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Faridabad News: पेपर बेस नैनो सेंसर जांचेगा मिट्टी की आर्द्रता
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फरीदाबाद। जमीन को उपजाऊ बनाने के लिए मिट्टी में कितनी आर्द्रता की जरूरत होती है, ताकि फसल को बेहतर हो सके। मिट्टी की आर्द्रता के कारण फसल को नुकसान से बचाया जा सकता है। आर्द्रता जांच कागज के एक टुकड़े (पेपर बेस नैनो सेंसर) के माध्यम से करने के लिए जेसी बोस विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय की प्रोफेसर डॉ. सोनिया बंसल ने अपनी टीम के साथ शोध करने में जुटी हैं। उनका दावा है कि शोध को एक वर्ष में पूरा कर लिया जाएगा। वहीं, वायुमंडल में आर्द्रता की जांच का शोध पूरा कर लिया गया है।
पेपर बेस नैनो सेंसर तैयार किया जा रहा है। पेपर के ऊपर एक विशेष प्रकार का खाका तैयार किया जा रहा है। इस पर इलेक्ट्रोड, जिंक, सिल्वर सहित कई अन्य रासायनिक पदार्थ का प्रयोग किया जा रहा है। उसे सॉफ्टवेयर के माध्यम से कंप्यूटर में अपलोड कर दिया जाता है। उसे कंप्यूटर प्रिंटर के माध्यम से प्रिंट लेकर आर्द्रता की जांच की जा सकती है। एक विशेष प्रकार का पेपर का प्रयोग किया जा रहा है, जिसकी लागत 50 पैसे से भी कम आती है। मिट्टी में रखने के बाद जल्दी गलता नहीं है। डॉ सोनिया का कहना है कि जांच के दौरान कई चीजों को ध्यान में रखने की जरूरत होती है। मिट्टी की गुणवत्ता को तय समय में मापा जा सकता है। इसके माध्यम से मिट्टी की आर्द्रता जांच कर यह बताया जा सकता है कि किसी भी जमीन को उपजाऊ बनाने के लिए कितनी पानी की जरूरत है। आर्द्रता के कारण अक्सर फसल खराब हो जाती है, इसे तैयार हाेने के बाद फसल को खराब होने से बचाया जा सकता है। हरियाणा राज्य विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद की ओर से शोध की स्वीकृति दी गई है। हवा, पानी और मिट्टी की आर्द्रता को चार वर्ष में शोध कर रिपोर्ट तैयार करना है। डॉ. सोनिया ने बताया कि हवा व पानी की आर्द्रता की जांच पूरी हो चुकी है। मिट्टी की आर्द्रता को जांच करने के लिए शोध जारी है। उसे एक वर्ष में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
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पेपर बेस नैनो सेंसर तैयार किया जा रहा है। पेपर के ऊपर एक विशेष प्रकार का खाका तैयार किया जा रहा है। इस पर इलेक्ट्रोड, जिंक, सिल्वर सहित कई अन्य रासायनिक पदार्थ का प्रयोग किया जा रहा है। उसे सॉफ्टवेयर के माध्यम से कंप्यूटर में अपलोड कर दिया जाता है। उसे कंप्यूटर प्रिंटर के माध्यम से प्रिंट लेकर आर्द्रता की जांच की जा सकती है। एक विशेष प्रकार का पेपर का प्रयोग किया जा रहा है, जिसकी लागत 50 पैसे से भी कम आती है। मिट्टी में रखने के बाद जल्दी गलता नहीं है। डॉ सोनिया का कहना है कि जांच के दौरान कई चीजों को ध्यान में रखने की जरूरत होती है। मिट्टी की गुणवत्ता को तय समय में मापा जा सकता है। इसके माध्यम से मिट्टी की आर्द्रता जांच कर यह बताया जा सकता है कि किसी भी जमीन को उपजाऊ बनाने के लिए कितनी पानी की जरूरत है। आर्द्रता के कारण अक्सर फसल खराब हो जाती है, इसे तैयार हाेने के बाद फसल को खराब होने से बचाया जा सकता है। हरियाणा राज्य विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद की ओर से शोध की स्वीकृति दी गई है। हवा, पानी और मिट्टी की आर्द्रता को चार वर्ष में शोध कर रिपोर्ट तैयार करना है। डॉ. सोनिया ने बताया कि हवा व पानी की आर्द्रता की जांच पूरी हो चुकी है। मिट्टी की आर्द्रता को जांच करने के लिए शोध जारी है। उसे एक वर्ष में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
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