एवं उप निदेशक विनीत विद्याधर बंसोड़ ने किया। उनके साथ वैज्ञानिक-सी एवं उप निदेशक राहुल राजपूत और बी. रोहित रेड्डी समेत अन्य कर्मचारी मौजूद रहे।
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कार्रवाई के दौरान जब्त किए गए सभी 1005 कपलर को विभाग ने अपने कब्जे में ले लिया है। अब बीआईएस की ओर से संबंधित प्रतिष्ठान के खिलाफ अधिनियम के तहत कार्रवाई की जाएगी। पहली बार नियमों का उल्लंघन साबित होने पर कानून के तहत दो साल तक की सजा या कम से कम दो लाख रुपये का जुर्माना, जो जब्त किए गए सामान के मूल्य का दस गुना तक हो सकता है, अथवा दोनों का प्रावधान है।
खरीदारी से पहले आईएसआई मार्क की जांच की अपील
बीआईएस ने उपभोक्ताओं और निर्माण क्षेत्र से जुड़े लोगों से अपील की है कि अनिवार्य प्रमाणन के दायरे में आने वाले उत्पाद खरीदते समय केवल आईएसआई मार्क देखकर संतुष्ट न हों, बल्कि उसकी वैधता भी जांचें। विभाग के अनुसार, बाजार में किसी उत्पाद पर मानक चिह्न का इस्तेमाल तभी किया जा सकता है, जब उसके निर्माता या संबंधित इकाई के पास इसके लिए वैध बीआईएस लाइसेंस हो। बीआईएस ने लोगों से अपील की है कि यदि कहीं आईएसआई मार्क का गलत इस्तेमाल, बिना प्रमाणन वाले उत्पाद की बिक्री या अनिवार्य प्रमाणन वाले उत्पाद को बिना लाइसेंस के बेचने की जानकारी मिले तो इसकी शिकायत बीआईएस के माध्यम से की जा सकती है।