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Faridabad News: ग्रीन बेल्ट पर दुकानें, बसीं कॉलोनियां
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पेट्रोलिंग टीम की निगरानी के बावजूद नहीं रुक रहा ग्रीन बेल्ट पर कब्जे का खेल
अमर उजाला ब्यूरो
फरीदाबाद। डीएनडी-केएमपी एक्सप्रेसवे के साथ विकसित की गई ग्रीन बेल्ट अवैध कॉलोनियों की चपेट में है। हरियाली और सरकारी जमीन को कब्जों से बचाने के लिए हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (एचएसवीपी) ने लाखों रुपये खर्च करके पेट्रोलिंग टीम तैनात की है लेकिन जमीन पर पेट्रोलिंग टीम का कोई असर नहीं दिख रहा है।
अमर उजाला की पड़ताल में दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे के सेक्टर-37 से 59 तक कई स्थानों पर ग्रीन बेल्ट पर अवैध कॉलोनियां बस गई हैं। इसके साथ ही ग्रीन बेल्ट पर पार्किंग, दुकान, और अन्य गतिविधियां भी संचलित हो रही हैं। एक्सप्रेसवे के कुछ हिस्सों में अतिक्रमण सर्विस रोड तक पहुंच गया है। नहरपार स्थित खेड़ी पुल पुलिस थाने के पास ही ग्रीन बेल्ट के हिस्सों में अतिक्रमणकारियों का कब्जा है। अतिक्रमणकारियों को पुलिसकर्मियों का डर भी नहीं है। थाने से सटे ग्रीन बेल्ट इलाके में अनधिकृत कॉलोनियां विकसित हो गई हैं। कई जगह ग्रीन बेल्ट की जमीन पर दुकानें भी खुल गई हैं। सेक्टर-30 स्थित पुलिस लाइन के पास भी ग्रीन बेल्ट की जमीन पर दुकानें और अन्य गतिविधियां संचालित होती मिलीं। इन सभी अवैध कॉलोनियों में बिजली और पानी की लाइन तक पहुंच गई है।
राजीव नगर में पार्किंग के लिए इस्तेमाल हो रही ग्रीन बेल्ट की जमीन
राजीव नगर के आसपास ग्रीन बेल्ट से सटे खाली हिस्सों का इस्तेमाल पार्किंग और अन्य गतिविधियों के लिए किया जा रहा है। समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो इन अस्थायी कब्जों के स्थायी अतिक्रमण में बदल जाएगा। वहीं, सेक्टर-17-18 चौक पर भी ग्रीन बेल्ट के हिस्सों में अनधिकृत इस्तेमाल और अतिक्रमण की स्थिति सामने आई। खास बात यह है कि विभाग कागजों पर इसी क्षेत्र में हरियाली बढ़ाने और पौधारोपण की योजनाओं पर काम कर रहा है। ऐसे में विभाग की कार्रवाई पर भी सवाल उठ रहे है।
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फेंसिंग के बावजूद ग्रीन बेल्ट पर कब्जा
डीएनडी-केएमपी एक्सप्रेसवे पर ग्रीन बेल्ट को बचाने के लिए एचएसवीपी ने फेंसिंग ग्रिल लगा रखा है। स्थानीय लोग फेंसिंग ग्रिल तोड़कर ग्रीन बेल्ट में दुकानें और अवैध मकान तक बना रखे हैं। चाहरदीवारी नहीं होने से पौधों को पशुओं से नुकसान पहुंच रहा है। वहीं मिट्टी कटाव और कचरा डाले जाने से हरित क्षेत्र लगातार खराब हो रहा है। पहले से मौजूद अतिक्रमण पर कार्रवाई के बिना सिर्फ फेंसिंग से समस्या खत्म होना मुश्किल है।
वर्जन-
एक्सप्रेसवे की ग्रीन बेल्ट को सुरक्षित रखने के लिए निजी एजेंसी की मदद ली जा रही है। विभाग ग्रीन बेल्ट से अतिक्रमण हटाने की लगातार कार्रवाई कर रहा है। जहां भी अतिक्रमण की शिकायत या सूचना मिलती है, वहां कार्रवाई की जाती है। आगे भी यह अभियान जारी रहेगा। -संदीप दहिया, अधीक्षण अभियंता, एचएसवीपी
