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Faridabad News: अरावली की पहाड़ियों में मिले पाषाण काल के अवशेष
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पत्थरों पर औजारों से बनाई गईं नक्काशियां मिलीं
संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। कोट गांव के पास अरावली की पहाड़ियों में पाषाण काल के अवशेष मिले हैं। यहां के पत्थरों और मिट्टी में प्राचीन आदिमानव के उपयोग किए गए हथियारों के निशान मिले हैं। इसके अलावा यहां पर पत्थरों पर औजारों से बनाई गई नक्काशियों में छह से दस इंच के आकार के पैरों के निशान भी शामिल हैं। जो बच्चों और वयस्कों दोनों का प्रतिनिधित्व करते हैं। यह स्थान पुरातात्विक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है।
गांव कोट में रहने वाले पुरातत्व विभाग से जुड़े विशेषज्ञ तेजवीर ने बताया कि इन पहाड़ियों में कौर नामक स्थल मिले हैं। कौर वह स्थान होते हैं जहां आदिमानव ने पत्थरों से औजार बनाने का काम किया था। कौर पेलियोलिथिक की होती हैं, जो कई सौ वर्ष पुराने हैं। यहां हैंड एक्स, क्लेवस, स्क्रैपर, चॉपर, और हैमर जैसे औजार बनाए जाते थे। यह उपकरण शिकार, खनन और अन्य दैनिक गतिविधियों के लिए उपयोग किए जाते थे। उनका कहना है कि यदि पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग (एएसआई) इस क्षेत्र पर व्यवस्थित तरीके से खुदाई करे तो यहां से पाषाण काल के कई अद्भुत अवशेष प्राप्त हो सकते हैं। इनका संरक्षण और अध्ययन न केवल अतीत को समझने में मदद करेगा, बल्कि इतिहास के नए पन्नों को उजागर करेगा।
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छह से दस इंच के आकार के पैरों के निशान
तेजवीर ने बताया कि यह नक्काशी मेगालिथिक काल की है, जो प्राचीन संस्कृति की एक आकर्षक झलक प्रदान करती है। जिसके बाद पुरातत्वविद् शैलेश और दिल्ली यूनिवर्सिटी के इतिहास के प्रोफेसर डॉ. सज्जन कुमार ने साइट विजिट कर इसके महत्व की पुष्टि की। लोहे अथवा पत्थर के औजारों से बनाई गई नक्काशी में छह से दस इंच के आकार के पैरों के निशान शामिल हैं, जो बच्चों और वयस्कों दोनों के चित्रण का सुझाव देते हैं। पैरों के निशान के अंत में एक मानव आकृति को जटिल रूप से उकेरा गया है, जिसके चारों ओर चार गोलाकार गड्ढे हैं। पैरों के निशान मृत लोगों की आत्माओं के प्रतीक हैं और उन्हें सम्मान देने के लिए बनाए गए हैं। सभी पैरों के निशान पश्चिम दिशा की ओर इशारा कर रहे हैं।
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संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। कोट गांव के पास अरावली की पहाड़ियों में पाषाण काल के अवशेष मिले हैं। यहां के पत्थरों और मिट्टी में प्राचीन आदिमानव के उपयोग किए गए हथियारों के निशान मिले हैं। इसके अलावा यहां पर पत्थरों पर औजारों से बनाई गई नक्काशियों में छह से दस इंच के आकार के पैरों के निशान भी शामिल हैं। जो बच्चों और वयस्कों दोनों का प्रतिनिधित्व करते हैं। यह स्थान पुरातात्विक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है।
गांव कोट में रहने वाले पुरातत्व विभाग से जुड़े विशेषज्ञ तेजवीर ने बताया कि इन पहाड़ियों में कौर नामक स्थल मिले हैं। कौर वह स्थान होते हैं जहां आदिमानव ने पत्थरों से औजार बनाने का काम किया था। कौर पेलियोलिथिक की होती हैं, जो कई सौ वर्ष पुराने हैं। यहां हैंड एक्स, क्लेवस, स्क्रैपर, चॉपर, और हैमर जैसे औजार बनाए जाते थे। यह उपकरण शिकार, खनन और अन्य दैनिक गतिविधियों के लिए उपयोग किए जाते थे। उनका कहना है कि यदि पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग (एएसआई) इस क्षेत्र पर व्यवस्थित तरीके से खुदाई करे तो यहां से पाषाण काल के कई अद्भुत अवशेष प्राप्त हो सकते हैं। इनका संरक्षण और अध्ययन न केवल अतीत को समझने में मदद करेगा, बल्कि इतिहास के नए पन्नों को उजागर करेगा।
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छह से दस इंच के आकार के पैरों के निशान
तेजवीर ने बताया कि यह नक्काशी मेगालिथिक काल की है, जो प्राचीन संस्कृति की एक आकर्षक झलक प्रदान करती है। जिसके बाद पुरातत्वविद् शैलेश और दिल्ली यूनिवर्सिटी के इतिहास के प्रोफेसर डॉ. सज्जन कुमार ने साइट विजिट कर इसके महत्व की पुष्टि की। लोहे अथवा पत्थर के औजारों से बनाई गई नक्काशी में छह से दस इंच के आकार के पैरों के निशान शामिल हैं, जो बच्चों और वयस्कों दोनों के चित्रण का सुझाव देते हैं। पैरों के निशान के अंत में एक मानव आकृति को जटिल रूप से उकेरा गया है, जिसके चारों ओर चार गोलाकार गड्ढे हैं। पैरों के निशान मृत लोगों की आत्माओं के प्रतीक हैं और उन्हें सम्मान देने के लिए बनाए गए हैं। सभी पैरों के निशान पश्चिम दिशा की ओर इशारा कर रहे हैं।
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