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बसों की छत पर बैठकर लोगों ने की यात्रा

Sun, 22 Aug 2021 10:36 PM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Sun, 22 Aug 2021 10:36 PM IST
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People traveled by sitting on the roof of buses
बल्लभगढ़। रक्षाबंधन पर्व पर लोगों को कोरोना नियमों को ध्यान में रखकर यातायात सुविधा मुहैया कराने के रोडवेज के दावे पूरी तरह से फेल साबित हुए। रविवार सुबह से बहनें अपने भाईयों को राखी बांधने के लिए रोडवेज बसों के इंतजार में खड़ी रही। घंटों इंतजार के बाद भी बस के लिए मारामारी रही। बस मिलने पर सीट के लिए भारी मशक्तत और धक्का-मुक्की रही।
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त्योहार पर भीड़ को नियंत्रण में रखने के लिए प्रत्येक बस में 50 फीसदी सवारी ही ले जाने की इजाजत थी, जबकि नजारा इससे बिल्कुल उलट था। सवारियां बगैर मास्क के बैठी हुई नजर आई। अपना सफर पूरा करने की जुगत में लोग बसों के दरवाजे पर लटक कर और बसों की छतों पर बैठकर यात्रा करने को मजबूर हुए।
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रविवार को रक्षाबंधन के मौके पर महिलाओं और बच्चों के लिए सरकार ने निशुल्क यात्रा की सुविधा दी थी। इसके लिए कोरोना वैक्सीन का टीकाकरण का प्रमाण अनिवार्य किया गया। हालांकि बसों के लिए मारामारी के कारण लोगों को बस की सुविधा तक के लिए मोहताज होना पड़ा। शहर के नाहर सिंह बस अड्डे पर रविवार सुबह यात्रियों की भारी-भीड़ जुटी हुई थी। इस बीच रोडवेज बसें खचाखच भरकर चली।
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परिचालक यात्रियों से टीकाकरण प्रमाण की बात तो दूर मास्क लगाने के लिए भी टोकने से परहेज करते नजर आए।
रोडवेज में सफर करने वाले यात्रियों का आरोप था कि सफर के लिए बस नहीं मिली। प्राइवेट बसेें भी भरकर चली। ऐसे में जेब से अच्छी खासा किराया चुकाने के बाद भी बसों के दरवाजों पर लटकर लोग यात्रा करने को मजबूर हुए। उधर रोडवेज की ओर से 55 रूटों पर बस संचालन का दावा किया गया। रोडवेज के महाप्रबंधक राजीव नागपाल ने बताया कि अपने गंतव्य पर यात्री को छोड़कर बसें दोबारा यात्रियों को बैठा रही हैं। इसके साथ ही त्योहार को देखते हुए रोडवेज की ओर से अतिरिक्त बसें चलाई गई।

नहीं ले रहे जानलेवा दूसरी लहर से सबक
कोरोना की अब तक दो लहर आ चुकी हैं। दूसरी लहर बेहद जानलेवा साबित हुई। विशेषज्ञ मानते हैं कि संक्रमण के जानलेवा स्तर तक मामले बढ़ने का कारण त्योहार और अनियंत्रित भीड़ रही। वहीं, ऐसा ही नजारा एक बार फिर रविवार को रक्षा बंधन के मौके पर दिखा। जहां लोग कोरोना की बुरी यादों को भूलते नजर आए। सबके के नाम पर लोगों के हाथ खाली ही रहे। सामाजिक दूरी और मास्क जैसे कोरोना बचाव के अनिवार्य नियमों की धज्जियां उड़ती नजर आई। बाजारों में खरीदारी का जुनून इतना थी कि भीड़ बेकाबू नजर आई। सार्वजनिक वाहनों में लोग लदे रहे। ऑटो बस यात्रियों से भरे रहे। ऐसे में एक बार त्योहार के मौके पर कोरोना के सारे नियम बेकार नजर आए।
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