फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Delhi NCR ›   Faridabad News ›   Smoking during pregnancy can cause asthma in the baby

Faridabad News: गर्भवती के धूम्रपान करने से बच्चे को हो सकता है अस्थमा

Tue, 06 May 2025 12:21 AM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Tue, 06 May 2025 12:21 AM IST
विज्ञापन
Smoking during pregnancy can cause asthma in the baby
विश्व अस्थमा दिवस
विज्ञापन

समय पर इलाज नहीं मिलने पर मरीज की जान भी जा सकती है
भारती दुबे

फरीदाबाद। अस्थमा के मरीजों में बच्चों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। डॉक्टरों की मानें तो गर्भवती महिला अगर धूम्रपान करती है तो उसके गर्भ में पल रहे बच्चे को भी भविष्य में अस्थमा की बीमारी हो सकती है। किसी अन्य व्यक्ति के धूम्रपान करने पर निकलने वाले धुएं के संपर्क से भी बच्चों को अस्थमा का खतरा हो सकता है।
सिविल अस्पताल में आने वाले मरीजों में काफी संख्या में बच्चों में भी अस्थमा के लक्षण देखने को मिल रहे हैं। जिले में नवंबर 2024 से लेकर अप्रैल 2025 तक अस्थमा के 118 मरीज पाए गए हैं। वहीं श्वसन संक्रमण के 4930 मरीज पाए गए हैं। बीके अस्पताल में प्रतिदिन करीब 150 बच्चे उपचार के लिए पहुंचते हैं, जिसमें करीब 45 बच्चों में सांस संबंधी समस्या देखने को मिल रही हैं। ऐसे में 15 बच्चों में अस्थमा के लक्षण दिखाई देते हैं। डॉक्टरों की ओर से उन्हें आपात स्थिति में इस्तेमाल करने के लिए अलग से विशेष दवाई दी जाती है।
विज्ञापन


बीके अस्पताल में बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. ईशा कपूर ने बताया कि अस्पताल की ओपीडी में रोजाना 150 बच्चे उपचार के लिए पहुंचते हैं। इसमें 15 बच्चे ऐसे होते है, जिनमें अस्थमा के लक्षण होते हैं। जिनमें सांस लेते समय मुंह और नाक से आवाज आती है, रात में अधिक खांसी होती है और बच्चों के खेलते समय बहुत जल्दी उनकी सांस चढ़ जाती है। ऐसे में बच्चों का लगभग तीन साल तक इलाज किया जाता है। उन्हें इस्तेमाल करने के लिए इनहेलर (सांस लेने वाला) दिया जाता है। लगभग तीन साल तक नियमित रूप से दवाई लेनी पड़ती है।
विज्ञापन
विज्ञापन


सही समय पर इलाज कराए मरीज

निजी अस्पताल में श्वास रोग विशेषज्ञ डॉ. विद्या नायर ने बताया कि अस्थमा सहित फेफड़े संबंधी कई रोग अब हर आयु वर्ग में देखने को मिल रहे हैं। वायु प्रदूषण के कारण कफ और खांसी रोगियों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। इस ओर सभी को ध्यान देना होगा। अस्थमा सांस की नली और फेफड़ों से जुड़ी एक गंभीर बीमारी है, जिसमें कई बार सही समय पर मरीज को इलाज ना मिले, तो उसकी जान भी जा सकती है। यह रोग बच्चों से लेकर बड़ों को कभी भी हो सकता है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed