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प्लाज्मा डोनेट कर बचा रहे कोरोना संक्रमितों की जान
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फरीदाबाद। तेजी से बढ़ रहे कोरोना संक्रमितों को ठीक करने के लिए डॉक्टर इलाज के साथ-साथ अपना प्लाज्मा डोनेट कर रहे हैं। प्लाज्मा थेरपी से संक्रमितों का इलाज करने के लिए प्लाज्मा डोनर न मिलने के कारण ईएसआईसी मेडिकल कॉलेज व अस्पताल के डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों ने यह निर्णय लिया है। पिछले 10 दिनों में 15 से ज्यादा डॉक्टर व स्वास्थ्यकर्मी प्लाज्मा डोनेट कर चुके हैं।
कोरोना संक्रमितों के इलाज के लिए जिले में पिछले साल जुलाई में प्लाज्मा थेरेपी की सुविधा शुरू की गई थी। इनमें संक्रमित होकर ठीक हो चुके लोगों से प्लाज्मा डोनेशन की अपील की गई थी। शुरुआत में लोगों ने प्लाज्मा किया, लेकिन जैसे-जैसे कोरोना का प्रभाव कम होता गया। लोगों ने प्लाज्मा डोनेट करना कम कर दिया। जिले में तीन प्लाज्मा बैंक ईएसआईसी मेडिकल कॉलेज, रेडक्रॉस सोसाइटी और एक निजी ब्लड बैंक हैं। शुरुआत में ईएसआईसी मेडिकल कॉलेज की ब्लड बैंक में करीब 50 यूनिट प्लाज्मा का स्टॉक था, लेकिन बीमारी बढ़ने के साथ प्लाज्मा डोनेट करने वालों की संख्या कम हो गई और मांग काफी बढ़ गई। अब स्थिति यह हो गई है कि सभी प्लाज्मा बैंकों में 10 से 12 यूनिट प्लाज्मा रह गया है। ईएसआईसी की ब्लड बैंक प्रमुख डॉ. निमिशा ने बताया कि लोगों में जागरूकता लाने और मरीजों की जान बचाने के लिए अतिरिक्त निदेशक दिनेश निर्वाण ने स्वयं प्लाज्मा डोनेट किया। वहीं उप निदेशक अनिल रंगा ने आईसीयू में भर्ती एक मरीज की जान बचाने के लिए प्लाज्मा डोनेट किया। ऐसे अनेक डॉक्टर व स्वास्थ्यकर्मी हैं, जो 10 से 15 बार प्लाज्मा में डोनेट कर चुके है। स्वास्थ्यकर्मी सुनील मस्ता ने 14वीं बार प्लाज्मा डोनेशन किया। पवन मावई ने तीन बार प्लाज्मा डोनेशन किया।
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कोरोना संक्रमितों के इलाज के लिए जिले में पिछले साल जुलाई में प्लाज्मा थेरेपी की सुविधा शुरू की गई थी। इनमें संक्रमित होकर ठीक हो चुके लोगों से प्लाज्मा डोनेशन की अपील की गई थी। शुरुआत में लोगों ने प्लाज्मा किया, लेकिन जैसे-जैसे कोरोना का प्रभाव कम होता गया। लोगों ने प्लाज्मा डोनेट करना कम कर दिया। जिले में तीन प्लाज्मा बैंक ईएसआईसी मेडिकल कॉलेज, रेडक्रॉस सोसाइटी और एक निजी ब्लड बैंक हैं। शुरुआत में ईएसआईसी मेडिकल कॉलेज की ब्लड बैंक में करीब 50 यूनिट प्लाज्मा का स्टॉक था, लेकिन बीमारी बढ़ने के साथ प्लाज्मा डोनेट करने वालों की संख्या कम हो गई और मांग काफी बढ़ गई। अब स्थिति यह हो गई है कि सभी प्लाज्मा बैंकों में 10 से 12 यूनिट प्लाज्मा रह गया है। ईएसआईसी की ब्लड बैंक प्रमुख डॉ. निमिशा ने बताया कि लोगों में जागरूकता लाने और मरीजों की जान बचाने के लिए अतिरिक्त निदेशक दिनेश निर्वाण ने स्वयं प्लाज्मा डोनेट किया। वहीं उप निदेशक अनिल रंगा ने आईसीयू में भर्ती एक मरीज की जान बचाने के लिए प्लाज्मा डोनेट किया। ऐसे अनेक डॉक्टर व स्वास्थ्यकर्मी हैं, जो 10 से 15 बार प्लाज्मा में डोनेट कर चुके है। स्वास्थ्यकर्मी सुनील मस्ता ने 14वीं बार प्लाज्मा डोनेशन किया। पवन मावई ने तीन बार प्लाज्मा डोनेशन किया।
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