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Faridabad News: फैब्रिकेटेड अस्पताल में शिफ्टिंग के बाद भी नहीं मिली राहत, बंद हुआ कृत्रिम अंग निर्माण कार्य

Wed, 10 Sep 2025 12:26 AM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Wed, 10 Sep 2025 12:26 AM IST
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No relief even after shifting to fabricated hospital, prosthetic limb manufacturing work stopped
- रेडक्रॉस सोसाइटी ने सीएमओ से जमीन की मांग की, दिव्यांगों को लौटाया जा रहा
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संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। बीके अस्पताल परिसर में संचालित रेडक्रॉस सोसाइटी के फिजियोथेरेपी केंद्र को फैब्रिकेटेड अस्पताल में शिफ्ट किए जाने के बाद भी समस्याएं कम नहीं हुई हैं। सेंटर में अब न तो कृत्रिम अंग बनाए जा पा रहे हैं और न ही दिव्यांगों के लिए जरूरी अन्य उपकरण। दिव्यांगों को उपकरण न मिल पाने की वजह से लौटाया जा रहा है।

रेडक्रॉस सोसाइटी ने इस संबंध में मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. जयंत आहूजा से स्थायी जमीन की मांग की है, ताकि सेंटर को दोबारा सुचारु रूप से चलाया जा सके। रेडक्रॉस भवन में पहले फिजियोथेरेपी सेंटर के साथ-साथ कृत्रिम अंग, पोलियो ग्रस्त बच्चों के लिए कैलीपर, लकवे के मरीजों के लिए स्प्लिंट्स, कमर की बेल्ट और अन्य ऑर्थोपेडिक उपकरण बनाए जाते थे। अब फिजियोथेरेपी सेंटर के फैब्रिकेटेड अस्पताल में स्थानांतरित होने के बाद भारी मशीनों को वहां स्थापित करना संभव नहीं है।
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रेडक्रॉस के ऑर्थोटिस्ट जयपाल ने बताया कि कृत्रिम अंग बनाने वाली मशीनें 100 किलो से भी भारी होती हैं और इन्हें दीवारों में फिट किया जाता है। फैब्रिकेटेड ढांचे में यह संभव नहीं है।
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दिव्यांगों को लौटना पड़ रहा खाली हाथ

कैलीपर के लिए सेंटर पहुंचे देवव्रत ने बताया कि उनका एक पैर पोलियोग्रस्त है। पुराने कैलीपर के खराब हो जाने पर वह नया लेने आए थे, लेकिन उपकरण नहीं बन पाने की वजह से उन्हें खाली हाथ लौटना पड़ा।

रेडक्रॉस सचिव बिजेंदर सौरोत ने बताया कि हमने सीएमओ से अस्पताल परिसर में ऐसा स्थान मांगा है, जहां फिजियोथेरेपी सेंटर के साथ-साथ कृत्रिम अंग और उपकरण निर्माण दोबारा शुरू किया जा सके। जल्द ही यह मामला जिला उपायुक्त के संज्ञान में भी लाया जाएगा।

प्रतिदिन आठ से दस दिव्यांगों को मिलते थे उपकरण

इस केंद्र में रोजाना आठ से दस दिव्यांगों को उपकरण मुहैया कराए जाते थे। वर्तमान में यह कार्य पूरी तरह से बंद हो चुका है, जिससे जरूरतमंदों को बड़ी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।


इसलिए किया गया था सेंटर का स्थानांतरण

गौरतलब है कि बीके अस्पताल के पुराने भवन को तोड़कर 200 बेड की मातृत्व शिशु स्वास्थ्य इकाई का निर्माण किया जाना है, जिस पर करीब 162 करोड़ रुपये की लागत आएगी। इसके चलते फिजियोथेरेपी सेंटर को अस्थायी रूप से फैब्रिकेटेड ढांचे में शिफ्ट कर दिया गया है। हालांकि सूत्रों के अनुसार, रेडक्रॉस सोसाइटी का भवन तोड़फोड़ की जद में नहीं आता, लेकिन उसे खाली कर मजदूरों के ठहरने की व्यवस्था की जा रही है।
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