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Faridabad News: रजिस्ट्री के साथ ही बदलेगा मालिक का नाम, ऑटो-म्यूटेशन से नहीं लगाने होंगे तहसील के चक्कर
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मंत्री के निर्देश पर छह महीने में 90 प्रतिशत लंबित मामलों का निपटान, अब सिर्फ 2500 केस बाकी
डिजिटल व्यवस्था से दाखिल-खारिज प्रक्रिया होगी पारदर्शी, बिचौलियों की भूमिका पर लगेगी रोक
मोहित शुक्ला
फरीदाबाद। जमीन या मकान की रजिस्ट्री के बाद दाखिल-खारिज (म्यूटेशन) के लिए महीनों तक तहसीलों के चक्कर लगाने वाले लोगों को अब बड़ी राहत मिलने जा रही है। फरीदाबाद में ऑटो-म्यूटेशन व्यवस्था लागू होने के बाद रजिस्ट्री होते ही सरकारी राजस्व रिकॉर्ड में नए मालिक का नाम स्वतः दर्ज होने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। इससे समय की बचत होने के साथ भ्रष्टाचार और अनावश्यक देरी पर भी रोक लग गई है।
राजस्व एवं आपदा प्रबंधन मंत्री विपुल गोयल के निर्देशों के बाद जिले में लंबित म्यूटेशन मामलों के निस्तारण पर विशेष अभियान चलाया गया है। इसका असर यह रहा कि पिछले छह महीनों में करीब 90 प्रतिशत लंबित मामलों का समाधान कर दिया गया है। जहां पहले हजारों फाइलें लंबित थीं वहीं अब जिले में केवल करीब 2500 मामले ही शेष रह गए हैं जिन्हें प्राथमिकता के आधार पर निपटाया जा रहा है।
रजिस्ट्री के बाद अलग आवेदन की जरूरत नहीं
अब तक संपत्ति खरीदने के बाद खरीदार को दाखिल-खारिज के लिए अलग से आवेदन करना पड़ता था। इस प्रक्रिया में पटवारी, कानूनगो और तहसील कार्यालय के कई स्तरों से फाइल गुजरती थी जिससे देरी और विवाद की स्थिति बनती थी। नई ऑटो-म्यूटेशन प्रणाली में रजिस्ट्री का डाटा सीधे राजस्व रिकॉर्ड से जुड़ जाएगा और निर्धारित प्रक्रिया पूरी होते ही नामांतरण स्वतः हो जाएगा।
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10 दिन के विशेष अभियान से पुराने मामलों का होगा निस्तारण
प्रशासन ने शेष लंबित मामलों के समाधान के लिए 10 दिन का विशेष अभियान शुरू किया है। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि पुराने म्यूटेशन मामलों को प्राथमिकता से निपटाया जाए ताकि जिले में लंबित फाइलों का बोझ पूरी तरह समाप्त हो सके।
डिजिटल निगरानी में रहेगी पूरी प्रक्रिया
नई व्यवस्था के तहत म्यूटेशन प्रक्रिया की ऑनलाइन मॉनिटरिंग की जाएगी। वरिष्ठ अधिकारी यह देख सकेंगे कि किस स्तर पर कोई मामला लंबित है और कितने समय से रुका हुआ है। तय समय सीमा से अधिक देरी होने पर संबंधित अधिकारी की जवाबदेही तय की जाएगी, जिससे प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही दोनों बढ़ेंगी।
आम लोगों को क्या मिलेगा फायदा
लोगों को रजिस्ट्री के बाद स्वत: नामांतरण होगा अलग से आवेदन की आवश्यकता नहीं पड़ेगी वहीं लोगों को तहसील और पटवारी कार्यालयों के चक्कर कम होंगे। इसके साथ बिचौलियों और अनावश्यक खर्च पर रोक लगेगी। ऑनलाइन रिकॉर्ड अपडेट होने से संपत्ति संबंधी विवादों पर भी रोक लगेगी।
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डिजिटल व्यवस्था से दाखिल-खारिज प्रक्रिया होगी पारदर्शी, बिचौलियों की भूमिका पर लगेगी रोक
मोहित शुक्ला
फरीदाबाद। जमीन या मकान की रजिस्ट्री के बाद दाखिल-खारिज (म्यूटेशन) के लिए महीनों तक तहसीलों के चक्कर लगाने वाले लोगों को अब बड़ी राहत मिलने जा रही है। फरीदाबाद में ऑटो-म्यूटेशन व्यवस्था लागू होने के बाद रजिस्ट्री होते ही सरकारी राजस्व रिकॉर्ड में नए मालिक का नाम स्वतः दर्ज होने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। इससे समय की बचत होने के साथ भ्रष्टाचार और अनावश्यक देरी पर भी रोक लग गई है।
राजस्व एवं आपदा प्रबंधन मंत्री विपुल गोयल के निर्देशों के बाद जिले में लंबित म्यूटेशन मामलों के निस्तारण पर विशेष अभियान चलाया गया है। इसका असर यह रहा कि पिछले छह महीनों में करीब 90 प्रतिशत लंबित मामलों का समाधान कर दिया गया है। जहां पहले हजारों फाइलें लंबित थीं वहीं अब जिले में केवल करीब 2500 मामले ही शेष रह गए हैं जिन्हें प्राथमिकता के आधार पर निपटाया जा रहा है।
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रजिस्ट्री के बाद अलग आवेदन की जरूरत नहीं
अब तक संपत्ति खरीदने के बाद खरीदार को दाखिल-खारिज के लिए अलग से आवेदन करना पड़ता था। इस प्रक्रिया में पटवारी, कानूनगो और तहसील कार्यालय के कई स्तरों से फाइल गुजरती थी जिससे देरी और विवाद की स्थिति बनती थी। नई ऑटो-म्यूटेशन प्रणाली में रजिस्ट्री का डाटा सीधे राजस्व रिकॉर्ड से जुड़ जाएगा और निर्धारित प्रक्रिया पूरी होते ही नामांतरण स्वतः हो जाएगा।
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10 दिन के विशेष अभियान से पुराने मामलों का होगा निस्तारण
प्रशासन ने शेष लंबित मामलों के समाधान के लिए 10 दिन का विशेष अभियान शुरू किया है। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि पुराने म्यूटेशन मामलों को प्राथमिकता से निपटाया जाए ताकि जिले में लंबित फाइलों का बोझ पूरी तरह समाप्त हो सके।
डिजिटल निगरानी में रहेगी पूरी प्रक्रिया
नई व्यवस्था के तहत म्यूटेशन प्रक्रिया की ऑनलाइन मॉनिटरिंग की जाएगी। वरिष्ठ अधिकारी यह देख सकेंगे कि किस स्तर पर कोई मामला लंबित है और कितने समय से रुका हुआ है। तय समय सीमा से अधिक देरी होने पर संबंधित अधिकारी की जवाबदेही तय की जाएगी, जिससे प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही दोनों बढ़ेंगी।
आम लोगों को क्या मिलेगा फायदा
लोगों को रजिस्ट्री के बाद स्वत: नामांतरण होगा अलग से आवेदन की आवश्यकता नहीं पड़ेगी वहीं लोगों को तहसील और पटवारी कार्यालयों के चक्कर कम होंगे। इसके साथ बिचौलियों और अनावश्यक खर्च पर रोक लगेगी। ऑनलाइन रिकॉर्ड अपडेट होने से संपत्ति संबंधी विवादों पर भी रोक लगेगी।