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Faridabad News: सूरजकुंड हादसे में गैर इरादतन हत्या की धारा हटी
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फरीदाबाद सूरजकुंड मेला में टूटे झुले की फाइल फोटो ।
लापरवाही से मौत में बदला केस, मुख्य आरोपी ने जमानत याचिका ली वापस
सचिन कुमार
फरीदाबाद। सूरजकुंड मेले में झूला गिरने से मौत के मामले में पुलिस द्वारा धाराओं में किए गए बदलाव ने केस की दिशा ही बदल दी। गैर इरादतन हत्या से जुड़ी भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 105 को हटाकर धारा 106 (लापरवाही से मृत्यु ) जोड़ दी गई, जिसके बाद पूरा मामला जमानती श्रेणी में आ गया। इस मामले में मोहम्मद शाकिर फन फेयर का संचालक था, जिसे झूलों की स्थापना और संचालन का जिम्मेदार माना गया। इसी बदलाव के चलते आरोपी मोहम्मद शाकिर ने 7 अप्रैल को अपनी जमानत याचिका वापस ले ली।
अतिरिक्त एवं सत्र न्यायाधीश सुरेंद्र कुमार की अदालत में हुई सुनवाई के दौरान आरोपी पक्ष के अधिवक्ता ने अदालत को बताया कि पुलिस की ताजा रिपोर्ट में धारा 105 हटा दी गई है और धारा 106 जोड़ दी गई है। अब एफआईआर में सभी धाराएं जमानती हो चुकी हैं, इसलिए जमानत याचिका को आगे बढ़ाने की आवश्यकता नहीं है। अदालत ने इस बयान को रिकॉर्ड पर लेते हुए याचिका को वापस मानकर खारिज कर दिया और फाइल को रिकॉर्ड रूम भेजने के आदेश दिए।
इससे पहले 19 मार्च 2026 को भी मोहम्मद शाकिर ने अपनी जमानत याचिका वापस ली थी। उस समय बचाव पक्ष ने अदालत में कहा था कि मामले की जांच अभी जारी है, इसलिए फिलहाल याचिका पर बहस नहीं की जाएगी और जांच पूरी होने के बाद नई याचिका दायर की जाएगी। अदालत ने उस समय भी याचिका को वापस लेने की अनुमति दे दी थी।
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7 फरवरी को हुआ था हादसा
मामला 7 फरवरी का है, जब सूरजकुंड क्राफ्ट मेले में हिमाचल फन फेयर के झूला ग्राउंड पर शाम करीब छह बजे बड़ा हादसा हुआ था। झूला अचानक एक तरफ से टूट गया और उसमें सवार लोग फंस गए। मौके पर मौजूद पुलिसकर्मी बचाव कार्य में जुटे, लेकिन इसी दौरान झूला दूसरी तरफ से गिर गया और इंस्पेक्टर जगदीश प्रसाद उसके नीचे आ गए। गंभीर रूप से घायल होने के बाद उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहां इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई।
जांच में सामने आया कि झूले के संचालन में आवश्यक सुरक्षा मानकों का पालन नहीं किया गया था। इसी आधार पर थाना सूरजकुंड में एफआईआर सात फरवरी को दर्ज की गई, जिसमें मोहम्मद शाकिर (प्रोप्राइटर, हिमाचल फन फेयर कंपनी) समेत अन्य को आरोपी बनाया गया। शुरुआत में मामले में बीएनएस की धारा 105 (गैर इरादतन हत्या), 289 (मशीनरी के संबंध में लापरवाही), 125(ए) व 125(b) (मानव जीवन को खतरे में डालना) और 61(2) (साझा आपराधिक जिम्मेदारी) लगाई गई थीं। धारा 105 के चलते मामला गैर-जमानती था और गंभीर श्रेणी में रखा गया था। हालांकि, पुलिस जांच के दौरान धारा 105 को हटाकर धारा 106 जोड़ दी गई, जो लापरवाही से मृत्यु का मामला बनाती है और जमानती होती है। इसी एक बदलाव ने केस का कानूनी स्वरूप बदल दिया।
