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Faridabad News: एफआरयू में गर्भवती को अपने साथ लानी होगी कॉपी, तभी मिलेगा उपचार
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कॉपी में ओपीडी की पर्ची को लगाकर उपचार देती हैं डाॅक्टर
हेमलता रावत
फरीदाबाद। सेक्टर 3 स्थित प्रथम रेफरल यूनिट (एफआरयू) में गर्भवती महिलाएं अगर उपचार करवाने के लिए आ रही हैं तो उनको अपने साथ एक कॉपी लेकर आनी होगी। तभी उनका उपचार होगा। उस कॉपी में गर्भवती महिला की 9 महीने की पूरी जांच लिखी जाएगी। ताकि डिलीवरी के दौरान गर्भवती महिला को किसी प्रकार की कोई परेशानी का सामना न करना पड़े। यह सुविधा स्त्री रोग विशेषज्ञ की ओर से शुरू की गई है।
सेक्टर 3 स्थित एफआरयू में हर रोज करीब 100 से 150 मरीज उपचार करवाने के लिए आते हैं। जिसमें सामान्य रोग विशेषज्ञ, स्त्री रोग विशेषज्ञ, बाल रोग विशेषज्ञ और दंत रोग विशेषज्ञ के मरीज होते हैं। स्त्री रोग विशेषज्ञ के मरीजों में सबसे ज्यादा गर्भवती महिलाएं होती हैं। अस्पताल में तैनात स्त्री रोग विशेषज्ञ का कहना है कि गर्भवती महिलाओं को 9 महीने तक जांच करवाने के लिए अस्पताल में आना होता है।
इसके चलते उनको हर बार नई पर्ची बनवानी पड़ती है और इसी वजह से कई बार गर्भवती महिलाएं पुरानी पर्ची को गुम कर देती हैं। जिसके कारण डॉक्टर को पुरानी जांच व पहले लिखी हुई पुरानी दवाइयों के बारे में जानकारी नहीं मिल पाती है। इसी को ध्यान में रखते हुए डॉक्टर की ओर से इस सुविधा को शुरू किया गया है। जिसमें अस्पताल में आने वाली गर्भवती महिला का उपचार तभी किया जाएगा। जब वह अपने साथ एक कॉपी को लेकर आएंगी।
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डॉक्टर इस कॉपी में गर्भवती महिला की ओपीडी की पर्ची को लगाकर उपचार देती हैं, ताकि 9 महीने तक उस कॉपी में गर्भवती महिला की सभी प्रकार की जांच व दवा की जानकारी लिखी जा सके। ताकि भविष्य में डिलीवरी के दौरान अगर गर्भवती महिला को किसी प्रकार की कोई परेशानी का सामना करना पड़ता है, तो वह पुरानी जांच व दवाइयां को देखकर उपचार ले सकती हैं।
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हेमलता रावत
फरीदाबाद। सेक्टर 3 स्थित प्रथम रेफरल यूनिट (एफआरयू) में गर्भवती महिलाएं अगर उपचार करवाने के लिए आ रही हैं तो उनको अपने साथ एक कॉपी लेकर आनी होगी। तभी उनका उपचार होगा। उस कॉपी में गर्भवती महिला की 9 महीने की पूरी जांच लिखी जाएगी। ताकि डिलीवरी के दौरान गर्भवती महिला को किसी प्रकार की कोई परेशानी का सामना न करना पड़े। यह सुविधा स्त्री रोग विशेषज्ञ की ओर से शुरू की गई है।
सेक्टर 3 स्थित एफआरयू में हर रोज करीब 100 से 150 मरीज उपचार करवाने के लिए आते हैं। जिसमें सामान्य रोग विशेषज्ञ, स्त्री रोग विशेषज्ञ, बाल रोग विशेषज्ञ और दंत रोग विशेषज्ञ के मरीज होते हैं। स्त्री रोग विशेषज्ञ के मरीजों में सबसे ज्यादा गर्भवती महिलाएं होती हैं। अस्पताल में तैनात स्त्री रोग विशेषज्ञ का कहना है कि गर्भवती महिलाओं को 9 महीने तक जांच करवाने के लिए अस्पताल में आना होता है।
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इसके चलते उनको हर बार नई पर्ची बनवानी पड़ती है और इसी वजह से कई बार गर्भवती महिलाएं पुरानी पर्ची को गुम कर देती हैं। जिसके कारण डॉक्टर को पुरानी जांच व पहले लिखी हुई पुरानी दवाइयों के बारे में जानकारी नहीं मिल पाती है। इसी को ध्यान में रखते हुए डॉक्टर की ओर से इस सुविधा को शुरू किया गया है। जिसमें अस्पताल में आने वाली गर्भवती महिला का उपचार तभी किया जाएगा। जब वह अपने साथ एक कॉपी को लेकर आएंगी।
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डॉक्टर इस कॉपी में गर्भवती महिला की ओपीडी की पर्ची को लगाकर उपचार देती हैं, ताकि 9 महीने तक उस कॉपी में गर्भवती महिला की सभी प्रकार की जांच व दवा की जानकारी लिखी जा सके। ताकि भविष्य में डिलीवरी के दौरान अगर गर्भवती महिला को किसी प्रकार की कोई परेशानी का सामना करना पड़ता है, तो वह पुरानी जांच व दवाइयां को देखकर उपचार ले सकती हैं।