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Faridabad News: लूट के मामले में आरोपी को पहचानने से किया इन्कार
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पीड़ित ने कहा- वारदात में शामिल नहीं था आरोपी, अदालत ने बरामदगी को भी माना संदिग्ध
संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। लूट के मामले में तरुण को बरी करते हुए अदालत ने बरामदगी से जुड़े साक्ष्यों पर गंभीर सवाल उठाए। अदालत में पीड़ित देवी सिंह ने तरुण को पहचानने से इन्कार करते हुए कहा कि वह उन लोगों में शामिल नहीं था, जिन्होंने उसके साथ मारपीट कर बाइक, मोबाइल और नकदी छीनी थी।
वहीं, पुलिस द्वारा आरोपी से बरामद बताई गई पिस्तौल जांच में डमी निकली, जिससे गोली नहीं चलाई जा सकती थी। बिना नंबर प्लेट बरामद बाइक को लेकर भी अदालत ने पुलिस की कार्रवाई को संदिग्ध माना है। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश सुधीर जीवन की अदालत ने तरुण को बरी किया। मामला 17 अगस्त 2022 की रात फफूंदा गांव के सूरी भट्ठा के पास का था। अभियोजन के अनुसार देवी सिंह को तीन युवकों ने घेरकर तमंचे के बट से सिर पर वार किया और उसकी बाइक, मोबाइल व 1250 रुपये छीन लिए थे। पुलिस ने 18 अगस्त 2022 को गुप्त सूचना के आधार पर तरुण को गिरफ्तार किया था। जांच के दौरान उसकी निशानदेही पर बिना नंबर प्लेट की बाइक बरामद करने का दावा किया गया। उसके बैग से एक पिस्तौल भी बरामद की गई थी। बाद में तकनीकी जांच में पिस्तौल डमी पाई गई और उससे फायरिंग संभव नहीं थी।
अदालत ने कहा कि बाइक की बरामदगी शिकायतकर्ता या किसी स्वतंत्र व्यक्ति की मौजूदगी में नहीं कराई गई। जबकि आरोपी की गिरफ्तारी पहले ही गुप्त सूचना के आधार पर हो चुकी थी, इसलिए पुलिस के पास शिकायतकर्ता या स्वतंत्र गवाह को बरामदगी के समय शामिल करने का अवसर था। सुनवाई के दौरान शिकायतकर्ता ने पुलिस के कथित बयान से भी इन्कार किया और तरुण को वारदात में शामिल नहीं बताया। अदालत ने माना कि अन्य पुलिस गवाह घटना के प्रत्यक्षदर्शी नहीं थे। ऐसे में अभियोजन युवक के खिलाफ आरोप साबित नहीं कर सका और उसे सभी आरोपों से बरी कर दिया।
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संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। लूट के मामले में तरुण को बरी करते हुए अदालत ने बरामदगी से जुड़े साक्ष्यों पर गंभीर सवाल उठाए। अदालत में पीड़ित देवी सिंह ने तरुण को पहचानने से इन्कार करते हुए कहा कि वह उन लोगों में शामिल नहीं था, जिन्होंने उसके साथ मारपीट कर बाइक, मोबाइल और नकदी छीनी थी।
वहीं, पुलिस द्वारा आरोपी से बरामद बताई गई पिस्तौल जांच में डमी निकली, जिससे गोली नहीं चलाई जा सकती थी। बिना नंबर प्लेट बरामद बाइक को लेकर भी अदालत ने पुलिस की कार्रवाई को संदिग्ध माना है। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश सुधीर जीवन की अदालत ने तरुण को बरी किया। मामला 17 अगस्त 2022 की रात फफूंदा गांव के सूरी भट्ठा के पास का था। अभियोजन के अनुसार देवी सिंह को तीन युवकों ने घेरकर तमंचे के बट से सिर पर वार किया और उसकी बाइक, मोबाइल व 1250 रुपये छीन लिए थे। पुलिस ने 18 अगस्त 2022 को गुप्त सूचना के आधार पर तरुण को गिरफ्तार किया था। जांच के दौरान उसकी निशानदेही पर बिना नंबर प्लेट की बाइक बरामद करने का दावा किया गया। उसके बैग से एक पिस्तौल भी बरामद की गई थी। बाद में तकनीकी जांच में पिस्तौल डमी पाई गई और उससे फायरिंग संभव नहीं थी।
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अदालत ने कहा कि बाइक की बरामदगी शिकायतकर्ता या किसी स्वतंत्र व्यक्ति की मौजूदगी में नहीं कराई गई। जबकि आरोपी की गिरफ्तारी पहले ही गुप्त सूचना के आधार पर हो चुकी थी, इसलिए पुलिस के पास शिकायतकर्ता या स्वतंत्र गवाह को बरामदगी के समय शामिल करने का अवसर था। सुनवाई के दौरान शिकायतकर्ता ने पुलिस के कथित बयान से भी इन्कार किया और तरुण को वारदात में शामिल नहीं बताया। अदालत ने माना कि अन्य पुलिस गवाह घटना के प्रत्यक्षदर्शी नहीं थे। ऐसे में अभियोजन युवक के खिलाफ आरोप साबित नहीं कर सका और उसे सभी आरोपों से बरी कर दिया।
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