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Faridabad News: नियमित कॉलोनियों पर विकास शुल्क की तैयारी तेज
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पार्षदों ने मांगा बुनियादी सुविधाओं का हिसाब
अमर उजाला ब्यूरो
फरीदाबाद। नगर निगम द्वारा नियमित कॉलोनियों से 5 प्रतिशत विकास शुल्क वसूलने की तैयारी ने शहर की सियासत और कॉलोनियों दोनों में हलचल बढ़ा दी है। निगम प्रशासन इस प्रस्ताव को राजस्व बढ़ाने और विकास कार्यों को गति देने का जरिया बता रहा है वहीं पार्षद और स्थानीय निवासी पहले से अधूरे पड़े कामों का हवाला देकर सवाल उठा रहे हैं।
जानकारी के अनुसार शहर की 60 से अधिक नियमित कॉलोनियों में यह शुल्क लागू करने की रूपरेखा तैयार की जा रही है। निगम सूत्रों का कहना है कि हर जोन में टैक्स वसूली का लक्ष्य तय किया गया है और संबंधित अधिकारियों को क्षेत्रवार सर्वे और प्रॉपर्टी डाटा अपडेट करने के निर्देश दिए गए हैं।
हालांकि कई कॉलोनियों में सीवर ओवरफ्लो, टूटी सड़कों, स्ट्रीट लाइट और जलनिकासी जैसी समस्याएं अभी भी बनी हुई हैं। स्थानीय आरडब्ल्यूए प्रतिनिधियों का कहना है कि जब तक मूलभूत सुविधाएं पूरी तरह विकसित नहीं होतीं तब तक अतिरिक्त शुल्क लेना उचित नहीं है। कुछ पार्षद इस मुद्दे को आगामी हाउस मीटिंग में उठाने की तैयारी में हैं और ब्याज में राहत या चरणबद्ध भुगतान जैसे विकल्प सुझा रहे हैं।
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इधर जीआईएस पोर्टल पर प्रॉपर्टी सीमांकन और रिकॉर्ड अपडेट की प्रक्रिया भी चर्चा में है। कई संपत्तियों का डाटा अधूरा होने से लोगों को नोटिस को लेकर भ्रम की स्थिति बनी हुई है।
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अमर उजाला ब्यूरो
फरीदाबाद। नगर निगम द्वारा नियमित कॉलोनियों से 5 प्रतिशत विकास शुल्क वसूलने की तैयारी ने शहर की सियासत और कॉलोनियों दोनों में हलचल बढ़ा दी है। निगम प्रशासन इस प्रस्ताव को राजस्व बढ़ाने और विकास कार्यों को गति देने का जरिया बता रहा है वहीं पार्षद और स्थानीय निवासी पहले से अधूरे पड़े कामों का हवाला देकर सवाल उठा रहे हैं।
जानकारी के अनुसार शहर की 60 से अधिक नियमित कॉलोनियों में यह शुल्क लागू करने की रूपरेखा तैयार की जा रही है। निगम सूत्रों का कहना है कि हर जोन में टैक्स वसूली का लक्ष्य तय किया गया है और संबंधित अधिकारियों को क्षेत्रवार सर्वे और प्रॉपर्टी डाटा अपडेट करने के निर्देश दिए गए हैं।
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हालांकि कई कॉलोनियों में सीवर ओवरफ्लो, टूटी सड़कों, स्ट्रीट लाइट और जलनिकासी जैसी समस्याएं अभी भी बनी हुई हैं। स्थानीय आरडब्ल्यूए प्रतिनिधियों का कहना है कि जब तक मूलभूत सुविधाएं पूरी तरह विकसित नहीं होतीं तब तक अतिरिक्त शुल्क लेना उचित नहीं है। कुछ पार्षद इस मुद्दे को आगामी हाउस मीटिंग में उठाने की तैयारी में हैं और ब्याज में राहत या चरणबद्ध भुगतान जैसे विकल्प सुझा रहे हैं।
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इधर जीआईएस पोर्टल पर प्रॉपर्टी सीमांकन और रिकॉर्ड अपडेट की प्रक्रिया भी चर्चा में है। कई संपत्तियों का डाटा अधूरा होने से लोगों को नोटिस को लेकर भ्रम की स्थिति बनी हुई है।