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Faridabad News: एनआईए अधिकारी बन व्यक्ति को डिजिटल अरेस्ट कर 48 लाख रुपये ठगे
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कॉल कर आतंकवादी गतिविधि व मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप लगाए
जांच होने तक रुपये ट्रांसफर कराए, 15 दिन बाद संपर्क ही नहीं हुआ
साइबर क्राइम थाना बल्लभगढ़ में एफआईआर दर्ज की गई
अमर उजाला ब्यूरो
फरीदाबाद। एनआईए अधिकारी बनकर एक व्यक्ति को 7 दिन तक डिजिटल अरेस्ट कर 48 लाख रुपये ठग लिए गए। आरोपियों ने जांच पूरी होने के बाद ये रुपये 15 दिन में वापस करने का झांसा दिया था। 15 दिन बाद उन नंबर पर कॉल करने का प्रयास किया तो संपर्क ही नहीं हो सका। 11 जनवरी को साइबर क्राइम पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई गई। मामले में रविवार को साइबर क्राइम थाना बल्लभगढ़ पुलिस ने एफआईआर दर्ज की है। पुलिस प्रवक्ता यशपाल सिंह ने बताया कि टीम जांच कर रही है।
ठगी को लेकर पुलिस को ये शिकायत बल्लभगढ़ सेक्टर-8 के रहने वाले व्यक्ति ने दी है। ये पहले एक निजी कंपनी में नौकरी करते थे और साल 2014 में कंपनी बंद हो गई तो घर पर ही रहने लगे। आरोप है कि 8 दिसंबर को उनके पास एक नंबर से कॉल आई। कॉल करने वाले ने खुद को हरियाणा प्रशासनिक विभाग चंडीगढ़ का अधिकारी बताकर कहा कि आपके आधार कार्ड पर एक सिम जारी हुई है। इस सिम का आतंकवादियों ने प्रयोग किया है। पकड़े गए एक आतंकवादी से पूछताछ में पता चला कि इस नंबर का प्रयोग कर 7-8 करोड़ रुपये की मनी लॉन्ड्रिंग की है और इस रकम का 10 प्रतिशत आपको कमिशन के तौर पर मिला है।
आरोपी ने एक नंबर देकर कहा कि इस पर कॉल कर बात करो, ये आपके केस के जांच अधिकारी है। शिकायतकर्ता ने उस नंबर पर कॉल की तो आरोपी ने खुद को एनआईए एटीएस का सीनियर अधिकारी बताया और बोला कि आतंकवादी गतिविधि में आपका नाम होने के चलते हमारी टीम आपको गिरफ्तार करने आ रही है। आरोपी ने शिकायतकर्ता के सारे बैंक खातों व एफडी के रुपयों की जानकारी मांगी। बाद में अपने सीनियर अधिकारी से बात कराई जो पुलिस का बड़ा अधिकारी लग रहा था। 9 दिसंबर को दो अलग-अलग नंबर से आरोपियों ने कॉल कर आरबीआई बैंक, सुप्रीम कोर्ट का पत्र, संपत्ति जब्त, गिरफ्तारी वारंट के दस्तावेज भेजे और एफडी तुड़वाकर सारे रुपये बैंक खाते में इकट्ठा करने को कहा।
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आरोपियों ने दबाव बनाया कि जांच पूरी होने तक हमारे बैंक खातों में ये रुपये ट्रांसफर करो और जांच पूरी होने के बाद 15 दिन में रुपये वापस मिलेंगे। ऐसा न करने पर तुरंत गिरफ्तारी का डर दिखाया गया और संपत्ति कुर्क करने की बात कही। शिकायतकर्ता ने 11 दिसंबर को 40 लाख और 15 दिसंबर को 8 लाख रुपये आरटीजीएस कर दिए। 15 दिन तक इंतजार करने के बाद आरोपियों से संपर्क का प्रयास किया लेकिन बात नहीं हो सकी तो ठगी का अहसास हुआ। 11 जनवरी को साइबर क्राइम पोर्टल पर शिकायत दी गई। मामले में अब साइबर क्राइम थाना बल्लभगढ़ पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की है।
