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Faridabad News: डिस्पेंसरी में दवाईयाें के लिए करना पड़ता है घंटों इंतजार, लोग परेशान

Wed, 03 Jan 2024 11:03 PM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Wed, 03 Jan 2024 11:03 PM IST
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One has to wait for hours for medicines in dispensary, people are worried
तीन फोटो-
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दवा वितरण की एक खिड़की होने के कारण एक-एक घंटे में आता है मरीजों का नंबर
लैब पर लटका ताला, जांच के लिए भटकते रहते हैं मरीज
वीना शर्मा
फरीदाबाद। स्मार्ट सिटी में ईएसआई की डिस्पेंसरियों का बुरा हाल है। एनआईटी एक नंबर मार्केट की डिस्पेंसरी में दवा वितरण एक खिड़की पर होने से मरीजों को दवाइयों के लिए घंटों इंतजार करना पड़ता है। एक-एक घंटे में मरीज का नंबर आता है। वहीं लैब टैक्नीशियन नहीं होने से जांच व्यवस्था पूरी तरह ठप है। मरीजों काे अपनी खून संबंधी जांच कराने के लिए ईएसआईसी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल के चक्कर काटने पड़ते हैं। जहां पहले से मरीजों की लंबी लाइन लगी होती है। अस्पताल की लचर व्यवस्था के कारण रोजाना 300 मरीजों को परेशान होना पड़ रहा है, जिससे लोग काफी परेशान हैं।
शहर में ईएसआई की करीब 14 डिस्पेंसरी और सेक्टर-8 में 50 बेड का एक बड़ा अस्पताल है। इन्हें राज्य सरकार द्वारा संचालित किया जाता है। मरीज सबसे पहले डिस्पेंसरियों में पहुंचता है। इसके बाद उच्च स्तरीय इलाज के लिए उसे एनआईटी 3 स्थित ईएसआईसी मेडिकल कॉलेज रेफर किया जाता है, लेकिन हालत यह है कि डिस्पेंसरियां खुद बीमार हैं। यहां सुविधाओं का भारी अभाव है। कहीं मरीजों को डॉक्टर द्वारा लिखी गई पूरी दवाईयां नहीं मिलती है तो कहीं जांच की सुविधा नहीं है। बुधवार को अमर उजाला की टीम एनआईटी एक नंबर स्थित ईएसआई डिस्पेंसरी पहुंची। यहां 12 घंटे ओपीडी की सुविधा उपलब्ध है। यहां रोजाना 300 मरीजों की ओपीडी है। यहां रखे रजिस्टर के मुताबिक दो-दो डॉक्टरों को सुबह और शाम के लिए नियुक्त किया गया है, लेकिन वास्तविकता है कि यहां अधिकांश समय में एक शिफ्ट में केवल एक डॉक्टर तैनात रहता है। जबकि एक डॉक्टर को सीएमओ कार्यालय में ड्यूटी पर लगाया गया है। इसके अलावा यहां दवाईयों के लिए एक ही खिड़की की व्यवस्था है। ऐसे में मरीजों को दवाई लेने के लिए घंटों लाइन में लगना पड़ता है। मरीजों के मुताबिक यहां पूरी दवाईयां नहीं मिलने के कारण भी उन्हें बाकी दवाईयां लेने के लिए ईएसआईसी नंबर तीन जाना पड़ता है। इसके अलावा यहां लैब की सुविधा उपलब्ध न होने के कारण मरीजों को जांच करवाने के लिए भटकना पड़ रहा है।
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लैब टेक्नीशियन न होने से जांच व्यवस्था ठप
डिस्पेंसरी में आने वाले मरीजों को खून, मल व अन्य संबंधित जांचों के लिए निजी जांच केंद्रों के अलावा ईएसआईसी नंबर 3 में भटकना पड़ता है। डिस्पेंसरी में लैब की सुविधा तो है लेकिन लैब टेक्नीशियन न होने के कारण ताला लटका हुआ है। अधिकारियों के मुताबिक, करीब पांच माह पहले तक यहां लैब टेक्नीशियन को नियुक्त किया गया था, लेकिन उसकी सेवानिवृत्ति के बाद से यह पद खाली होने के कारण लैब पर ताला लगा हुआ है। ऐसी स्थिति में वह मरीजों को किसी भी प्रकार के टेस्ट के लिए बडी ईएसआईसी मेडिकल संस्थान में भेज देते हैं।
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मरीजों से बातचीत
अगर मरीज पढ़ा लिखा है तो दवाईयां बदलने का कारण पूछ लेता है। यदि मरीज अनपढ़ है तो उसे कुछ भी थमा कर भेज दिया जाता है। इसके साथ ही पूरी दवाईयां न मिलने के कारण मरीजों को बाकी दवाइयां लेने के लिए भटकना पड़ता है। - अंजू, निवासी- एनआईटी नंबर एक
एक तो दवाईयों के लिए एक ही खिड़की की व्यवस्था होने के कारण मरीजों को अपनी बारी के लिए घंटों का इंतजार करना पड़ता है। यहां मरीजों के बैठने के लिए भी कोई उचित व्यवस्था नहीं है। सबसे अधिक परेशानी बुजुर्ग मरीजों को झेलनी पड़ती है। - पवन

पांच माह यहां लैब टेक्नीशियन की नियुक्ति थी, लेकिन उसकी सेवानिवृत्ति के बाद से यह पद खाली होने के कारण लैब पर ताला लगा हुआ है। ऐसी स्थिति में वह मरीजों को किसी भी प्रकार के टेस्ट के लिए बड़ी ईएसआईसी मेडिकल संस्थान में भेज देते हैं। इसके अलावा सभी मरीजों का संतुष्टिपूर्वक इलाज किया जाता है। दवाईयाें की कमी कभी हो जाती है, लेकिन जल्द ही मंगवा ली जाती है। - सोनिया, प्रभारी, एनआईटी एक नंबर डिस्पेंसरी
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