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Faridabad News: दो बार शुल्क लेने के बाद भी नबंर प्लेट नहीं लगाई, उपभोक्ता आयोग ने कंपनी को ठहराया दोषी
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फरीदाबाद। हाई सिक्योरिटी रजिस्ट्रेशन प्लेट (एचएसआरपी) लगाने के लिए दो बार ऑनलाइन शुल्क लेने के बावजूद सेवा उपलब्ध नहीं कराने पर डिप्टी कंज्यूमर डिस्प्यूट रिड्रेसल कमीशन ने लिंक उत्सव रजिस्ट्रेशन प्लेट प्राइवेट लिमिटेड को सेवा में कमी का दोषी ठहराया है। आयोग ने कंपनी को उपभोक्ता से ली गई राशि लौटाने के साथ मानसिक प्रताड़ना और मुकदमे के खर्च का भुगतान करने का आदेश दिया है।
डिप्टी कंज्यूमर डिस्प्यूट रिड्रेसल कमीशन के अध्यक्ष अमित अरोड़ा और सदस्य इंदिरा भड़ाना की पीठ ने यह फैसला बल्लभगढ़ की तिरखा कॉलोनी निवासी आदित्य चौधरी की शिकायत पर सुनाया। शिकायत के अनुसार, उनके चाचा विजय की स्प्लेंडर प्लस बाइक के लिए जनवरी 2024 में 253.03 रुपये ऑनलाइन जमा किए गए थे। 15 जनवरी की फिटमेंट तिथि तय हुई, लेकिन कोई कर्मचारी नहीं पहुंचा और बाद में आवेदन रद्द कर दिया गया। इसके बाद 16 जनवरी को दोबारा 253.03 रुपये जमा किए गए, मगर 22 जनवरी की तय तिथि पर भी नंबर प्लेट नहीं लगाई गई और दूसरा आवेदन भी रद्द कर दिया गया।
शिकायतकर्ता ने बताया कि कंपनी ने वाहन रिकॉर्ड में त्रुटि बताई, जबकि आरटीओ ने रिकॉर्ड सही होने की पुष्टि की। सुनवाई के दौरान कंपनी की ओर से कोई जवाब दाखिल नहीं किया गया, जिस पर आयोग ने उसे एकपक्षीय घोषित कर दिया।
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आयोग ने कंपनी को 253 रुपये वापस करने, मानसिक प्रताड़ना के लिए 2,200 रुपये तथा मुकदमे के खर्च के रूप में 2,200 रुपये देने का आदेश दिया है। पूरी राशि 30 दिन के भीतर अदा करनी होगी।
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डिप्टी कंज्यूमर डिस्प्यूट रिड्रेसल कमीशन के अध्यक्ष अमित अरोड़ा और सदस्य इंदिरा भड़ाना की पीठ ने यह फैसला बल्लभगढ़ की तिरखा कॉलोनी निवासी आदित्य चौधरी की शिकायत पर सुनाया। शिकायत के अनुसार, उनके चाचा विजय की स्प्लेंडर प्लस बाइक के लिए जनवरी 2024 में 253.03 रुपये ऑनलाइन जमा किए गए थे। 15 जनवरी की फिटमेंट तिथि तय हुई, लेकिन कोई कर्मचारी नहीं पहुंचा और बाद में आवेदन रद्द कर दिया गया। इसके बाद 16 जनवरी को दोबारा 253.03 रुपये जमा किए गए, मगर 22 जनवरी की तय तिथि पर भी नंबर प्लेट नहीं लगाई गई और दूसरा आवेदन भी रद्द कर दिया गया।
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शिकायतकर्ता ने बताया कि कंपनी ने वाहन रिकॉर्ड में त्रुटि बताई, जबकि आरटीओ ने रिकॉर्ड सही होने की पुष्टि की। सुनवाई के दौरान कंपनी की ओर से कोई जवाब दाखिल नहीं किया गया, जिस पर आयोग ने उसे एकपक्षीय घोषित कर दिया।
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आयोग ने कंपनी को 253 रुपये वापस करने, मानसिक प्रताड़ना के लिए 2,200 रुपये तथा मुकदमे के खर्च के रूप में 2,200 रुपये देने का आदेश दिया है। पूरी राशि 30 दिन के भीतर अदा करनी होगी।