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अमर उजाला ब्यूरो
फरीदाबाद। डीएनडी-केएमपी एक्सप्रेसवे के साथ विकसित की गई ग्रीन बेल्ट अवैध कॉलोनियों की चपेट में है। हरियाली और सरकारी जमीन को कब्जों से बचाने के लिए हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (एचएसवीपी) ने लाखों रुपये खर्च करके पेट्रोलिंग टीम तैनात की है लेकिन जमीन पर पेट्रोलिंग टीम का कोई असर नहीं दिख रहा है।
अमर उजाला की पड़ताल में दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे के सेक्टर-37 से 59 तक कई स्थानों पर ग्रीन बेल्ट पर अवैध कॉलोनियां बस गई हैं। इसके साथ ही ग्रीन बेल्ट पर पार्किंग, दुकान, और अन्य गतिविधियां भी संचलित हो रही हैं। एक्सप्रेसवे के कुछ हिस्सों में अतिक्रमण सर्विस रोड तक पहुंच गया है। नहरपार स्थित खेड़ी पुल पुलिस थाने के पास ही ग्रीन बेल्ट के हिस्सों में अतिक्रमणकारियों का कब्जा है। अतिक्रमणकारियों को पुलिसकर्मियों का डर भी नहीं है। थाने से सटे ग्रीन बेल्ट इलाके में अनधिकृत कॉलोनियां विकसित हो गई हैं। कई जगह ग्रीन बेल्ट की जमीन पर दुकानें भी खुल गई हैं। सेक्टर-30 स्थित पुलिस लाइन के पास भी ग्रीन बेल्ट की जमीन पर दुकानें और अन्य गतिविधियां संचालित होती मिलीं। इन सभी अवैध कॉलोनियों में बिजली और पानी की लाइन तक पहुंच गई है।
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राजीव नगर में पार्किंग के लिए इस्तेमाल हो रही ग्रीन बेल्ट की जमीन
राजीव नगर के आसपास ग्रीन बेल्ट से सटे खाली हिस्सों का इस्तेमाल पार्किंग और अन्य गतिविधियों के लिए किया जा रहा है। समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो इन अस्थायी कब्जों के स्थायी अतिक्रमण में बदल जाएगा। वहीं, सेक्टर-17-18 चौक पर भी ग्रीन बेल्ट के हिस्सों में अनधिकृत इस्तेमाल और अतिक्रमण की स्थिति सामने आई। खास बात यह है कि विभाग कागजों पर इसी क्षेत्र में हरियाली बढ़ाने और पौधारोपण की योजनाओं पर काम कर रहा है। ऐसे में विभाग की कार्रवाई पर भी सवाल उठ रहे है।
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फेंसिंग के बावजूद ग्रीन बेल्ट पर कब्जा
डीएनडी-केएमपी एक्सप्रेसवे पर ग्रीन बेल्ट को बचाने के लिए एचएसवीपी ने फेंसिंग ग्रिल लगा रखा है। स्थानीय लोग फेंसिंग ग्रिल तोड़कर ग्रीन बेल्ट में दुकानें और अवैध मकान तक बना रखे हैं। चाहरदीवारी नहीं होने से पौधों को पशुओं से नुकसान पहुंच रहा है। वहीं मिट्टी कटाव और कचरा डाले जाने से हरित क्षेत्र लगातार खराब हो रहा है। पहले से मौजूद अतिक्रमण पर कार्रवाई के बिना सिर्फ फेंसिंग से समस्या खत्म होना मुश्किल है।
वर्जन-
एक्सप्रेसवे की ग्रीन बेल्ट को सुरक्षित रखने के लिए निजी एजेंसी की मदद ली जा रही है। विभाग ग्रीन बेल्ट से अतिक्रमण हटाने की लगातार कार्रवाई कर रहा है। जहां भी अतिक्रमण की शिकायत या सूचना मिलती है, वहां कार्रवाई की जाती है। आगे भी यह अभियान जारी रहेगा। -संदीप दहिया, अधीक्षण अभियंता, एचएसवीपी