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Faridabad News: नाबालिग पत्नी से दुष्कर्म में काट रहे थे 14 साल जेल, अब हत्या में उम्रकैद का फैसला
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दो अलग-अलग याचिकाओं पर अदालत ने सुनाया फैसला
सचिन कुमार
फरीदाबाद। एक ही घटनाक्रम से जुड़े दो मामलों में दोषी पति पप्पू कुमार को अलग-अलग सजाएं मिली हैं। करीब तीन माह पहले अदालत ने नाबालिग पत्नी को घर से ले जाकर दुष्कर्म करने के मामले में आरोपी को 14 वर्ष के कारावास की सजा सुनाई थी। अब उसी पीड़िता की हत्या के मामले में अदालत ने दोषी पप्पू कुमार को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने कहा कि यह मामला रेयरेस्ट ऑफ रेयर श्रेणी का नहीं है, इसलिए मृत्युदंड देने का आधार नहीं बनता है।
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश सुरेंद्र कुमार की अदालत ने 21 जुलाई को अभियोजन और बचाव पक्ष की दलीलें व गवाहों के बयानों के आधार पर भारतीय दंड संहिता की धारा 302 और 323 के तहत आरोपी को दोषी ठहराया। साथ ही 302 के तहत आजीवन कारावास और 25 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। जुर्माना अदा नहीं करने पर दो वर्ष का अतिरिक्त कठोर कारावास भुगतना होगा। धारा 323 के तहत एक वर्ष के कठोर कारावास और एक हजार रुपये जुर्माने की सजा भी सुनाई गई। दोनों सजाएं साथ-साथ चलेंगी व विचारण के दौरान जेल में बिताई गई अवधि को सजा में समायोजित किया जाएगा।
पीड़ित पक्ष की अधिवक्ता निर्मला वर्मा ने बताया कि इस घटनाक्रम से जुड़े दो अलग-अलग याचिका में अदालत ने निर्णय दिए हैं। अदालत ने दुष्कर्म करने के मामले में पॉक्सो अधिनियम के तहत दोषी ठहराते हुए करीब तीन माह पहले 14 वर्ष के कारावास की सजा सुनाई थी। अधिवक्ता के अनुसार, पीड़िता दो बार गर्भवती हुई थी और दोनों बार वह नाबालिग थी।
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हत्या के मामले में दर्ज प्राथमिकी के अनुसार, 11 अप्रैल 2020 की रात पप्पू कुमार अपनी पत्नी को घर से बाहर ले गया था। उसने उसके साथ मारपीट की और गंभीर रूप से घायल अवस्था में छोड़कर चला गया। परिजन उसे उपचार के लिए अस्पताल ले गए, जहां से उसे दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल रेफर किया गया। उपचार के दौरान 15 अप्रैल 2020 को उसकी मृत्यु हो गई। इसके बाद पुलिस ने प्राथमिकी में हत्या की धारा जोड़ दी थी और 16 अप्रैल 2020 को पप्पू कुमार को गिरफ्तार किया था।
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सचिन कुमार
फरीदाबाद। एक ही घटनाक्रम से जुड़े दो मामलों में दोषी पति पप्पू कुमार को अलग-अलग सजाएं मिली हैं। करीब तीन माह पहले अदालत ने नाबालिग पत्नी को घर से ले जाकर दुष्कर्म करने के मामले में आरोपी को 14 वर्ष के कारावास की सजा सुनाई थी। अब उसी पीड़िता की हत्या के मामले में अदालत ने दोषी पप्पू कुमार को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने कहा कि यह मामला रेयरेस्ट ऑफ रेयर श्रेणी का नहीं है, इसलिए मृत्युदंड देने का आधार नहीं बनता है।
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश सुरेंद्र कुमार की अदालत ने 21 जुलाई को अभियोजन और बचाव पक्ष की दलीलें व गवाहों के बयानों के आधार पर भारतीय दंड संहिता की धारा 302 और 323 के तहत आरोपी को दोषी ठहराया। साथ ही 302 के तहत आजीवन कारावास और 25 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। जुर्माना अदा नहीं करने पर दो वर्ष का अतिरिक्त कठोर कारावास भुगतना होगा। धारा 323 के तहत एक वर्ष के कठोर कारावास और एक हजार रुपये जुर्माने की सजा भी सुनाई गई। दोनों सजाएं साथ-साथ चलेंगी व विचारण के दौरान जेल में बिताई गई अवधि को सजा में समायोजित किया जाएगा।
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पीड़ित पक्ष की अधिवक्ता निर्मला वर्मा ने बताया कि इस घटनाक्रम से जुड़े दो अलग-अलग याचिका में अदालत ने निर्णय दिए हैं। अदालत ने दुष्कर्म करने के मामले में पॉक्सो अधिनियम के तहत दोषी ठहराते हुए करीब तीन माह पहले 14 वर्ष के कारावास की सजा सुनाई थी। अधिवक्ता के अनुसार, पीड़िता दो बार गर्भवती हुई थी और दोनों बार वह नाबालिग थी।
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हत्या के मामले में दर्ज प्राथमिकी के अनुसार, 11 अप्रैल 2020 की रात पप्पू कुमार अपनी पत्नी को घर से बाहर ले गया था। उसने उसके साथ मारपीट की और गंभीर रूप से घायल अवस्था में छोड़कर चला गया। परिजन उसे उपचार के लिए अस्पताल ले गए, जहां से उसे दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल रेफर किया गया। उपचार के दौरान 15 अप्रैल 2020 को उसकी मृत्यु हो गई। इसके बाद पुलिस ने प्राथमिकी में हत्या की धारा जोड़ दी थी और 16 अप्रैल 2020 को पप्पू कुमार को गिरफ्तार किया था।