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Faridabad News: आधार कार्ड न होने पर मरीज को इलाज से किया वंचित
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संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। आधार कार्ड न होने के कारण एक मरीज को बीके नागरिक अस्पताल में इलाज नहीं मिलने का मामला सामने आया है। मरीज को लेकर पहुंचे एक दिव्यांग व्यक्ति ने आरोप लगाया कि आपातकालीन विभाग के पंजीकरण काउंटर पर कर्मचारियों ने पर्चा बनाने से इनकार कर दिया और मरीज का आपातकालीन कक्ष में उपचार नहीं किया गया। घटना को लेकर अस्पताल की व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
जानकारी के अनुसार कमल भड़ाना चौक क्षेत्र के रहने वाले हैं और स्वयं दिव्यांग हैं। उन्होंने बताया कि वह अपने वाहन पर एक मरीज को बैठाकर अस्पताल पहुंचे थे। मरीज गुरुद्वारे के सामने भीख मांगता है और उसकी तबीयत खराब होने पर कमल उसे इलाज के लिए अस्पताल लेकर आए।
कमल का आरोप है कि आपातकालीन विभाग के पंजीकरण काउंटर पर कर्मचारियों ने मरीज का आधार कार्ड मांगा और उसके पास पहचान पत्र न होने के कारण पर्चा बनाने से मना कर दिया। उन्होंने कई बार आग्रह करते हुए अपने आधार कार्ड के आधार पर उपचार कराने की बात भी कही, लेकिन उनकी बात नहीं सुनी गई।
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दिव्यांग ने यह भी आरोप लगाया कि इस दौरान काउंटर पर मौजूद कर्मचारी ने उनके साथ बदतमीजी की और मरीज को आपातकालीन कक्ष में इलाज नहीं मिला। बाद में उन्हें बिना उपचार कराए लौटना पड़ा।
जानकारों का कहना है कि प्राथमिक उपचार देश के प्रत्येक नागरिक का मौलिक अधिकार है। इसलिए अस्पताल पहुंचे मरीज को प्राथमिक उपचार उपलब्ध कराना अस्पताल की जिम्मेदारी होती है और पहचान पत्र की बाध्यता को लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देश हैं।
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फरीदाबाद। आधार कार्ड न होने के कारण एक मरीज को बीके नागरिक अस्पताल में इलाज नहीं मिलने का मामला सामने आया है। मरीज को लेकर पहुंचे एक दिव्यांग व्यक्ति ने आरोप लगाया कि आपातकालीन विभाग के पंजीकरण काउंटर पर कर्मचारियों ने पर्चा बनाने से इनकार कर दिया और मरीज का आपातकालीन कक्ष में उपचार नहीं किया गया। घटना को लेकर अस्पताल की व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
जानकारी के अनुसार कमल भड़ाना चौक क्षेत्र के रहने वाले हैं और स्वयं दिव्यांग हैं। उन्होंने बताया कि वह अपने वाहन पर एक मरीज को बैठाकर अस्पताल पहुंचे थे। मरीज गुरुद्वारे के सामने भीख मांगता है और उसकी तबीयत खराब होने पर कमल उसे इलाज के लिए अस्पताल लेकर आए।
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कमल का आरोप है कि आपातकालीन विभाग के पंजीकरण काउंटर पर कर्मचारियों ने मरीज का आधार कार्ड मांगा और उसके पास पहचान पत्र न होने के कारण पर्चा बनाने से मना कर दिया। उन्होंने कई बार आग्रह करते हुए अपने आधार कार्ड के आधार पर उपचार कराने की बात भी कही, लेकिन उनकी बात नहीं सुनी गई।
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दिव्यांग ने यह भी आरोप लगाया कि इस दौरान काउंटर पर मौजूद कर्मचारी ने उनके साथ बदतमीजी की और मरीज को आपातकालीन कक्ष में इलाज नहीं मिला। बाद में उन्हें बिना उपचार कराए लौटना पड़ा।
जानकारों का कहना है कि प्राथमिक उपचार देश के प्रत्येक नागरिक का मौलिक अधिकार है। इसलिए अस्पताल पहुंचे मरीज को प्राथमिक उपचार उपलब्ध कराना अस्पताल की जिम्मेदारी होती है और पहचान पत्र की बाध्यता को लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देश हैं।