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Faridabad News: आरओ बन रहा मजबूरी, साफ पानी के लिए बढ़ रहा जेब पर बोझ
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फरीदाबाद के अधिकांश शहरी और ग्रामीण इलाकों में निगम के पानी को लोग पीने लायक नहीं मानते
अमर उजाला ब्यूरो
फरीदाबाद। कभी नगर निगम का नल शहरवासियों के भरोसे का प्रतीक हुआ करता था। लोग बिना किसी झिझक उसी पानी को पीते और रोजमर्रा के काम में इस्तेमाल करते थे। लेकिन आज हालात यह हैं कि फरीदाबाद के अधिकांश शहरी और ग्रामीण इलाकों में निगम के पानी को लोग पीने लायक नहीं मानते। मजबूरी में घर-घर आरओ लग रहे हैं और जो यह खर्च नहीं उठा सकते वे महंगे कैन के पानी पर निर्भर हो गए हैं।
सेक्टर-7 निवासी सुरेश कुमार बताते हैं कि कुछ साल पहले तक पूरा घर निगम के पानी से चलता था। अब हाल यह है कि पीने और खाना बनाने के लिए अलग से आरओ लगवाना पड़ा। हर छह महीने में फिल्टर बदलवाने पर एक से दो हजार रुपये खर्च हो जाते हैं।
ग्रामीण इलाकों में स्थिति और भी चिंताजनक है। गांव पलवली, नवादा और पाली जैसे क्षेत्रों में आज भी कई परिवार निगम या ट्यूबवेल के पानी पर निर्भर हैं। आरओ लगवाने की आर्थिक क्षमता हर किसी के पास नहीं है। ऐसे में लोग मजबूरी में वही पानी पीते हैं जो उपलब्ध है। स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि इसी वर्ग में पेट और त्वचा से जुड़ी बीमारियां ज्यादा देखने को मिलती हैं लेकिन उनकी शिकायतें अक्सर फाइलों में ही दबकर रह जाती हैं।
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झुग्गी बस्तियों में खराब है हालात
शहर की झुग्गी बस्तियों में हालात और खराब हैं। यहां न तो नियमित जल आपूर्ति है और न ही गुणवत्ता की कोई गारंटी। कई परिवार रोज 20 से 30 रुपये खर्च कर कैन का पानी खरीदते हैं। महीने का हिसाब लगाया जाए तो यह खर्च हजार रुपये से ऊपर पहुंच जाता है जो दिहाड़ी मजदूर परिवारों के लिए किसी अतिरिक्त टैक्स से कम नहीं है।
तेजी से फलफूल रहा आरओ व पानी सप्लाई का कारोबार
जिले में आरओ कंपनियों और वाटर सप्लायरों का कारोबार तेजी से फल-फूल रहा है। हर कॉलोनी में कैन सप्लाई करने वाले वाहन नजर आ जाते हैं। विशेषज्ञ चेतावनी देते हैं कि आरओ से निकलने वाला बेकार पानी जल संसाधनों पर अतिरिक्त दबाव डाल रहा है। वहीं स्वास्थ्य विशेषज्ञ यह भी कहते हैं कि अत्यधिक फिल्टर किया गया पानी लंबे समय में शरीर के लिए नुकसानदायक हो सकता है।
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अमर उजाला ब्यूरो
फरीदाबाद। कभी नगर निगम का नल शहरवासियों के भरोसे का प्रतीक हुआ करता था। लोग बिना किसी झिझक उसी पानी को पीते और रोजमर्रा के काम में इस्तेमाल करते थे। लेकिन आज हालात यह हैं कि फरीदाबाद के अधिकांश शहरी और ग्रामीण इलाकों में निगम के पानी को लोग पीने लायक नहीं मानते। मजबूरी में घर-घर आरओ लग रहे हैं और जो यह खर्च नहीं उठा सकते वे महंगे कैन के पानी पर निर्भर हो गए हैं।
सेक्टर-7 निवासी सुरेश कुमार बताते हैं कि कुछ साल पहले तक पूरा घर निगम के पानी से चलता था। अब हाल यह है कि पीने और खाना बनाने के लिए अलग से आरओ लगवाना पड़ा। हर छह महीने में फिल्टर बदलवाने पर एक से दो हजार रुपये खर्च हो जाते हैं।
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ग्रामीण इलाकों में स्थिति और भी चिंताजनक है। गांव पलवली, नवादा और पाली जैसे क्षेत्रों में आज भी कई परिवार निगम या ट्यूबवेल के पानी पर निर्भर हैं। आरओ लगवाने की आर्थिक क्षमता हर किसी के पास नहीं है। ऐसे में लोग मजबूरी में वही पानी पीते हैं जो उपलब्ध है। स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि इसी वर्ग में पेट और त्वचा से जुड़ी बीमारियां ज्यादा देखने को मिलती हैं लेकिन उनकी शिकायतें अक्सर फाइलों में ही दबकर रह जाती हैं।
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झुग्गी बस्तियों में खराब है हालात
शहर की झुग्गी बस्तियों में हालात और खराब हैं। यहां न तो नियमित जल आपूर्ति है और न ही गुणवत्ता की कोई गारंटी। कई परिवार रोज 20 से 30 रुपये खर्च कर कैन का पानी खरीदते हैं। महीने का हिसाब लगाया जाए तो यह खर्च हजार रुपये से ऊपर पहुंच जाता है जो दिहाड़ी मजदूर परिवारों के लिए किसी अतिरिक्त टैक्स से कम नहीं है।
तेजी से फलफूल रहा आरओ व पानी सप्लाई का कारोबार
जिले में आरओ कंपनियों और वाटर सप्लायरों का कारोबार तेजी से फल-फूल रहा है। हर कॉलोनी में कैन सप्लाई करने वाले वाहन नजर आ जाते हैं। विशेषज्ञ चेतावनी देते हैं कि आरओ से निकलने वाला बेकार पानी जल संसाधनों पर अतिरिक्त दबाव डाल रहा है। वहीं स्वास्थ्य विशेषज्ञ यह भी कहते हैं कि अत्यधिक फिल्टर किया गया पानी लंबे समय में शरीर के लिए नुकसानदायक हो सकता है।