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Faridabad News: स्टाफ की कमी से चरमराई सिटी बस सेवा, बीच रास्ते में हो रहीं खराब
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- हर दिन 10–12 बसों की मरम्मत, आधी बसें ही सड़कों पर उतर पा रहीं
संवाद न्यूज एजेंसी
बल्लभगढ़। शहर में सिटी बस सेवा इन दिनों बदहाल स्थिति में पहुंच गई है। बस डिपो में कर्मचारियों की कमी के कारण बसों की समय पर सर्विस नहीं हो पा रही, जिससे आए दिन बसें बीच रास्ते में खराब हो रही हैं और यात्रियों को भारी परेशानी झेलनी पड़ रही है। जानकारी के अनुसार, एफएमडीए की ओर से गांवों को शहर से जोड़ने के लिए 50 सिटी बसों का संचालन किया जाता है। हालांकि स्टाफ और तकनीकी समस्याओं के चलते फिलहाल केवल 25 से 30 बसें ही रूटों पर चल रही हैं, जबकि 2-3 रूट अस्थायी रूप से बंद कर दिए गए हैं। डिपो में रोजाना करीब 10 से 12 बसों की मरम्मत की जा रही है। बसों में इंजन, ब्रेक, क्लच और इलेक्ट्रिकल खराबियां सामने आ रही हैं, लेकिन मैकेनिकों की कमी के चलते सभी बसों की पूरी जांच नहीं हो पा रही। ऐसे में कई बसों को अधूरी मरम्मत के बाद ही सड़कों पर उतारना पड़ता है, जिससे वे बीच रास्ते में बंद हो जाती हैं। इसका सबसे ज्यादा असर नौकरीपेशा लोगों, छात्रों और महिलाओं पर पड़ रहा है, जिन्हें घंटों इंतजार करना पड़ता है या अन्य साधनों पर अतिरिक्त खर्च करना पड़ता है।
डिपो कर्मचारियों का कहना है कि पुरानी बसें होने के कारण भी समस्याएं बढ़ रही हैं, जबकि सर्विस सेंटर में आधुनिक उपकरणों और पर्याप्त स्टाफ की कमी है। सिटी बस इंचार्ज अंकित ने बताया कि बसों को समय पर ठीक करने की कोशिश की जा रही है, लेकिन कर्मचारियों की कमी के चलते दिक्कतें आ रही हैं।
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संवाद न्यूज एजेंसी
बल्लभगढ़। शहर में सिटी बस सेवा इन दिनों बदहाल स्थिति में पहुंच गई है। बस डिपो में कर्मचारियों की कमी के कारण बसों की समय पर सर्विस नहीं हो पा रही, जिससे आए दिन बसें बीच रास्ते में खराब हो रही हैं और यात्रियों को भारी परेशानी झेलनी पड़ रही है। जानकारी के अनुसार, एफएमडीए की ओर से गांवों को शहर से जोड़ने के लिए 50 सिटी बसों का संचालन किया जाता है। हालांकि स्टाफ और तकनीकी समस्याओं के चलते फिलहाल केवल 25 से 30 बसें ही रूटों पर चल रही हैं, जबकि 2-3 रूट अस्थायी रूप से बंद कर दिए गए हैं। डिपो में रोजाना करीब 10 से 12 बसों की मरम्मत की जा रही है। बसों में इंजन, ब्रेक, क्लच और इलेक्ट्रिकल खराबियां सामने आ रही हैं, लेकिन मैकेनिकों की कमी के चलते सभी बसों की पूरी जांच नहीं हो पा रही। ऐसे में कई बसों को अधूरी मरम्मत के बाद ही सड़कों पर उतारना पड़ता है, जिससे वे बीच रास्ते में बंद हो जाती हैं। इसका सबसे ज्यादा असर नौकरीपेशा लोगों, छात्रों और महिलाओं पर पड़ रहा है, जिन्हें घंटों इंतजार करना पड़ता है या अन्य साधनों पर अतिरिक्त खर्च करना पड़ता है।
डिपो कर्मचारियों का कहना है कि पुरानी बसें होने के कारण भी समस्याएं बढ़ रही हैं, जबकि सर्विस सेंटर में आधुनिक उपकरणों और पर्याप्त स्टाफ की कमी है। सिटी बस इंचार्ज अंकित ने बताया कि बसों को समय पर ठीक करने की कोशिश की जा रही है, लेकिन कर्मचारियों की कमी के चलते दिक्कतें आ रही हैं।
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