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पुलिस को चकमा देकर बॉर्डर पंहुचे किसान नेता, पुलिस ने हिरासत में लिए
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फरीदाबाद में सराय टोल प्लाजा के पास बैरीकेड लगाकर दिल्ली की तरफ जाने वाले वाहनों की चैकिंग करते प
- फोटो : Faridabad
फरीदाबाद। नए कृषि कानूनों के विरोध में पांच दिन पहले पलवल से शुरू हुआ किसानों का पैदल मार्च सोमवार को नाटकीय ढंग से फरीदाबाद में खत्म हो गया। किसानों ने रविवार को ऐलान किया था कि अगली सुबह ज्यादा से ज्यादा संख्या में लोग इस आंदोलन में शामिल हों लेकिन सुबह होते-होते कृषकों की संख्या बढ़ने की बजाय घटनी शुरू हो गई। रात को ही ज्यादातर किसान व किसान नेता बड़खल चौक स्थित देव समाज आश्रम से निकल लिए। पुलिस को चकमा देने के लिए कुछ लोग एक-एक करके बड़खल स्थित आश्रम से निकले और बॉर्डर तक जा पहुंचे। इस पर पुलिस ने उन्हें वहां हिरासत में ले लिया।
रविवार शाम को ही बड़खल के पास पुलिस ने किसानों को बैरिकेड लगाकर रोक दिया था। इसके बाद उन्होंने यहां देव समाज आश्रम में रात गुजारने का ऐलान कर दिया था। रात होने पर कुछ किसान आसपास रहने वाले अपने रिश्तेदारों और सगे संबंधियों के घर चले गए। उन्होंने फोन पर ही संपर्क कर लोगों को सुबह एकत्रित होने के लिए साढ़े बारह बजे का समय दिया। ऐसे में स्थिति को भांपते हुए पुलिस ने दर्जन भर से ज्यादा पीसीआर, हरियाणा रोडवेज की दो और पुलिस की एक बस आश्रम के बाहर तैनात कर दी थी। पुलिस को आला अधिकारियों की तरफ से किसानों को हिरासत में लेने का निर्देश मिल चुका था।
जहां किसान दिखे, पुलिस ने गाड़ी में बैठा लिया
उधर, इस बात की सूचना किसान नेताओं को भी मिल गई। इसके बाद उन्होंने अपनी रणनीति में बदलाव किया। नई योजना के अनुसार किसान अलग-अलग हो गए और दो, तीन के समूह में बॉर्डर की तरफ बढ़ने लगे। इससे पुलिस किसानों और आमजन में फर्क न कर सके। कुछ किसान बड़खल स्थित आश्रम में पहुंचे, लेकिन बाहर सन्नाटा और भारी संख्या में पुलिसबल देखकर बाहर से ही खिसक लिए। बॉर्डर पर पुलिस व खुफिया विभाग पहले से ही तैनात था। पुलिस ने थोड़ी-थोड़ी दूरी पर ही रोडवेज की बस व जवानों को लगाया हुआ था। सभी को निर्देश था कि जहां भी किसान दिखे उन्हें गाड़ी में बैठा लिया जाए।
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सराय बॉर्डर से पहले एक निर्माणाधीन इमारत के सामने पुलिस ने तीन रोडवेज की बसें, अपराध शाखा की टीम व कई थानों के प्रभारी सहित करीब 100 पुलिसकर्मी लगा रखे थे। यहां पुलिस ने पैदल जा रहे भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय सचिव रतन सिंह सौरोत व सुरेंदर चौहान को हिरासत में ले लिया। इसके बाद पूर्व पार्षद जगन डागर, राष्ट्रीय जाट एकता मंच के उपाध्यक्ष मास्टर अमीचंद को गाड़ी में बिठा लिया। किसानों के आंदोलन को समर्थन देने सराय पहुंचे अनशनकारी बाबा रामकेवल व आरटीआई कार्यकर्ता वरुण श्योकंद को भी पुलिस ने हिरासत में ले लिया।
किसान नेताओं के मोबाइल हैं बंद
