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एनएस फ्लूड के लिए भटकता रहा बेटा, पिता ने दम तोड़ा
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Son wandering for NS fluid, father died
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फरीदाबाद। बीके नागरिक अस्पताल की इमरजेंसी में एक मरीज की मौत हो गई। मरीज का बेटा बाहर एनएस फ्लूड लेने गया था। चिकित्सकों के मुताबिक मरीज की हालत बहुत ज्यादा गंभीर थी। एनएस फ्लूड के जरिए हाई डोज की दवाईयां देनी थी। मंगलवार को फरीदाबाद निवासी राकेश के पिता राजकुमार की हालत अचानक से खराब हो गई। उपचार के लिए बीके अस्पताल की इमरजेंसी में लाया गया। राकेश ने बताया कि इमरजेंसी में उपचार शुरू होने के बाद उनसे एनएस फ्लूड दवाई बाहर से लाने के लिए कहा गया। इसी दौरान सूचना मिली की पिता की मौत हो चुकी है। उन्होंने कहा आधे घंटे तक उनके पिता इमरजेंसी में रहे।
इमरजेंसी में तैनात डॉ. मोनिका ने बताया कि मरीज राजकुमार की हालत काफी खराब थी। मरीज को होश में लाने के लिए हाई डोज का इस्तेमाल करने के लिए एनएस फ्लूड का इस्तेमाल किया जाता है। उनके पास बड़ी फ्लूड नहीं थी। इसलिए मरीज के परिजन को बाहर से लाने के लिए कहा गया। वहीं पीएमओ डॉ. सविता यादव का कहना है कि इमरजेंसी में वैसे सभी महत्वपूर्ण दवाईयां मौजूद हैं। एनएस फ्लूड को बाहर से लाने के लिए क्यों कहा गया इस बारे में जांच की जाएगी।
नहीं है कोई डेथ कॉर्नर
बीके अस्पताल की इमरजेंसी में अगर किसी मरीज की डेथ हो जाती है तो उसकी बॉडी को रखने के लिए कोई अलग से कमरा और कॉर्नर नहीं है। जिसकी वजह से इमरजेंसी में डेथ होने के बाद शौचालय के पास ही डेथ बॉडी को लेकर परिजन खड़े रहते हैं। कागजी कार्रवाई पूरी होने के बाद ही शव को ले जाया जाता है। प्रधान चिकित्सा अधिकारी (पीएमओ) डॉ. सविता यादव का कहना है कि बॉडी को रखने के लिए कोई न कोई इंतजाम किया जाएगा।
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इमरजेंसी में तैनात डॉ. मोनिका ने बताया कि मरीज राजकुमार की हालत काफी खराब थी। मरीज को होश में लाने के लिए हाई डोज का इस्तेमाल करने के लिए एनएस फ्लूड का इस्तेमाल किया जाता है। उनके पास बड़ी फ्लूड नहीं थी। इसलिए मरीज के परिजन को बाहर से लाने के लिए कहा गया। वहीं पीएमओ डॉ. सविता यादव का कहना है कि इमरजेंसी में वैसे सभी महत्वपूर्ण दवाईयां मौजूद हैं। एनएस फ्लूड को बाहर से लाने के लिए क्यों कहा गया इस बारे में जांच की जाएगी।
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नहीं है कोई डेथ कॉर्नर
बीके अस्पताल की इमरजेंसी में अगर किसी मरीज की डेथ हो जाती है तो उसकी बॉडी को रखने के लिए कोई अलग से कमरा और कॉर्नर नहीं है। जिसकी वजह से इमरजेंसी में डेथ होने के बाद शौचालय के पास ही डेथ बॉडी को लेकर परिजन खड़े रहते हैं। कागजी कार्रवाई पूरी होने के बाद ही शव को ले जाया जाता है। प्रधान चिकित्सा अधिकारी (पीएमओ) डॉ. सविता यादव का कहना है कि बॉडी को रखने के लिए कोई न कोई इंतजाम किया जाएगा।
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