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Faridabad News: डीएनडी एक्सप्रेसवे पर चढ़ने के लिए लगाना पड़ता है सात किमी का चक्कर
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सेक्टर-81 से 75 के बीच लोगों को नहीं मिल रहा सीधा लाभ, कट या रैंप बनाने की मांग
अमर उजाला ब्यूरो
फरीदाबाद। डीएनडी-केएमपी एक्सप्रेसवे पर सेक्टर-81 से 75 के बीच उतरने और चढ़ने के लिए कोई कट नहीं है। इससे बड़ौली पुल और आसपास के करीब 10 रिहायशी क्षेत्रों के लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। लोगों को एक्सप्रेसवे पर चढ़ने या उतरने के लिए सात किलोमीटर तक अतिरिक्त चक्कर लगाना पड़ता है। इससे समय और ईंधन दोनों खर्च हो रहे हैं। स्थानीय आरडब्ल्यूए बड़ौली पुल के पास एंट्री-एग्जिट कट या रैंप बनाने की मांग कर चुकी है।
कट की सुविधा नहीं होने से सेक्टर-75, 76, 78, सेक्टर-4, 9 और 10 के अलावा बड़ौली और सिही गांव के लोग सबसे ज्यादा प्रभावित हैं। बीपीटीपी क्षेत्र और आसपास की कई ग्रुप हाउसिंग सोसाइटियां भी इसी हिस्से में हैं। इन क्षेत्रों से रोजाना बड़ी संख्या में लोग नौकरी, कारोबार, स्कूल और अन्य जरूरी कामों के लिए आवाजाही करते हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार एक्सप्रेसवे बनने से दिल्ली, गुरुग्राम और अन्य क्षेत्रों की कनेक्टिविटी बेहतर हुई है। लेकिन बड़ौली पुल के आसपास रहने वाले लोगों को इसका सीधा लाभ नहीं मिल पा रहा है। नजदीकी एंट्री-एग्जिट नहीं होने के कारण उन्हें लंबा रास्ता तय करना पड़ता है।
सेक्टर-81 के बाद सेक्टर-दो में अगला कट
एनएचएआई अधिकारियों के अनुसार एक्सप्रेसवे पर फिलहाल छह एंट्री-एग्जिट प्वाइंट हैं। बड़ौली पुल के आसपास कोई नजदीकी कट नहीं है। सेक्टर-81 के बाद अगला कट सेक्टर-दो के पास मिलता है। ऐसे में लोगों को सेक्टर-14 की तरफ या आईएमटी की ओर से घूमकर जाना पड़ता है। इससे कई लोगों को करीब सात किलोमीटर की अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ती है।
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कृष्णपाल गुर्जर के सामने रख चुके है मांग
इस समस्या को लेकर आरडब्ल्यूए प्रतिनिधिमंडल केंद्रीय राज्यमंत्री कृष्णपाल गुर्जर से मुलाकात कर चुका है। ज्ञापन में बड़ौली पुल के पास एंट्री-एग्जिट कट देने की मांग की गई। प्रतिनिधियों ने कहा कि कट बनने से करीब 10 रिहायशी क्षेत्रों की कनेक्टिविटी बेहतर होगी। लोगों को रोजाना सात किलोमीटर का अतिरिक्त चक्कर नहीं लगाना पड़ेगा। आरडब्ल्यूए ने बताया कि कट नहीं होने का असर आपात सेवाओं पर भी पड़ सकता है। एंबुलेंस और दमकल वाहनों को भी कई बार अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ सकती है। इससे आपात स्थिति में पहुंचने में अधिक समय लग सकता है।
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क्या कहते है लोग-
बड़ौली पुल के पास कट नहीं होने से रोजाना काफी दूरी तय करनी पड़ती है। सेक्टर-81 के बाद सीधे सेक्टर-दो जाना पड़ता है। नौकरी और कारोबार के लिए रोज आने-जाने वालों का समय और ईंधन दोनों खर्च होते हैं।- गोल्डी बरेजा, निवासी, सेक्टर-60
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कई बार लोग सेक्टर-81 कट से सर्विस रोड पर उतरना भूल जाते हैं। इस वजह से उन्हें सीधे आईएमटी पुल से यूटर्न लेकर वापस आना पड़ता है। इससे हादसे का खतरा बना रहता है। बड़ौली पुल के पास एंट्री-एग्जिट बनाया जाना चाहिए। - मनीष वशिष्ठ, निवासी सेक्टर-38
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वर्जन-