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सचिन कुमार
फरीदाबाद। सूरजकुंड मेले में झूला गिरने से मौत के मामले में पुलिस द्वारा धाराओं में किए गए बदलाव ने केस की दिशा ही बदल दी। गैर इरादतन हत्या से जुड़ी भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 105 को हटाकर धारा 106 (लापरवाही से मृत्यु ) जोड़ दी गई, जिसके बाद पूरा मामला जमानती श्रेणी में आ गया। इस मामले में मोहम्मद शाकिर फन फेयर का संचालक था, जिसे झूलों की स्थापना और संचालन का जिम्मेदार माना गया। इसी बदलाव के चलते आरोपी मोहम्मद शाकिर ने 7 अप्रैल को अपनी जमानत याचिका वापस ले ली।
अतिरिक्त एवं सत्र न्यायाधीश सुरेंद्र कुमार की अदालत में हुई सुनवाई के दौरान आरोपी पक्ष के अधिवक्ता ने अदालत को बताया कि पुलिस की ताजा रिपोर्ट में धारा 105 हटा दी गई है और धारा 106 जोड़ दी गई है। अब एफआईआर में सभी धाराएं जमानती हो चुकी हैं, इसलिए जमानत याचिका को आगे बढ़ाने की आवश्यकता नहीं है। अदालत ने इस बयान को रिकॉर्ड पर लेते हुए याचिका को वापस मानकर खारिज कर दिया और फाइल को रिकॉर्ड रूम भेजने के आदेश दिए।
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इससे पहले 19 मार्च 2026 को भी मोहम्मद शाकिर ने अपनी जमानत याचिका वापस ली थी। उस समय बचाव पक्ष ने अदालत में कहा था कि मामले की जांच अभी जारी है, इसलिए फिलहाल याचिका पर बहस नहीं की जाएगी और जांच पूरी होने के बाद नई याचिका दायर की जाएगी। अदालत ने उस समय भी याचिका को वापस लेने की अनुमति दे दी थी।
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7 फरवरी को हुआ था हादसा
मामला 7 फरवरी का है, जब सूरजकुंड क्राफ्ट मेले में हिमाचल फन फेयर के झूला ग्राउंड पर शाम करीब छह बजे बड़ा हादसा हुआ था। झूला अचानक एक तरफ से टूट गया और उसमें सवार लोग फंस गए। मौके पर मौजूद पुलिसकर्मी बचाव कार्य में जुटे, लेकिन इसी दौरान झूला दूसरी तरफ से गिर गया और इंस्पेक्टर जगदीश प्रसाद उसके नीचे आ गए। गंभीर रूप से घायल होने के बाद उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहां इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई।
जांच में सामने आया कि झूले के संचालन में आवश्यक सुरक्षा मानकों का पालन नहीं किया गया था। इसी आधार पर थाना सूरजकुंड में एफआईआर सात फरवरी को दर्ज की गई, जिसमें मोहम्मद शाकिर (प्रोप्राइटर, हिमाचल फन फेयर कंपनी) समेत अन्य को आरोपी बनाया गया। शुरुआत में मामले में बीएनएस की धारा 105 (गैर इरादतन हत्या), 289 (मशीनरी के संबंध में लापरवाही), 125(ए) व 125(b) (मानव जीवन को खतरे में डालना) और 61(2) (साझा आपराधिक जिम्मेदारी) लगाई गई थीं। धारा 105 के चलते मामला गैर-जमानती था और गंभीर श्रेणी में रखा गया था। हालांकि, पुलिस जांच के दौरान धारा 105 को हटाकर धारा 106 जोड़ दी गई, जो लापरवाही से मृत्यु का मामला बनाती है और जमानती होती है। इसी एक बदलाव ने केस का कानूनी स्वरूप बदल दिया।