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Faridabad News: चांदपुर में बिना मान्यता के चल रहा दृष्टिहीन बच्चियों का अनाथालय
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राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग की टीम ने गांव चांदपुर स्थित शेंजोपुरम अनाथालय का निरीक्षण किया
शेंजोपुरम इंस्टिट्यूशंस परिसर में तीन अनाथालय चलते पाए गए, जबकि मान्यता केवल दो की थी
संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (एनसीपीसीआर) के तीन सदस्यों की टीम ने शुक्रवार को गांव चांदपुर स्थित शेंजोपुरम अनाथालय का निरीक्षण किया। निरीक्षण में टीम ने शेंजोपुरम इंस्टिट्यूशंस परिसर में तीन अनाथालय चलते पाए गए, जबकि मान्यता केवल दो अनाथालयों की थी। दृष्टिहीन 13 बच्चियों का अनाथालय बिना किसी मान्यता के चल रहा था। टीम के सदस्यों ने इन बच्चों से बातचीत की। दूसरी तरफ, पिछले माह पड़े छापे के बाद जिन तीन पदाधिकारियों पर एफआईआर दर्ज थी वह नदारद दिखे। टीम ने पुलिस को तीनों का पता लगाने के निर्देश दिए। साथ ही एफआईआर मामले में पॉक्सो एक्ट न लगाने पर पुलिस की भारी चूक बताई।
अनाथालयों का मौके पर जाकर आयोग की तीन सदस्य टीम ने बारीकी से जांच की। सदस्य प्रीती भारद्वाज दलाल ने बताया कि चाइल्ड वेलफेयर कमेटी व डीसीपीयू द्वारा एनसीपीसीआर को बताया गया था कि इस अनाथालय में 29 बच्चियां रह रही हैं, जबकि मौके पर आयोग को 30 बच्चियां दो विभिन्न अनाथालय में रहती हुई मिलीं। टीम ने अधिकारियों से जवाब मांगा है कि उन्होंने एक 22 वर्षीय बालिग लड़की जोकि अनाथ और दृष्टिहीन है, उसको बिना किसी लीगल अभिभावक के अनाथालय में रखा है, जबकि चार महीने पहले एक रेस्टोरेशन ऑर्डर पास हुआ था, उसके बाद भी बालिग लड़की यहां रह रही है।
गैरकानूनी तरीके से चल रहा था हॉस्टल
जांच टीम को परिसर में शेंजोपुरम इंसिट्यूशंस के 2 चाइल्ड केयर होम चलाने की जानकारी दी गई थी। लेकिन परिसर में 3 अलग-अलग गर्ल चाइल्ड केयर होम पाए गए। तीसरा अनाथालय जिसमें 13 नाबालिग बच्चियां थीं, उसे गैरकानूनी ढंग से बिना रजिस्ट्रेशन व अप्रूवल के पेड हॉस्टल के रूप में चलाया जा रहा है। इस बारे में अनाथालय प्रशासन से पूछा गया तो बताया कि एक हॉस्टल पेड है, जिसमें गरीब तबके की फरीदाबाद एनसीआर इलाके की लड़कियां रहती हैं। टीम ने पेड हॉस्टल की बच्चियों से बातचीत की। डीसीपीओ व सीडब्ल्यूसी को कोई कोई संतोषजनक जवाब नहीं दिया। वहीं बच्चियों से आयोग को पता चला कि जुलाई माह में लगभग 10 शादीशुदा लड़कियों को रखा गया था। टीम को निरीक्षण के दौरान किताबों के रैक में धार्मिक ग्रंथ कटे-फटे व अस्त व्यस्त पाए गए। जिस पर आयोग ने कड़ी आपत्ति जताई।
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निरीक्षण के दौरान नहीं दिया जवाब
शेंजोपुरम अनाथालय की मैनेजमेंट को आयोग ने तलब किया और निरीक्षण के समय इस इंस्टिट्यूशन में उपस्थित किसी भी अधिकारी ने किसी भी सवाल का संतोषजनक स्पष्टीकरण नहीं दिया। सभी संबंधित अधिकारी भी बदले जा चुके हैं। प्रीती भारद्वाज दलाल ने कहा कि आयोग इस मामले में बहुत गंभीर है तथा दोषी पाए जाने पर अनाथालय और सभी दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। पुलिस अधिकारियों को अनाथालय प्रबंधन से जुड़े तीनों व्यक्तियों को जल्द से जल्द तलाश करने के आदेश दिए गए। आयोग ने पुलिस अधिकारियों से भी एफआईआर में जुवेनाइल जस्टिस एक्ट की धारा 82 और पॉक्सो का धारा 15 न जोड़ने के कारण पूछे।
14 लड़कियों का नहीं मिला रिकॉर्ड
टीम ने निरीक्षण के दौरान पाया कि किसी भी बच्ची के रिकॉर्ड फाइल में सही नियम के अनुसार नहीं लगे हुए हैं। इसके साथ ही 14 लड़कियों का कोई रिकॉर्ड सीडब्ल्यूसी या डीसीपीओ के पास उपलब्ध नहीं है। एनसीपीसीआर ने इस संबंध में भी सीडब्ल्यूसी से स्पष्टीकरण मांगा है।
