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Faridabad News: सेवानिवृत्त प्राचार्य को 10 दिन तक डिजिटल अरेस्ट कर 2.85 लाख ठगे

Sat, 22 Feb 2025 11:02 PM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Sat, 22 Feb 2025 11:02 PM IST
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Retired principal was digitally arrested for 10 days and defrauded of Rs 2.85 lakh
मानव अंग तस्करी के नाम पर गिरफ्तारी का डर दिखाया, पुलिस ने किया केस दर्ज
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संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। सेक्टर 80 निवासी सेवानिवृत्त प्राचार्य को 10 दिन तक डिजिटल अरेस्ट कर 2 लाख 85 हजार रुपये ठग लिए। ठगों ने प्राचार्य को इतना अधिक डरा दिया कि वह रुपये ट्रांसफर करने के लिए बैंक से लोन लेने भी चले गए। लेकिन उम्र ज्यादा होने की वजह से बैंक ने लोन देने से मना कर दिया। इसके बाद ठगों ने कहा कि वह अपना मकान बेचकर रुपये ट्रांसफर कर दें। जिस पर प्राचार्य को शक हुआ और उसने भतीजे की मदद ली। जिसके बाद 10 दिन के बाद डिजिटल अरेस्ट से बाहर आए। थाना साइबर पुलिस ने केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
बीपीटीपी सेक्टर-80 निवासी अजीत ने बताया कि वह तिगांव सीनियर सेकेंडरी स्कूल से प्राचार्य के पद से सेवानिवृत्त हुए हैं। उनका बेटा अमेरिका और बेटी सेक्टर-19 में रहती है। वह अकेले रहते हैं। उनके पास 14 जनवरी को व्हाट्सएप कॉल आई। कॉल करने वाले ने उनको बताया कि वह मुंबई पुलिस का अधिकारी है। उनके नाम से एक बैंक खाता खुला हुआ है। जिसमें मानव अंगों की तस्करी का पैसा आ रहा है। जिसके चलते उनको आरोपियों ने मुंबई आने के लिए कहा। जिस पर अजीत ने बताया कि वह बुजुर्ग हैं। इसलिए वह नहीं आ सकते । फर्जी पुलिस अधिकारी ने अपने सीनियर अधिकारी से बात करा कर डराया। उसी डर के कारण उन्होंने कहा कि मामला रफा दफा करने के लिए उन्होंने साइबर ठगों के बताए हुए खातों में दो लाख 85 हजार रुपये ट्रांसफर कर दिए।
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बैंक से लोन लेने के लिए कहा
दो लाख 85 हजार रुपये ट्रांसफर करने के बाद भी आरोपी और रुपयों की मांग करने लगे। तो उन्होंने कहा कि उनके पास पैसे नहीं हैं। जिस पर ठगों ने कहा कि वह बैंक से लोन लेकर उनको रुपये ट्रांसफर करें। अगर रुपये ट्रांसफर नहीं किए तो उनको सजा हो सकती है। इस पर बुजुर्ग लोन के लिए आवेदन करने को यूनियन बैंक आफ इंडिया भी चले गए। लेकिन उम्र अधिक होने की वजह से बैंक ने लोन देने से मना कर दिया। फिर ठगों ने कहा कि मकान बेचकर उनको रुपये ट्रांसफर कर दो।
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भतीजे ने डिजिटल अरेस्ट से बाहर निकाला
मकान बेचने की बात पर बुजुर्ग को शक हुआ। उन्होंने सीबीआई में कार्यरत अपने भतीजे को फोन करके सारी बात बताई। जिस पर उनके भतीजे ने कहा कि फोन को तुरंत काट दो। जिसके बाद से अजीत सिंह डिजिटल अरेस्ट से बाहर आ सके।
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