लोग बड़ौली पुल के पास एंट्री-एग्जिट कट की मांग कर रहे हैं। लोगों ने केंद्रीय राज्यमंत्री कृष्णपाल गुर्जर को भी ज्ञापन सौंपा था। जांच रिपोर्ट के आधार पर मुख्यालय स्तर पर निर्णय लिया जाएगा।- धीरज सिंह, परियोजना निदेशक, एनएचएआई
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अमर उजाला ब्यूरो
फरीदाबाद। डीएनडी-केएमपी एक्सप्रेसवे पर सेक्टर-81 से 75 के बीच उतरने और चढ़ने के लिए कोई कट नहीं है। इससे बड़ौली पुल और आसपास के करीब 10 रिहायशी क्षेत्रों के लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। लोगों को एक्सप्रेसवे पर चढ़ने या उतरने के लिए सात किलोमीटर तक अतिरिक्त चक्कर लगाना पड़ता है। इससे समय और ईंधन दोनों खर्च हो रहे हैं। स्थानीय आरडब्ल्यूए बड़ौली पुल के पास एंट्री-एग्जिट कट या रैंप बनाने की मांग कर चुकी है।
कट की सुविधा नहीं होने से सेक्टर-75, 76, 78, सेक्टर-4, 9 और 10 के अलावा बड़ौली और सिही गांव के लोग सबसे ज्यादा प्रभावित हैं। बीपीटीपी क्षेत्र और आसपास की कई ग्रुप हाउसिंग सोसाइटियां भी इसी हिस्से में हैं। इन क्षेत्रों से रोजाना बड़ी संख्या में लोग नौकरी, कारोबार, स्कूल और अन्य जरूरी कामों के लिए आवाजाही करते हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार एक्सप्रेसवे बनने से दिल्ली, गुरुग्राम और अन्य क्षेत्रों की कनेक्टिविटी बेहतर हुई है। लेकिन बड़ौली पुल के आसपास रहने वाले लोगों को इसका सीधा लाभ नहीं मिल पा रहा है। नजदीकी एंट्री-एग्जिट नहीं होने के कारण उन्हें लंबा रास्ता तय करना पड़ता है।
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सेक्टर-81 के बाद सेक्टर-दो में अगला कट
एनएचएआई अधिकारियों के अनुसार एक्सप्रेसवे पर फिलहाल छह एंट्री-एग्जिट प्वाइंट हैं। बड़ौली पुल के आसपास कोई नजदीकी कट नहीं है। सेक्टर-81 के बाद अगला कट सेक्टर-दो के पास मिलता है। ऐसे में लोगों को सेक्टर-14 की तरफ या आईएमटी की ओर से घूमकर जाना पड़ता है। इससे कई लोगों को करीब सात किलोमीटर की अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ती है।
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कृष्णपाल गुर्जर के सामने रख चुके है मांग
इस समस्या को लेकर आरडब्ल्यूए प्रतिनिधिमंडल केंद्रीय राज्यमंत्री कृष्णपाल गुर्जर से मुलाकात कर चुका है। ज्ञापन में बड़ौली पुल के पास एंट्री-एग्जिट कट देने की मांग की गई। प्रतिनिधियों ने कहा कि कट बनने से करीब 10 रिहायशी क्षेत्रों की कनेक्टिविटी बेहतर होगी। लोगों को रोजाना सात किलोमीटर का अतिरिक्त चक्कर नहीं लगाना पड़ेगा। आरडब्ल्यूए ने बताया कि कट नहीं होने का असर आपात सेवाओं पर भी पड़ सकता है। एंबुलेंस और दमकल वाहनों को भी कई बार अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ सकती है। इससे आपात स्थिति में पहुंचने में अधिक समय लग सकता है।
क्या कहते है लोग-
बड़ौली पुल के पास कट नहीं होने से रोजाना काफी दूरी तय करनी पड़ती है। सेक्टर-81 के बाद सीधे सेक्टर-दो जाना पड़ता है। नौकरी और कारोबार के लिए रोज आने-जाने वालों का समय और ईंधन दोनों खर्च होते हैं।- गोल्डी बरेजा, निवासी, सेक्टर-60
कई बार लोग सेक्टर-81 कट से सर्विस रोड पर उतरना भूल जाते हैं। इस वजह से उन्हें सीधे आईएमटी पुल से यूटर्न लेकर वापस आना पड़ता है। इससे हादसे का खतरा बना रहता है। बड़ौली पुल के पास एंट्री-एग्जिट बनाया जाना चाहिए। - मनीष वशिष्ठ, निवासी सेक्टर-38
वर्जन-
लोग बड़ौली पुल के पास एंट्री-एग्जिट कट की मांग कर रहे हैं। लोगों ने केंद्रीय राज्यमंत्री कृष्णपाल गुर्जर को भी ज्ञापन सौंपा था। जांच रिपोर्ट के आधार पर मुख्यालय स्तर पर निर्णय लिया जाएगा।- धीरज सिंह, परियोजना निदेशक, एनएचएआई