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Faridabad News: तावड़ू रैली में कुर्सी विवाद पर गरमाई सियासत

Mon, 16 Feb 2026 12:36 AM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Mon, 16 Feb 2026 12:36 AM IST
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Politics heats up over chair dispute at Taavadu rally
-एमथ्री फाउंडेशन की पायल कनोडिया की मंच पर बैठने की व्यवस्था पर उठे सवाल
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मोहम्मद शाहिद मेवाती

तावड़ू में आयोजित मुख्यमंत्री की सोहना-तावड़ू विकसित रैली अब राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बन गई है। रैली से पहले और बाद की घटनाओं ने पूरे शहर में सियासी हलचल पैदा कर दी। खासतौर पर एमथ्रीएम फाउंडेशन की ट्रस्टी पायल कनोडिया की मंच पर बैठने की व्यवस्था को लेकर हुए विवाद ने मामले को और भी तूल दे दिया।

रैली से पहले मंच पर पायल कनोडिया की कुर्सी पहली पंक्ति से हटाकर दूसरी पंक्ति में कर दी गई थी। जैसे ही यह सूचना एमथ्रीएम टीम तक पहुंची तो इसे लेकर नाराज़गी जताई गई और इसे स्थानीय स्तर पर लापरवाही या राजनीतिक चाल के रूप में देखा गया। फाउंडेशन के सक्रिय कार्यकर्ताओं ने तुरंत भाजपा संगठन से जुड़े पदाधिकारियों को अवगत कराया, जिसके बाद जिला प्रशासन हरकत में आया। रातभर चले इस हाई वोल्टेज ड्रामे के बाद सुबह स्थिति में बदलाव आया। बताया जा रहा है कि प्रशासनिक अधिकारी पहले एम3एम मालिकों के निवास पर पहुंचे और बाद में मंच पर पायल कनोडिया की कुर्सी पुनः पहली पंक्ति में लगाई गई। मुख्यमंत्री नायब सैनी भी रैली से पूर्व एम3एम परिवार के निवास पर पहुँचे और वहीं नाश्ता किया।
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इस घटनाक्रम को लेकर शहर में तरह-तरह की चर्चाएं हो रही हैं और इसे स्थानीय नेताओं के लिए एक संदेश के रूप में देखा जा रहा है। रैली के दौरान मुख्यमंत्री ने जिन तीन परियोजनाओं का उद्घाटन किया, उनमें एम3एम फाउंडेशन का महत्वपूर्ण सहयोग बताया जा रहा है। इन परियोजनाओं में स्कूल भवन, मॉडर्न पार्क, पुराने मकबरे का करोड़ों रुपये की लागत से जीर्णोद्धार और झामुवास स्टेडियम शामिल हैं। हालांकि, स्थानीय लोगों की अपेक्षा थी कि तावड़ू के लिए बड़ी घोषणाएं की जाएंगी, लेकिन कार्यक्रम मुख्य रूप से पहले से तय परियोजनाओं के लोकार्पण तक सीमित रहा। इससे कुछ लोगों में निराशा भी देखी गई।
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रैली के दौरान कैबिनेट मंत्री राव नरबीर सिंह ने तावड़ू को गुरुग्राम में शामिल करने की मांग मुख्यमंत्री के समक्ष रखी, लेकिन इस विषय पर कोई स्पष्ट घोषणा नहीं की गई। तावड़ू बाइपास के संबंध में भी केवल सर्वे कराने का आश्वासन दिया गया। पूरे घटनाक्रम ने यह संकेत दिया कि तावड़ू की राजनीति में सामाजिक और औद्योगिक संस्थाओं की भूमिका लगातार बढ़ रही है। मंच पर कुर्सी की अदला-बदली से शुरू हुआ विवाद प्रशासनिक सक्रियता और राजनीतिक संदेश के साथ समाप्त हुआ।
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