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जांच होने तक रुपये ट्रांसफर कराए, 15 दिन बाद संपर्क ही नहीं हुआ
साइबर क्राइम थाना बल्लभगढ़ में एफआईआर दर्ज की गई
अमर उजाला ब्यूरो
फरीदाबाद। एनआईए अधिकारी बनकर एक व्यक्ति को 7 दिन तक डिजिटल अरेस्ट कर 48 लाख रुपये ठग लिए गए। आरोपियों ने जांच पूरी होने के बाद ये रुपये 15 दिन में वापस करने का झांसा दिया था। 15 दिन बाद उन नंबर पर कॉल करने का प्रयास किया तो संपर्क ही नहीं हो सका। 11 जनवरी को साइबर क्राइम पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई गई। मामले में रविवार को साइबर क्राइम थाना बल्लभगढ़ पुलिस ने एफआईआर दर्ज की है। पुलिस प्रवक्ता यशपाल सिंह ने बताया कि टीम जांच कर रही है।
ठगी को लेकर पुलिस को ये शिकायत बल्लभगढ़ सेक्टर-8 के रहने वाले व्यक्ति ने दी है। ये पहले एक निजी कंपनी में नौकरी करते थे और साल 2014 में कंपनी बंद हो गई तो घर पर ही रहने लगे। आरोप है कि 8 दिसंबर को उनके पास एक नंबर से कॉल आई। कॉल करने वाले ने खुद को हरियाणा प्रशासनिक विभाग चंडीगढ़ का अधिकारी बताकर कहा कि आपके आधार कार्ड पर एक सिम जारी हुई है। इस सिम का आतंकवादियों ने प्रयोग किया है। पकड़े गए एक आतंकवादी से पूछताछ में पता चला कि इस नंबर का प्रयोग कर 7-8 करोड़ रुपये की मनी लॉन्ड्रिंग की है और इस रकम का 10 प्रतिशत आपको कमिशन के तौर पर मिला है।
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आरोपी ने एक नंबर देकर कहा कि इस पर कॉल कर बात करो, ये आपके केस के जांच अधिकारी है। शिकायतकर्ता ने उस नंबर पर कॉल की तो आरोपी ने खुद को एनआईए एटीएस का सीनियर अधिकारी बताया और बोला कि आतंकवादी गतिविधि में आपका नाम होने के चलते हमारी टीम आपको गिरफ्तार करने आ रही है। आरोपी ने शिकायतकर्ता के सारे बैंक खातों व एफडी के रुपयों की जानकारी मांगी। बाद में अपने सीनियर अधिकारी से बात कराई जो पुलिस का बड़ा अधिकारी लग रहा था। 9 दिसंबर को दो अलग-अलग नंबर से आरोपियों ने कॉल कर आरबीआई बैंक, सुप्रीम कोर्ट का पत्र, संपत्ति जब्त, गिरफ्तारी वारंट के दस्तावेज भेजे और एफडी तुड़वाकर सारे रुपये बैंक खाते में इकट्ठा करने को कहा।
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आरोपियों ने दबाव बनाया कि जांच पूरी होने तक हमारे बैंक खातों में ये रुपये ट्रांसफर करो और जांच पूरी होने के बाद 15 दिन में रुपये वापस मिलेंगे। ऐसा न करने पर तुरंत गिरफ्तारी का डर दिखाया गया और संपत्ति कुर्क करने की बात कही। शिकायतकर्ता ने 11 दिसंबर को 40 लाख और 15 दिसंबर को 8 लाख रुपये आरटीजीएस कर दिए। 15 दिन तक इंतजार करने के बाद आरोपियों से संपर्क का प्रयास किया लेकिन बात नहीं हो सकी तो ठगी का अहसास हुआ। 11 जनवरी को साइबर क्राइम पोर्टल पर शिकायत दी गई। मामले में अब साइबर क्राइम थाना बल्लभगढ़ पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की है।