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Faridabad News: अब खुले नाले नहीं बनेंगे जानलेवा, आरसीसी स्लैब से ढंके जाएंगे
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वार्ड 24 से 30 तक सात वार्डों में स्लैब लगाए जाएंगे, 210 दिन में पूरा होगा काम
अमर उजाला ब्यूरो
फरीदाबाद। खुले नालों में गिरने से शहर में हो चुके हादसों के बीच नगर निगम ने वार्ड 24 से 30 तक खुले नालों और नालियों को स्लैब से ढंकने की योजना को मंजूरी दी है। 210 दिन में होने वाले इस काम में आरसीसी और सीमेंट कंक्रीट के स्लैब लगाए जाएंगे। निर्माण पूरा होने के बाद 730 दिन तक किसी तरह की निर्माण संबंधी खराबी सामने आने पर उसकी मरम्मत की जिम्मेदारी एजेंसी की होगी। यह काम ऐसे समय में किया जा रहा है जब फरीदाबाद में खुले नालों में गिरने से मौत के कई मामले सामने आ चुके हैं और मानसून में जलभराव के दौरान इनका खतरा और बढ़ जाता है।
खुले नालों के खतरे की सबसे दर्दनाक घटनाओं में से एक 5 नवंबर 2022 की है। जवाहर कॉलोनी निवासी 11 वर्षीय कुनाल रात करीब साढ़े आठ बजे घर के पास दुकान से सामान लेने निकला था। इसी दौरान वह एनआईटी क्षेत्र में मुख्य सड़क के किनारे खुले और कचरे से भरे करीब 11 फीट गहरे नाले में गिर गया। स्थानीय लोगों ने उसे बचाने की कोशिश की लेकिन काफी देर तक उसका पता नहीं चल सका। बाद में स्थानीय निवासी की मदद से बच्चे का शव नाले से निकाला गया। यह घटना बताती है कि खुले नाले केवल गंदगी और बदबू की समस्या नहीं हैं बल्कि आबादी वाले क्षेत्रों में गंभीर सुरक्षा जोखिम भी बन सकते हैं।
7,997 किलोग्राम सरिये के इस्तेमाल का प्रावधान
नगर निगम की स्वीकृत योजना के तहत वार्ड 24 से 30 तक डिविजन-V क्षेत्र में विभिन्न स्थानों पर नालों और नालियों को ढंकने के लिए स्लैब बनाए जाएंगे। उपलब्ध तकनीकी विवरण के अनुसार स्लैब निर्माण में आरसीसी, सीमेंट कंक्रीट और स्टील रिइनफोर्समेंट का इस्तेमाल किया जाना है। करीब 7,997 किलोग्राम सरिये के इस्तेमाल का प्रावधान तकनीकी दस्तावेज में किया गया है। काम शुरू होने से पहले डिजाइन और ड्राइंग को सक्षम स्तर से मंजूरी लेना जरूरी होगा। निर्माण में इस्तेमाल होने वाली सामग्री भी निर्धारित तकनीकी मानकों के अनुसार रखनी होगी। इसका उद्देश्य स्लैब को इतना मजबूत बनाना है कि वह सामान्य आवागमन और मौसम के दबाव को सह सके।
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स्लैब के साथ सफाई व्यवस्था बनाए रखना भी जरूरी
नालों को ढकने से खुले हिस्से में गिरने का खतरा कम होगा, लेकिन इससे जल निकासी की समस्या अपने आप खत्म नहीं होगी। फरीदाबाद में मानसून के दौरान नालों में कचरा और गाद जमा होने से पानी की निकासी प्रभावित होने की शिकायतें सामने आती रही हैं। स्लैब लगने के बाद सफाई व्यवस्था कमजोर हुई तो नाले के अंदर जमा गाद और कचरे के कारण जलभराव की स्थिति और बिगड़ सकती है इसलिए निर्माण के साथ सफाई और रखरखाव की व्यवस्था पर भी निगरानी जरूरी होगी। स्लैब में ऐसे स्थानों पर निरीक्षण और सफाई की सुविधा रखनी होगी जहां से कर्मचारी मशीन या अन्य साधनों के जरिये नाले तक पहुंच सकें। इसके अलावा नालों के मुहाने, आउटलेट और पानी के बहाव की दिशा को भी ध्यान में रखना होगा। नगर निगम के लिए एक और चुनौती यह होगी कि स्लैब के नीचे जमा होने वाले कचरे की समय पर सफाई हो। खुले नाले में कचरा दिखाई देता है, लेकिन ढकने के बाद इसकी निगरानी मुश्किल हो सकती है। ऐसे में नियमित निरीक्षण की व्यवस्था जरूरी होगी। वार्ड 24 से 30 तक के लोगों के लिए इस योजना का सीधा असर तभी दिखाई देगा, जब खुले नाले सुरक्षित रूप से ढंकने के साथ बारिश के पानी की निकासी भी सुचारु रहे। 2022 में खुले नाले में बच्चे की मौत जैसी घटना दोबारा न हो, इसके लिए केवल निर्माण नहीं, बल्कि नियमित निगरानी और जवाबदेही भी जरूरी होगी।
लोगों की समस्याओं को दूर करने के लिए नगर निगम कई स्तरों पर काम कर रहा है। यह काम भी जल्द पूरा कर लिया जाएगा।
