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अगले हफ्ते से चालू हो जाएगा प्रदेश का पहला प्लेस ऑफ़ सेफ्टी

Sat, 04 Sep 2021 11:12 PM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Sat, 04 Sep 2021 11:12 PM IST
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State's first place of safety will be operational from next week
फरीदाबाद। प्रदेश भर में पहला प्लेस ऑफ सेफ्टी अगले सप्ताह से शुरू हो जाएगा। इमारत का उद्घाटन बीते दिनों मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने कर दिया था, लेकिन पंजीकरण का काम अटकने के कारण इसे चालू नहीं किया जा रहा था। यहां बाल बंदियों को तकनीकी शिक्षा देकर उन्हें रोजगार के योग्य बनाया जाएगा। विभाग की तरफ से अब इसकी सभी औपचारिकता पूरी कर ली गई हैं।
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रेलवे रोड एनआईटी स्थित बाल सुधार गृह के साथ में ही चार मंजिला इमारत बनाई गई है। इसमें 156 बाल बंदियों के रहने की व्यवस्था है। प्रदेश में केवल तीन बाल सुधार गृह हैं। इनमें हिसार, अंबाला और फरीदाबाद हैं। भवन का निर्माण लोक निर्माण विभाग ने किया है। इस इमारत को प्लेस ऑफ सेफ्टी का नाम दिया गया है। यहां आईटीआई के उन कोर्सों को भी चलाया जाएगा। जिनकी प्रशिक्षण अवधि तीन से छह माह होगी। राज्य सरकार ने इसकी मंजूरी दे दी है।
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50 कमरे व इंडोर गेम की है व्यवस्था
बाल सुधार गृह के अधीक्षक दिनेश यादव ने बताया कि करीब 4 एकड़ में बने प्लेस ऑफ सेफ्टी की इमारत को बनाने में करीब 6 करोड़ रुपये का खर्च आया है। यहां प्रथम तल पर सुरक्षाकर्मियों के कार्यालय बने हैं। अन्य मंजिल पर बाल कैदी रहेंगे। नए भवन को पुराने भवन में मर्ज कर इंडोर गेम की भी व्यवस्था की जाएगी। जिससे बाल कैदी अपनी रुचि अनुसार खेल सकें। अभी पुराने भवन के अंदर गेम के लिए इतनी व्यवस्था नहीं है। नए भवन में वालीबॉल, फुटबॉल, बास्केट बॉल, बैडमिंटन आदि खेलने की व्यवस्था है।
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एसी क्लासरूम और कंप्यूटर लैब बनाए गई
बाल कैदियों के लिए एयरकंडीशन क्लास रूम और कम्प्यूटर लैब बनाई गई है। इसी कैंपस में कोर्ट रूम भी बनाया गया है। यहीं बाल कैदियों की पेशी हो सकेगी। इसके अलावा नए भवन में एक रूम अलग से बनाया गया है, जिसमें बच्चों के बीमार होने पर अलग से रखा जाएगा। इनकी देखभाल के लिए डॉक्टर भी होंगे। भवन के अंदर बनने वाली लाइब्रेरी में प्रतियोगी परीक्षाओं से संबंधित पुस्तकें भी उपलब्ध कराई जाएंगी। अधीक्षक के मुताबिक इसमें 156 बाल कैदियों के रहने की व्यवस्था है। इस बाल सुधार गृह के अधीन पांच जिले फरीदाबाद, पलवल, गुड़गांव, मेवात और महेंद्रगढ़ हैं। इन जिलों के बाल कैदी यहां आते हैं। अभी बाल कैदियों के लिए 12वीं क्लास तक पढ़ने की भी व्यवस्था है। ओपन स्कूल से भी पढ़ाई करने की सुविधा दी जाती है। कैदियों को पढ़ाने के लिए बाहर के शिक्षक आते हैं। अभी पुराने भवन में बाल कैदियों से मिलने आने वाले परिजनों के लिए कहीं बैठने की व्यवस्था नहीं है। उन्होंने बताया कि यहाँ 18 वर्ष से ऊपर हो चुके बड़े अपराधों में शामिल आरोपियों को रखा जाएगा। अगले सप्ताह इसे शुरू कर दिया जाएगा।
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