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निजी अस्पताल के भरोसे नहीं रहेंगे गंभीर मरीज, सरकारी स्तर पर सुविधाएं बढ़ाने की तैयारी
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फरीदाबाद (मूर्ति दलाल)। कोरोना संक्रमण को लेकर स्थिति फिर से चिंताजनक हो चुकी है। ऐसे में गंभीर मरीजों के लिए स्वास्थ्य विभाग व्यवस्थाएं बढ़ाने में जुटा है। जल्द ही ईएसआईसी मेडिकल कॉलेज में प्रशासन व सरकार के सहयोग से 20 नए आईसीयू बेड की व्यवस्था की जाएगी। वहीं, हाल ही में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के हाथों लोकार्पण के बाद छत्रपुर स्थित कोविड केयर सेंटर औद्योगिक नगरी के लोगों को नसीब हो सकेगा। मेडिकल संस्थान में भी 250 बेड की आईसीयू सुविधा मौजूद है, स्थिति के अनुसार यहां के गंभीर मरीजोें को सरकारी स्तर पर इलाज दिया जाएगा। संस्थान प्रबंधन संग इससे संबंधित सभी औपचारिकताएं पूरी कर ली गई हैं। इसके अलावा बीके अस्पताल में भी कोविड मरीजों के लिए आईसीयू सुविधा फिर से शुरू कर दी गई है।
गंभीर मरीजों की संख्या चिंता का सबब
लगातार बढ़ते मामलों के साथ ही उपचाराधीनों की संख्या भी बढ़ती जा रही है। इसी कारण अस्पताल में भर्ती मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ी है। जिले में बीते दस दिनों का रिकॉर्ड देखें तो यह संख्या तेजी से बढ़ी है। 19 नवंबर से स्थिति ज्यादा चिंताजनक हुई है। इस दिन सबसे अधिक 92 गंभीर मरीज अस्पतालों में भर्ती थे। वहीं, इसके बाद से ही हर दिन औसत पांच लोगों की मौत दर्ज की जा रही है। हालांकि, मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. रणदीप पुनिया कुल मामलों की एवज में मौत की दर 0.8 बताते हैं, जोकि सामान्य दर में शामिल है।
तारीख गंभीर वेंटिलेटर पर मौत
28 नवंबर 88 16 5 (अपडेट से लें)
27 नवंबर 88 13 5
26 नवंबर 88 13 6
25 नवंबर 81 13 5
24 नवंबर 71 16 5
23 नवंबर 77 14 5
22 नवंबर 76 11 2
21 नवंबर 82 15 5
20 नवंबर 86 16 5
19 नवंबर 92 18 3
1 बेड के लिए 10 मरीज करते हैं इंतजार
ईएसआईसी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में 20 नए बेड लगाए जाएंगे। ईएसआईसी में जिले के सबसे अधिक गंभीर मरीज भर्ती हैं। अब आईसीयू में बेड़ों की संख्या मरीजों के लिए कम पड़ने लगी है। इससे अस्पताल में वेटिंग बढ़ गई है। ऐसे में एक बेड के लिए 10 मरीजों को इंतजार करना पड़ रहा है। एम्स के निदेशक डॉ. रणदीप गुलेरिया, डॉ. वीबी दास और डॉ. संजय निदिंग की तीन सदस्यीय केंद्रीय टीम ने सरकारी अस्पतालों में बेड, आईसीयू व वेंटिलेटर बेड की संख्या बढ़ाने के निर्देश दिए थे। इसके बाद इस योजना पर काम शुरू किया गया। ईएसआईसी मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ.असीम दास ने बताया कि अभी 40 बेड का आईसीयू है। अब 20 नए बेड आईसीयू में जोड़े जाएंगे। इस पर काम शुरू होे चुका है।
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अब मरीजों को नहीं होगी परेशानी
- जिले में वेंटिलेटर पर दो तरह के मरीज होते हैं। एक एनवेसिव व दूसरा नॉन इनवेसिव। इनवेसिव वेंटिलेटर वाले मरीजों की हालत चिंताजनक होती है। चिकित्सकों की दृष्टि से यही मामले गंभीर होते हैं।
- बड़ी तादाद व सैंपलिंग से मामले ज्यादा रिपोर्ट हो रहे हैं। ऐसे में होम आइसोलेशन एक मजबूत विकल्प है। गंभीर मरीजों के लिए व्यवस्था करनी जरूरी है। निजी अस्पतालों के भरोसे जिले को नहीं रखा जा सकता। इसलिए सरकारी स्तर पर जिले में ही करीब 100 बेड हाई रिस्क मरीजों के लिए हैं, निजी विकल्प अलग हैं।