- धीरेंद्र खड़गटा, निगम आयुक्त
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अमर उजाला ब्यूरो
फरीदाबाद। खुले नालों में गिरने से शहर में हो चुके हादसों के बीच नगर निगम ने वार्ड 24 से 30 तक खुले नालों और नालियों को स्लैब से ढंकने की योजना को मंजूरी दी है। 210 दिन में होने वाले इस काम में आरसीसी और सीमेंट कंक्रीट के स्लैब लगाए जाएंगे। निर्माण पूरा होने के बाद 730 दिन तक किसी तरह की निर्माण संबंधी खराबी सामने आने पर उसकी मरम्मत की जिम्मेदारी एजेंसी की होगी। यह काम ऐसे समय में किया जा रहा है जब फरीदाबाद में खुले नालों में गिरने से मौत के कई मामले सामने आ चुके हैं और मानसून में जलभराव के दौरान इनका खतरा और बढ़ जाता है।
खुले नालों के खतरे की सबसे दर्दनाक घटनाओं में से एक 5 नवंबर 2022 की है। जवाहर कॉलोनी निवासी 11 वर्षीय कुनाल रात करीब साढ़े आठ बजे घर के पास दुकान से सामान लेने निकला था। इसी दौरान वह एनआईटी क्षेत्र में मुख्य सड़क के किनारे खुले और कचरे से भरे करीब 11 फीट गहरे नाले में गिर गया। स्थानीय लोगों ने उसे बचाने की कोशिश की लेकिन काफी देर तक उसका पता नहीं चल सका। बाद में स्थानीय निवासी की मदद से बच्चे का शव नाले से निकाला गया। यह घटना बताती है कि खुले नाले केवल गंदगी और बदबू की समस्या नहीं हैं बल्कि आबादी वाले क्षेत्रों में गंभीर सुरक्षा जोखिम भी बन सकते हैं।
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7,997 किलोग्राम सरिये के इस्तेमाल का प्रावधान
नगर निगम की स्वीकृत योजना के तहत वार्ड 24 से 30 तक डिविजन-V क्षेत्र में विभिन्न स्थानों पर नालों और नालियों को ढंकने के लिए स्लैब बनाए जाएंगे। उपलब्ध तकनीकी विवरण के अनुसार स्लैब निर्माण में आरसीसी, सीमेंट कंक्रीट और स्टील रिइनफोर्समेंट का इस्तेमाल किया जाना है। करीब 7,997 किलोग्राम सरिये के इस्तेमाल का प्रावधान तकनीकी दस्तावेज में किया गया है। काम शुरू होने से पहले डिजाइन और ड्राइंग को सक्षम स्तर से मंजूरी लेना जरूरी होगा। निर्माण में इस्तेमाल होने वाली सामग्री भी निर्धारित तकनीकी मानकों के अनुसार रखनी होगी। इसका उद्देश्य स्लैब को इतना मजबूत बनाना है कि वह सामान्य आवागमन और मौसम के दबाव को सह सके।
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स्लैब के साथ सफाई व्यवस्था बनाए रखना भी जरूरी
नालों को ढकने से खुले हिस्से में गिरने का खतरा कम होगा, लेकिन इससे जल निकासी की समस्या अपने आप खत्म नहीं होगी। फरीदाबाद में मानसून के दौरान नालों में कचरा और गाद जमा होने से पानी की निकासी प्रभावित होने की शिकायतें सामने आती रही हैं। स्लैब लगने के बाद सफाई व्यवस्था कमजोर हुई तो नाले के अंदर जमा गाद और कचरे के कारण जलभराव की स्थिति और बिगड़ सकती है इसलिए निर्माण के साथ सफाई और रखरखाव की व्यवस्था पर भी निगरानी जरूरी होगी। स्लैब में ऐसे स्थानों पर निरीक्षण और सफाई की सुविधा रखनी होगी जहां से कर्मचारी मशीन या अन्य साधनों के जरिये नाले तक पहुंच सकें। इसके अलावा नालों के मुहाने, आउटलेट और पानी के बहाव की दिशा को भी ध्यान में रखना होगा। नगर निगम के लिए एक और चुनौती यह होगी कि स्लैब के नीचे जमा होने वाले कचरे की समय पर सफाई हो। खुले नाले में कचरा दिखाई देता है, लेकिन ढकने के बाद इसकी निगरानी मुश्किल हो सकती है। ऐसे में नियमित निरीक्षण की व्यवस्था जरूरी होगी। वार्ड 24 से 30 तक के लोगों के लिए इस योजना का सीधा असर तभी दिखाई देगा, जब खुले नाले सुरक्षित रूप से ढंकने के साथ बारिश के पानी की निकासी भी सुचारु रहे। 2022 में खुले नाले में बच्चे की मौत जैसी घटना दोबारा न हो, इसके लिए केवल निर्माण नहीं, बल्कि नियमित निगरानी और जवाबदेही भी जरूरी होगी।
लोगों की समस्याओं को दूर करने के लिए नगर निगम कई स्तरों पर काम कर रहा है। यह काम भी जल्द पूरा कर लिया जाएगा।
- धीरेंद्र खड़गटा, निगम आयुक्त