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शेंजोपुरम इंस्टिट्यूशंस परिसर में तीन अनाथालय चलते पाए गए, जबकि मान्यता केवल दो की थी
संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (एनसीपीसीआर) के तीन सदस्यों की टीम ने शुक्रवार को गांव चांदपुर स्थित शेंजोपुरम अनाथालय का निरीक्षण किया। निरीक्षण में टीम ने शेंजोपुरम इंस्टिट्यूशंस परिसर में तीन अनाथालय चलते पाए गए, जबकि मान्यता केवल दो अनाथालयों की थी। दृष्टिहीन 13 बच्चियों का अनाथालय बिना किसी मान्यता के चल रहा था। टीम के सदस्यों ने इन बच्चों से बातचीत की। दूसरी तरफ, पिछले माह पड़े छापे के बाद जिन तीन पदाधिकारियों पर एफआईआर दर्ज थी वह नदारद दिखे। टीम ने पुलिस को तीनों का पता लगाने के निर्देश दिए। साथ ही एफआईआर मामले में पॉक्सो एक्ट न लगाने पर पुलिस की भारी चूक बताई।
अनाथालयों का मौके पर जाकर आयोग की तीन सदस्य टीम ने बारीकी से जांच की। सदस्य प्रीती भारद्वाज दलाल ने बताया कि चाइल्ड वेलफेयर कमेटी व डीसीपीयू द्वारा एनसीपीसीआर को बताया गया था कि इस अनाथालय में 29 बच्चियां रह रही हैं, जबकि मौके पर आयोग को 30 बच्चियां दो विभिन्न अनाथालय में रहती हुई मिलीं। टीम ने अधिकारियों से जवाब मांगा है कि उन्होंने एक 22 वर्षीय बालिग लड़की जोकि अनाथ और दृष्टिहीन है, उसको बिना किसी लीगल अभिभावक के अनाथालय में रखा है, जबकि चार महीने पहले एक रेस्टोरेशन ऑर्डर पास हुआ था, उसके बाद भी बालिग लड़की यहां रह रही है।
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गैरकानूनी तरीके से चल रहा था हॉस्टल
जांच टीम को परिसर में शेंजोपुरम इंसिट्यूशंस के 2 चाइल्ड केयर होम चलाने की जानकारी दी गई थी। लेकिन परिसर में 3 अलग-अलग गर्ल चाइल्ड केयर होम पाए गए। तीसरा अनाथालय जिसमें 13 नाबालिग बच्चियां थीं, उसे गैरकानूनी ढंग से बिना रजिस्ट्रेशन व अप्रूवल के पेड हॉस्टल के रूप में चलाया जा रहा है। इस बारे में अनाथालय प्रशासन से पूछा गया तो बताया कि एक हॉस्टल पेड है, जिसमें गरीब तबके की फरीदाबाद एनसीआर इलाके की लड़कियां रहती हैं। टीम ने पेड हॉस्टल की बच्चियों से बातचीत की। डीसीपीओ व सीडब्ल्यूसी को कोई कोई संतोषजनक जवाब नहीं दिया। वहीं बच्चियों से आयोग को पता चला कि जुलाई माह में लगभग 10 शादीशुदा लड़कियों को रखा गया था। टीम को निरीक्षण के दौरान किताबों के रैक में धार्मिक ग्रंथ कटे-फटे व अस्त व्यस्त पाए गए। जिस पर आयोग ने कड़ी आपत्ति जताई।
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निरीक्षण के दौरान नहीं दिया जवाब
शेंजोपुरम अनाथालय की मैनेजमेंट को आयोग ने तलब किया और निरीक्षण के समय इस इंस्टिट्यूशन में उपस्थित किसी भी अधिकारी ने किसी भी सवाल का संतोषजनक स्पष्टीकरण नहीं दिया। सभी संबंधित अधिकारी भी बदले जा चुके हैं। प्रीती भारद्वाज दलाल ने कहा कि आयोग इस मामले में बहुत गंभीर है तथा दोषी पाए जाने पर अनाथालय और सभी दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। पुलिस अधिकारियों को अनाथालय प्रबंधन से जुड़े तीनों व्यक्तियों को जल्द से जल्द तलाश करने के आदेश दिए गए। आयोग ने पुलिस अधिकारियों से भी एफआईआर में जुवेनाइल जस्टिस एक्ट की धारा 82 और पॉक्सो का धारा 15 न जोड़ने के कारण पूछे।
14 लड़कियों का नहीं मिला रिकॉर्ड
टीम ने निरीक्षण के दौरान पाया कि किसी भी बच्ची के रिकॉर्ड फाइल में सही नियम के अनुसार नहीं लगे हुए हैं। इसके साथ ही 14 लड़कियों का कोई रिकॉर्ड सीडब्ल्यूसी या डीसीपीओ के पास उपलब्ध नहीं है। एनसीपीसीआर ने इस संबंध में भी सीडब्ल्यूसी से स्पष्टीकरण मांगा है।