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Faridabad News: बीके अस्पताल की आईसीयू और पीआईसीयू सेवाओं की कार्यक्षमता पर उठ रहे सवाल

Wed, 20 May 2026 12:42 AM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Wed, 20 May 2026 12:42 AM IST
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Questions are being raised about the efficiency of ICU and PICU services at BK Hospital.
बच्ची की मौत के बाद फिर गरमाया मामला, गंभीर मरीजों को कर दिया जाता है रेफर
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नीरज धर पाण्डेय

फरीदाबाद। बीके नागरिक अस्पताल की स्वास्थ्य व्यवस्थाओं पर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। समाजसेवी सतीश चोपड़ा ने आरोप लगाया है कि अस्पताल के आईसीयू और पीआईसीयू में लगे वेंटिलेटर मुख्य रूप से केवल सीपीएपी मोड पर ही सही तरीके से काम कर रहे हैं। उनका कहना है कि गंभीर मरीजों के लिए जरूरी अन्य मोड पर ऑक्सीजन का दबाव बनाए रखना संभव नहीं हो पाता, जिसके कारण गंभीर हालत वाले मरीजों को मजबूरन रेफर करना पड़ता है।


सतीश चोपड़ा ने बताया कि अस्पताल में अधिकतर वही वेंटिलेटर उपलब्ध हैं, जो सीपीएपी मोड पर संचालित हो रहे हैं। ऐसे में जिन मरीजों को एडवांस वेंटिलेटरी सपोर्ट की जरूरत होती है, उन्हें उच्च संस्थानों के लिए रेफर किया जा रहा है। इससे अस्पताल की आईसीयू और पीआईसीयू सेवाओं की कार्यक्षमता पर सवाल उठ रहे हैं।
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समाजसेवियों का कहना है कि बीके नागरिक अस्पताल अब जिला अस्पताल कम और रेफरल यूनिट ज्यादा बनता जा रहा है। थोड़े से भी गंभीर मामलों को तत्काल रेफर कर दिया जाता है। उन्होंने कहा कि करोड़ों रुपये की मशीनें होने के बावजूद मरीजों को यहां समुचित इलाज नहीं मिल पा रहा, जो बेहद चिंता का विषय है।
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प्रशिक्षित स्टाफ और विशेषज्ञों की कमी

समाजसेवी सतीश चोपड़ा ने कहा कि अस्पताल प्रबंधन की ओर से प्रशिक्षित स्टाफ की कमी का तर्क दिया जाता रहा है, जबकि जानकारी के अनुसार करीब दो साल पहले 25 नर्सिंग स्टाफ को वेंटिलेटर संचालन की ट्रेनिंग दी जा चुकी है। इसके बावजूद आईसीयू विशेषज्ञों और प्रशिक्षित डॉक्टरों की कमी बनी हुई है।


उन्होंने कहा कि करोड़ों रुपये की मशीनें होने के बावजूद मरीजों को उचित इलाज नहीं मिल पा रहा। अस्पताल में आईसीयू और पीआईसीयू जैसी सुविधाएं होने के बाद भी मरीजों को दिल्ली रेफर करना पड़ रहा है, तो यह स्वास्थ्य व्यवस्था की बड़ी विफलता है।


रेफर के बाद बच्ची की मौत के मामले के बाद गरमाया मुद्दा



गत रविवार को डबुआ एयरफोर्स रोड निवासी जितेंद्र यादव अपनी पांच माह की बेटी को पहले ईएसआईसी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल लेकर पहुंचे थे। वहां से बच्ची को रेफर कर दिया गया। इसके बाद परिजन बच्ची को बीके नागरिक अस्पताल लेकर पहुंचे, लेकिन आरोप है कि यहां भी बच्ची को भर्ती नहीं किया गया और दिल्ली रेफर कर दिया गया। परिजनों के अनुसार दूसरी एंबुलेंस से सफदरजंग अस्पताल ले जाते समय रास्ते में बच्ची की मौत हो गई।


हालांकि इस मामले में मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. जयंत आहूजा ने कहा था कि महिलाओं और बच्चों के इलाज को गंभीरता से लेने के आदेश दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि बिना किसी ठोस कारण के बच्ची को रेफर करना गंभीर मामला है और इसकी जांच करवाई जाएगी।

वेंटिलेटर व्यवस्था और रेफर के मामले में लगाए गए आरोपों को लेकर संबंधित अधिकारियों से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन इस मुद्दे पर उनका पक्ष नहीं मिल सका।




मेरे साथ जो हुआ मैं नहीं चाहता कि किसी के भी साथ ऐसा हो। हम लचर स्वास्थ्य व्यवस्थाओं के आगे खुद को लाचार महसूस करते हैं। मैं आम नागरिक हूं और मेरा अभी यही प्रश्न है कि जो उपचार दिल्ली में मिलता है वो हमारे शहर में क्यों नहीं मिल सकता।-जितेंद्र यादव, बच्ची के पिता
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