इस तरह करीब 15 लोगों को हिरासत में लेकर पुलिस सेक्टर-37 थाने पहुंची। इसके बाद बाबा रामकेवल व वरुण श्योकंद को कुछ देर गाड़ी में घुमाने के बाद बॉर्डर की तरफ नहीं आने की हिदायत देकर सेक्टर-17 में छोड़ दिया। बाकी किसान नेताओं को हिरासत में लिए जाने के मामले में पुलिस ने पूरी तरह से चुप्पी साध रखी है। माना जा रहा है कि भारत बंद के बाद ही किसानों को छोड़ा जाएगा। सभी किसान नेताओं के मोबाइल फोन भी बंद आ रहे हैं।
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रविवार शाम को ही बड़खल के पास पुलिस ने किसानों को बैरिकेड लगाकर रोक दिया था। इसके बाद उन्होंने यहां देव समाज आश्रम में रात गुजारने का ऐलान कर दिया था। रात होने पर कुछ किसान आसपास रहने वाले अपने रिश्तेदारों और सगे संबंधियों के घर चले गए। उन्होंने फोन पर ही संपर्क कर लोगों को सुबह एकत्रित होने के लिए साढ़े बारह बजे का समय दिया। ऐसे में स्थिति को भांपते हुए पुलिस ने दर्जन भर से ज्यादा पीसीआर, हरियाणा रोडवेज की दो और पुलिस की एक बस आश्रम के बाहर तैनात कर दी थी। पुलिस को आला अधिकारियों की तरफ से किसानों को हिरासत में लेने का निर्देश मिल चुका था।
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जहां किसान दिखे, पुलिस ने गाड़ी में बैठा लिया
उधर, इस बात की सूचना किसान नेताओं को भी मिल गई। इसके बाद उन्होंने अपनी रणनीति में बदलाव किया। नई योजना के अनुसार किसान अलग-अलग हो गए और दो, तीन के समूह में बॉर्डर की तरफ बढ़ने लगे। इससे पुलिस किसानों और आमजन में फर्क न कर सके। कुछ किसान बड़खल स्थित आश्रम में पहुंचे, लेकिन बाहर सन्नाटा और भारी संख्या में पुलिसबल देखकर बाहर से ही खिसक लिए। बॉर्डर पर पुलिस व खुफिया विभाग पहले से ही तैनात था। पुलिस ने थोड़ी-थोड़ी दूरी पर ही रोडवेज की बस व जवानों को लगाया हुआ था। सभी को निर्देश था कि जहां भी किसान दिखे उन्हें गाड़ी में बैठा लिया जाए।
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सराय बॉर्डर से पहले एक निर्माणाधीन इमारत के सामने पुलिस ने तीन रोडवेज की बसें, अपराध शाखा की टीम व कई थानों के प्रभारी सहित करीब 100 पुलिसकर्मी लगा रखे थे। यहां पुलिस ने पैदल जा रहे भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय सचिव रतन सिंह सौरोत व सुरेंदर चौहान को हिरासत में ले लिया। इसके बाद पूर्व पार्षद जगन डागर, राष्ट्रीय जाट एकता मंच के उपाध्यक्ष मास्टर अमीचंद को गाड़ी में बिठा लिया। किसानों के आंदोलन को समर्थन देने सराय पहुंचे अनशनकारी बाबा रामकेवल व आरटीआई कार्यकर्ता वरुण श्योकंद को भी पुलिस ने हिरासत में ले लिया।
किसान नेताओं के मोबाइल हैं बंद
इस तरह करीब 15 लोगों को हिरासत में लेकर पुलिस सेक्टर-37 थाने पहुंची। इसके बाद बाबा रामकेवल व वरुण श्योकंद को कुछ देर गाड़ी में घुमाने के बाद बॉर्डर की तरफ नहीं आने की हिदायत देकर सेक्टर-17 में छोड़ दिया। बाकी किसान नेताओं को हिरासत में लिए जाने के मामले में पुलिस ने पूरी तरह से चुप्पी साध रखी है। माना जा रहा है कि भारत बंद के बाद ही किसानों को छोड़ा जाएगा। सभी किसान नेताओं के मोबाइल फोन भी बंद आ रहे हैं।