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किसान-मजदूर एकता दिवस मनाकर दिखाई एकजुटता
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फरीदाबाद। भारतीय व्यापार संघ (सीटू) की जिला समिति ने शनिवार को लघु सचिवालय के पार्क में किसान-मजदूर एकता दिवस मनाया। कार्यक्रम की अध्यक्षता सीटू के जिला प्रधान निरंतर पाराशर ने की। इसका संचालन लाल बाबू शर्मा ने किया। सीटू के जिला उपाध्यक्ष वीरेंद्र सिंह डंगवाल ने बताया कि संत रविदास जयंती के दिन ही चंद्रशेखर आजाद का शहीदी दिवस भी मनाया गया। उन्होंने देश की आजादी के लिए जीवन दे दिया। जुलाई 1906 में जन्मे आजाद को देश की आजादी प्राणों से भी प्यारी थी। उन्होंने देश की आजादी के लिए हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन का गठन किया। इन्होंने 1925 के काकोरी कांड में मुख्य भूमिका निभाई।
सीटू जिला सचिव लालबाबू शर्मा और किसान नेता नवल सिंह ने किसान आंदोलन में सरकार पर अनदेखी का आरोप लगाया। उन्होंने कृषि कानूनों को थोपे गए कानून बताया। साथ ही कहा कि मंडी व्यवस्था समाप्त होने से आढ़तियों को नुकसान होगा। लाखों मजदूरों का काम छिन जाएगा। न्यूनतम समर्थन मूल्य को कानूनी गारंटी नहीं दी तो किसान अपनी लागत भी नहीं वसूल सकेगा। कई पहलुओं में कानूनों का दुष्परिणाम किसान मजदूर के अलावा दुकानदार, दस्तकार, कर्मचारी को भी भुगतना पड़ेगा।
उन्होंने कहा कि सरकार ने 44 श्रम कानूनों को संशोधित कर चार लेबर कोड बना दिए हैं। अब मजदूरों को न्यूनतम मजदूरी मिल रही या नहीं इस बाबत किसी भी प्रकार की सुनवाई सरकारी एजेंसियों द्वारा नहीं की जाएगी। श्रम विभाग अब कारखानों में हस्तक्षेप करने में सक्षम नहीं रहेगा। श्रम कानूनों में संशोधन होने से मजदूरों के लिए बहुत बड़ा संकट पैदा होगा। विरोध सभा को शिवप्रसाद, वीरेंद्र पाल, ओम प्रकाश, कमलेश चौधरी, अरविंद कुमार, मनोज कुमार स्टेट कोषाध्यक्ष ग्रामीण सफाई कर्मचारी यूनियन ने भी संबोधित किया।
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सीटू जिला सचिव लालबाबू शर्मा और किसान नेता नवल सिंह ने किसान आंदोलन में सरकार पर अनदेखी का आरोप लगाया। उन्होंने कृषि कानूनों को थोपे गए कानून बताया। साथ ही कहा कि मंडी व्यवस्था समाप्त होने से आढ़तियों को नुकसान होगा। लाखों मजदूरों का काम छिन जाएगा। न्यूनतम समर्थन मूल्य को कानूनी गारंटी नहीं दी तो किसान अपनी लागत भी नहीं वसूल सकेगा। कई पहलुओं में कानूनों का दुष्परिणाम किसान मजदूर के अलावा दुकानदार, दस्तकार, कर्मचारी को भी भुगतना पड़ेगा।
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उन्होंने कहा कि सरकार ने 44 श्रम कानूनों को संशोधित कर चार लेबर कोड बना दिए हैं। अब मजदूरों को न्यूनतम मजदूरी मिल रही या नहीं इस बाबत किसी भी प्रकार की सुनवाई सरकारी एजेंसियों द्वारा नहीं की जाएगी। श्रम विभाग अब कारखानों में हस्तक्षेप करने में सक्षम नहीं रहेगा। श्रम कानूनों में संशोधन होने से मजदूरों के लिए बहुत बड़ा संकट पैदा होगा। विरोध सभा को शिवप्रसाद, वीरेंद्र पाल, ओम प्रकाश, कमलेश चौधरी, अरविंद कुमार, मनोज कुमार स्टेट कोषाध्यक्ष ग्रामीण सफाई कर्मचारी यूनियन ने भी संबोधित किया।
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