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Faridabad News: लाखों की आबादी पर एक भी सरकारी सामुदायिक भवन नहीं
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लक्कड़पुर-शिव दुर्गा विहार क्षेत्र के लोगों को समारोहों के लिए निजी स्थलों का लेना पड़ता है सहारा
संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। लक्कड़पुर, शिव दुर्गा विहार और दयालबाग इलाके में बड़ी आबादी के बावजूद लोगों के पास सामूहिक आयोजनों के लिए कोई सरकारी सुविधा उपलब्ध नहीं है। बड़ी आबादी वाले इस क्षेत्र में शादी-विवाह, धार्मिक आयोजन, सामाजिक बैठक या अन्य कार्यक्रमों के लिए लोगों को निजी स्थान तलाशने पड़ते हैं।
लोगों का कहना है कि निजी हॉल और फार्म हाउस का किराया अधिक होने के कारण हर परिवार के लिए वहां कार्यक्रम करना आसान नहीं है। खासकर सीमित आय वाले परिवारों को आयोजन के लिए अलग से बड़ी रकम खर्च करनी पड़ती है। कई बार घर के बाहर या आसपास खाली जगह में टेंट लगाकर कार्यक्रम करना पड़ता है। इससे रास्ते में आवाजाही प्रभावित होने की स्थिति भी बनती है।
लोगों का कहना है कि यदि यहां सरकारी स्तर पर सामुदायिक भवन बनाया जाए तो उसका इस्तेमाल केवल शादी-विवाह तक सीमित नहीं रहेगा। स्थानीय स्तर पर स्वास्थ्य शिविर, महिलाओं की बैठक, प्रशिक्षण कार्यक्रम, सामाजिक बैठक और अन्य सार्वजनिक गतिविधियां भी वहां कराई जा सकेंगी। इससे लोगों को निजी जगहों के लिए होने वाले खर्च से राहत मिलेगी। आरडब्ल्यूए प्रधान डीएस राणा ने बताया कि सूरजकुंड के आसपास मौजूद फार्म हाउस आम परिवारों के बजट में नहीं आते। क्षेत्र की आबादी को देखते हुए यहां सरकारी सामुदायिक भवन की आवश्यकता है। इससे आर्थिक रूप से कमजोर और मध्यमवर्गीय परिवारों को कार्यक्रम आयोजित करने के लिए बेहतर और कम खर्च वाला विकल्प मिल सकेगा।
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संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। लक्कड़पुर, शिव दुर्गा विहार और दयालबाग इलाके में बड़ी आबादी के बावजूद लोगों के पास सामूहिक आयोजनों के लिए कोई सरकारी सुविधा उपलब्ध नहीं है। बड़ी आबादी वाले इस क्षेत्र में शादी-विवाह, धार्मिक आयोजन, सामाजिक बैठक या अन्य कार्यक्रमों के लिए लोगों को निजी स्थान तलाशने पड़ते हैं।
लोगों का कहना है कि निजी हॉल और फार्म हाउस का किराया अधिक होने के कारण हर परिवार के लिए वहां कार्यक्रम करना आसान नहीं है। खासकर सीमित आय वाले परिवारों को आयोजन के लिए अलग से बड़ी रकम खर्च करनी पड़ती है। कई बार घर के बाहर या आसपास खाली जगह में टेंट लगाकर कार्यक्रम करना पड़ता है। इससे रास्ते में आवाजाही प्रभावित होने की स्थिति भी बनती है।
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लोगों का कहना है कि यदि यहां सरकारी स्तर पर सामुदायिक भवन बनाया जाए तो उसका इस्तेमाल केवल शादी-विवाह तक सीमित नहीं रहेगा। स्थानीय स्तर पर स्वास्थ्य शिविर, महिलाओं की बैठक, प्रशिक्षण कार्यक्रम, सामाजिक बैठक और अन्य सार्वजनिक गतिविधियां भी वहां कराई जा सकेंगी। इससे लोगों को निजी जगहों के लिए होने वाले खर्च से राहत मिलेगी। आरडब्ल्यूए प्रधान डीएस राणा ने बताया कि सूरजकुंड के आसपास मौजूद फार्म हाउस आम परिवारों के बजट में नहीं आते। क्षेत्र की आबादी को देखते हुए यहां सरकारी सामुदायिक भवन की आवश्यकता है। इससे आर्थिक रूप से कमजोर और मध्यमवर्गीय परिवारों को कार्यक्रम आयोजित करने के लिए बेहतर और कम खर्च वाला विकल्प मिल सकेगा।
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