- छत्रपुर स्थित सरदार वल्लभ भाई इंस्टीट्यूट कोविड केयर में मरीज आधा घंटे में रेफर हो जाएंगे। गंभीर मरीजों पर संज्ञान लेने के लिए लगातार रियल टाइम रिपोर्टिंग की जिम्मेदारियां तय की गई हैं।
- प्रोटोकॉल के अनुरूप ही मरीजों का इलाज करने के निर्देशों पर सख्ती बरती जा रही है। मरीजों को बेड न मिलने की दशा में भी निजी अस्पताल नोडल अधिकारी से संपर्क करेंगे। वह मरीज को सुुविधा युक्त अस्पताल में रेफर करेंगे। किसी भी मरीज को बेड की परेशानी नहीं आने दी जाएगी।
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गंभीर मरीजों की संख्या चिंता का सबब
लगातार बढ़ते मामलों के साथ ही उपचाराधीनों की संख्या भी बढ़ती जा रही है। इसी कारण अस्पताल में भर्ती मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ी है। जिले में बीते दस दिनों का रिकॉर्ड देखें तो यह संख्या तेजी से बढ़ी है। 19 नवंबर से स्थिति ज्यादा चिंताजनक हुई है। इस दिन सबसे अधिक 92 गंभीर मरीज अस्पतालों में भर्ती थे। वहीं, इसके बाद से ही हर दिन औसत पांच लोगों की मौत दर्ज की जा रही है। हालांकि, मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. रणदीप पुनिया कुल मामलों की एवज में मौत की दर 0.8 बताते हैं, जोकि सामान्य दर में शामिल है।
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तारीख गंभीर वेंटिलेटर पर मौत
28 नवंबर 88 16 5 (अपडेट से लें)
27 नवंबर 88 13 5
26 नवंबर 88 13 6
25 नवंबर 81 13 5
24 नवंबर 71 16 5
23 नवंबर 77 14 5
22 नवंबर 76 11 2
21 नवंबर 82 15 5
20 नवंबर 86 16 5
19 नवंबर 92 18 3
1 बेड के लिए 10 मरीज करते हैं इंतजार
ईएसआईसी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में 20 नए बेड लगाए जाएंगे। ईएसआईसी में जिले के सबसे अधिक गंभीर मरीज भर्ती हैं। अब आईसीयू में बेड़ों की संख्या मरीजों के लिए कम पड़ने लगी है। इससे अस्पताल में वेटिंग बढ़ गई है। ऐसे में एक बेड के लिए 10 मरीजों को इंतजार करना पड़ रहा है। एम्स के निदेशक डॉ. रणदीप गुलेरिया, डॉ. वीबी दास और डॉ. संजय निदिंग की तीन सदस्यीय केंद्रीय टीम ने सरकारी अस्पतालों में बेड, आईसीयू व वेंटिलेटर बेड की संख्या बढ़ाने के निर्देश दिए थे। इसके बाद इस योजना पर काम शुरू किया गया। ईएसआईसी मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ.असीम दास ने बताया कि अभी 40 बेड का आईसीयू है। अब 20 नए बेड आईसीयू में जोड़े जाएंगे। इस पर काम शुरू होे चुका है।
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अब मरीजों को नहीं होगी परेशानी
- जिले में वेंटिलेटर पर दो तरह के मरीज होते हैं। एक एनवेसिव व दूसरा नॉन इनवेसिव। इनवेसिव वेंटिलेटर वाले मरीजों की हालत चिंताजनक होती है। चिकित्सकों की दृष्टि से यही मामले गंभीर होते हैं।
- बड़ी तादाद व सैंपलिंग से मामले ज्यादा रिपोर्ट हो रहे हैं। ऐसे में होम आइसोलेशन एक मजबूत विकल्प है। गंभीर मरीजों के लिए व्यवस्था करनी जरूरी है। निजी अस्पतालों के भरोसे जिले को नहीं रखा जा सकता। इसलिए सरकारी स्तर पर जिले में ही करीब 100 बेड हाई रिस्क मरीजों के लिए हैं, निजी विकल्प अलग हैं।
- छत्रपुर स्थित सरदार वल्लभ भाई इंस्टीट्यूट कोविड केयर में मरीज आधा घंटे में रेफर हो जाएंगे। गंभीर मरीजों पर संज्ञान लेने के लिए लगातार रियल टाइम रिपोर्टिंग की जिम्मेदारियां तय की गई हैं।
- प्रोटोकॉल के अनुरूप ही मरीजों का इलाज करने के निर्देशों पर सख्ती बरती जा रही है। मरीजों को बेड न मिलने की दशा में भी निजी अस्पताल नोडल अधिकारी से संपर्क करेंगे। वह मरीज को सुुविधा युक्त अस्पताल में रेफर करेंगे। किसी भी मरीज को बेड की परेशानी नहीं आने दी जाएगी।