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फरीदाबाद : अरावली को हराभरा बनाने को ड्रोन की मदद से की जाएगी एरियल सीडिंग

Tue, 28 Jul 2020 10:36 PM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Tue, 28 Jul 2020 10:36 PM IST
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plantation in aarawali hills through ariel seeding with the help of drone
फरीदाबाद। मानसून के मौसम में अरावली वन क्षेत्र को हराभरा बनाने के लिए विभाग ड्रोन से एरियल सीडिंग का प्रयोग करेगा। वन विभाग पांच हेक्टेयर क्षेत्र में ड्रोन के माध्यम से सीड बॉल्स का छिड़काव करेगा। अरावली में कई ऐसे क्षेत्र हैं , जहां आसानी से पहुंच पाना संभव नहीं है। उन क्षेत्रों तक पहुंचने के लिए ड्रोन का प्रयोग करते हुए अरावली की पहाड़ियों के अनुकूल स्थानीय प्रजातियों के पौधों के बीज डाले जाएंगे। पिछले वर्ष तत्कालीन पर्यावरण मंत्री विपुल गोयल ने भी ड्रोन के माध्यम से अरावली में बीज डाले थे।
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वन अधिकारी राजकुमार ने बताया कि एरियल सीडिंग के माध्यम से बीजरोपण के लिए स्थानीय प्रजातियों जैसे खैरी, रोज, बेरी, जंगल जलेबी, इंद्र जौ आदि प्रजातियों के बीजों को मिट्टी, खाद, राख आदि के मिश्रण से सीड बॉल्स तैयार की गई हैं। ड्रोन तकनीक का प्रयोग करके इन सीड बॉल्स को अरावली की पहाड़ियों में डाला जाएगा। इनकी खासियत है कि एक बार डालने के बाद किसी प्रकार की देखभाल की जरूरत नहीं है। इनमें पर्याप्त मात्रा में पोषक तत्व मिलाए गए हैं। इस कारण बॉल्स के दीमक, चूहों आदि द्वारा नष्ट किए जाने की संभावना नहीं है। बरसात आने पर इन सीड बॉल्स में फुटाव आएगा और उसमें मौजूद पोषक तत्व इन पौधों की वृद्धि में मदद करेंगे।
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वन विभाग ने इस प्रयोग के लिए पहले चरण में अरावली में बड़खल क्षेत्र का चयन किया है, जिसमें 5 हेक्टेयर क्षेत्र में ड्रोन के माध्यम से सीड बॉल्स का छिड़काव किया जाएगा। इसके अलावा मैनुअल डिबलिंग के माध्यम से भी इन सीड बॉल्स का रोपण किया जाएगा।
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अरावली में एरियल सीडिंग के दौरान पानी की कमी वाले क्षेत्रों में पौधों को बचाने के लिए हाइड्रोजेल तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा। हाइड्रोजेल एक प्राकृतिक तत्व है, जो अपने भार से लगभग 400 गुना तक पानी सोख लेता है। पौधा पानी की कमी को एक लंबे समय तक सहन कर सकता है, जिसके कारण पौधे में बार-बार पानी डालने की जरूरत नहीं पड़ती है। इस प्रयोग के अंतर्गत 540 पौधे लगाए जाएंगे। इसके तहत एक प्लॉट में 270 गड्ढों में रोज स्पीशरज के पौधे लगाए जाएंगे और दूसरे प्लॉट कचनार स्पीशीज के पौधे लगाए जाएंगे। हर 15 दिन में उनके सर्वाइवल और ग्रोथ का डाटा लिया जाएगा।
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