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Faridabad News: आस्था के संग प्रकृति की साधना, जल संरक्षण में आगे बढ़ती नारी शक्ति

Sun, 22 Mar 2026 12:18 AM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Sun, 22 Mar 2026 12:18 AM IST
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Practice of nature with faith, growing women's power in water conservation
नीरज धर पाण्डेय
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फरीदाबाद। नवरात्र का पावन पर्व जहां शक्ति की आराधना का प्रतीक है, वहीं यह समय आत्मशक्ति और जिम्मेदारी के जागरण का भी संदेश देता है। इसी भाव को साकार करती हुई फरीदाबाद जिले की महिलाएं अब घर-गृहस्थी की सीमाओं से निकलकर प्रकृति संरक्षण की दिशा में उल्लेखनीय योगदान दे रही हैं। जल संकट के बढ़ते खतरे के बीच ये महिलाएं न केवल जागरूकता फैला रही हैं, बल्कि अपने प्रयासों से समाज के लिए प्रेरणा बन रही हैं। जिले में गिरते भूजल स्तर ने स्थिति को गंभीर बना दिया है। ऐसे में इन महिलाओं के प्रयास उम्मीद की किरण बनकर उभर रहे हैं।


न्यूनतम जल में अधिक उत्पादन का संकल्प

एनएचपीसी चौक निवासी आकांक्षा सिंह जल संरक्षण को खेती से जोड़ते हुए एक नई दिशा दे रही हैं। अपने फार्म पर वह कम पानी में अधिक उत्पादन की तकनीकों पर शोध कर रही हैं। उनके प्रयोग न केवल किसानों के लिए उपयोगी साबित हो रहे हैं, बल्कि जल बचाने के प्रति एक व्यावहारिक समाधान भी प्रस्तुत करते हैं। इसके साथ ही वह लोगों को किचन गार्डनिंग की ट्रेनिंग देकर घर में ही हरियाली बढ़ाने, जैविक उत्पादों को बढ़ावा देने और पानी के संतुलित उपयोग का संदेश देती हैं। कृषि क्षेत्र में उन्हें कई पुरस्कार भी मिल चुके हैं, जो उनके प्रयासों की सफलता को दर्शाते हैं।
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सेवा और स्वच्छता से जागरूकता
सेक्टर-15 की ऋतु, जो चिकित्सा क्षेत्र से जुड़ी हैं, समाज सेवा को जल संरक्षण से जोड़ रही हैं। वह सप्ताह में एक दिन यमुना घाट पर सफाई अभियान चलाती हैं, जिसमें उनके मित्र और परिचित भी भाग लेते हैं। उनका कहना है नदियां सभ्यताओं की पोषक रही हैं। आज भी इंसान तमाम जरूरतों के लिए पूरी तरह से नदियों पर ही निर्भर है। वे कहती हैं कि जल चक्र का निरंतर चलते रहना पृथ्वी पर जीवन के अस्तित्व, मीठे पानी की उपलब्धता, और जलवायु के नियमन के लिए जरूरी है।
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घर-घर तक जल बचाने का संदेश
छांयसा क्षेत्र की बीना गुप्ता नियमित रूप से जागरूकता कैंप आयोजित कर लोगों को जल संरक्षण के महत्व से रूबरू कराती हैं। वह घरेलू स्तर पर पानी के सीमित उपयोग के तरीकों को सरल भाषा में समझाती हैं। उनके प्रयासों से कई परिवारों ने अपने दैनिक जीवन में पानी बचाने की आदतें अपनाई हैं। उनका कहना है कि पानी धरती पर जीवन की सबसे पहली वजह है। इसे बचाने की जिम्मेदारी हम सभी की है।


जल संरक्षण की दिशा में शोध और जागरूकता की पहल
सेक्टर-3 निवासी पूर्वी अरोरा, जो दिल्ली विश्वविद्यालय में पर्यावरण एवं पारिस्थितिकी की शोध छात्रा हैं, जल संरक्षण के वैज्ञानिक पहलुओं पर गंभीरता से कार्य कर रही हैं। वह विभिन्न शोध परियोजनाओं से जुड़कर जल संसाधनों के संरक्षण और प्रबंधन के प्रभावी उपाय तलाश रही हैं। आराधना का मानना है कि जल संकट जैसी चुनौती से निपटने के लिए केवल सरकारी प्रयास पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि समाज के हर वर्ग की भागीदारी और जागरूकता बेहद जरूरी है।
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