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सूरजकुंड पर भी कोरोना संकट, सैलानियों का टोंटा
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फरीदाबाद। दिल्ली से सटे फरीदाबाद के अरावली क्षेत्र स्थित सूरजकुंड हरियाणा का महत्वपूर्ण पर्यटन क्षेत्र है। सूरजकुंड पर भी कोरोना संकट की मार देखने को मिल रही है। जहां प्रकृति व कुंड की सुंदरता देखने सैकड़ों सैलानी आते थे, आज यह संख्या सिमटकर दस से पंद्रह रह गई है। सुरक्षा के लिहाज से टिकट काउंटर बंद कर दिए गए हैं। कुंड के टिकट बेचने के बजाए बारकोड स्कैन करा कर मेसेज के माध्यम से प्रवेश दिया जा रहा है।
अरावली की पहाड़ी क्षेत्र में स्थित सूरजकुंड को दसवीं शताब्दी में राजा सूरजमल ने बनवाया था। इसी कुंड के पास अब सूरजकुंड अंतरराष्ट्रीय हस्तशिल्प मेला भी लगाया जाता है। प्रत्येक साल फरवरी माह में आयोजित किए जाने वाले हस्तशिल्प मेला देश-विदेश में हरियाली व खूबसूरती के लिए भी काफी प्रसिद्ध है। 15 दिनों तक लगने वाले इस अंतरराष्ट्रीय मेले के अलावा साल भर सैलानी राजा सूरजमल द्वारा बनवाए गए इस कुंड को देखने के लिए पहुंचते हैं। अरावली की पहाड़ियों के बीच यह कुंड प्रकृति प्रेमी व सैलानियों को आकर्षित करता है। दिल्ली से सटे होने के कारण यह क्षेत्र पर्यटक के लिए महत्वपूर्ण हैं। यह कुंड पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग ने संरक्षित कर रखा है। कोरोना के संक्रमण से सुरक्षा को देखते हुए टिकट नहीं अब बारकोड स्कैन कराकर प्रवेश कराया जा रहा है।
अनलॉक-दो में खुला कुंड
लॉकडाउन के दौरान यहां आने व घूमने पर पूरी तरह से पाबंदी लगा दी गई थी। हालांकि, अनलॉक-दो के दौरान छूट मिलने पर यहां सैलानियों व प्रकृति प्रेमियों के आने पर लगी रोक तो हटा दी गई, लेकिन टिकट काउंटर को शुरू नहीं किया गया है। कुंड के गेट पर ही पुरातत्व विभाग ने पेमेंट के लिए बारकोड स्कैनर लगा दिया है। जिसे स्कैन कराने के बाद कुंड के लिए प्रवेश दिया जा रहा है। इसके अलावा एएसआई डॉट पेमेंट गेटवे पर जाकर भी ऑनलाइन टिकट के दाम पेमेंट करने के बाद कुंड में प्रवेश लिया जा सकता है।
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लोगों की संख्या अब भी बेहद कम
लॉकडाउन के बाद अनलॉक तीन अब खत्म होने वाला है। जनजीवन पटरी पर लौटने लगा है। काम धंधे शुरू हो चुके हैं। इसके बाद भी सूरजकुंड में सैलानियों व देशी पर्यटकों की संख्या न के बराबर है। लॉकडाउन से पहले यहां रोज करीब दो सौ से अधिक लोग घूमने आते थे। मौजूदा समय में यह संख्या घटकर दस से पंद्रह तक सिमट कर रह गई है। जो लोग यहां घूमने आ रहे हैं, इनमें अधिकांश संख्या युवाओं की है।
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अरावली की पहाड़ी क्षेत्र में स्थित सूरजकुंड को दसवीं शताब्दी में राजा सूरजमल ने बनवाया था। इसी कुंड के पास अब सूरजकुंड अंतरराष्ट्रीय हस्तशिल्प मेला भी लगाया जाता है। प्रत्येक साल फरवरी माह में आयोजित किए जाने वाले हस्तशिल्प मेला देश-विदेश में हरियाली व खूबसूरती के लिए भी काफी प्रसिद्ध है। 15 दिनों तक लगने वाले इस अंतरराष्ट्रीय मेले के अलावा साल भर सैलानी राजा सूरजमल द्वारा बनवाए गए इस कुंड को देखने के लिए पहुंचते हैं। अरावली की पहाड़ियों के बीच यह कुंड प्रकृति प्रेमी व सैलानियों को आकर्षित करता है। दिल्ली से सटे होने के कारण यह क्षेत्र पर्यटक के लिए महत्वपूर्ण हैं। यह कुंड पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग ने संरक्षित कर रखा है। कोरोना के संक्रमण से सुरक्षा को देखते हुए टिकट नहीं अब बारकोड स्कैन कराकर प्रवेश कराया जा रहा है।
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अनलॉक-दो में खुला कुंड
लॉकडाउन के दौरान यहां आने व घूमने पर पूरी तरह से पाबंदी लगा दी गई थी। हालांकि, अनलॉक-दो के दौरान छूट मिलने पर यहां सैलानियों व प्रकृति प्रेमियों के आने पर लगी रोक तो हटा दी गई, लेकिन टिकट काउंटर को शुरू नहीं किया गया है। कुंड के गेट पर ही पुरातत्व विभाग ने पेमेंट के लिए बारकोड स्कैनर लगा दिया है। जिसे स्कैन कराने के बाद कुंड के लिए प्रवेश दिया जा रहा है। इसके अलावा एएसआई डॉट पेमेंट गेटवे पर जाकर भी ऑनलाइन टिकट के दाम पेमेंट करने के बाद कुंड में प्रवेश लिया जा सकता है।
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लोगों की संख्या अब भी बेहद कम
लॉकडाउन के बाद अनलॉक तीन अब खत्म होने वाला है। जनजीवन पटरी पर लौटने लगा है। काम धंधे शुरू हो चुके हैं। इसके बाद भी सूरजकुंड में सैलानियों व देशी पर्यटकों की संख्या न के बराबर है। लॉकडाउन से पहले यहां रोज करीब दो सौ से अधिक लोग घूमने आते थे। मौजूदा समय में यह संख्या घटकर दस से पंद्रह तक सिमट कर रह गई है। जो लोग यहां घूमने आ रहे हैं, इनमें अधिकांश संख्या युवाओं की है।