फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Delhi NCR ›   Faridabad News ›   Natural gulal is being made from flowers offered in temples.

Faridabad News: मंदिरों में चढ़ाए गए फूलों से बनाई जा रही प्राकृतिक गुलाल

Fri, 27 Feb 2026 11:29 PM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Fri, 27 Feb 2026 11:29 PM IST
विज्ञापन
Natural gulal is being made from flowers offered in temples.
नगर निगम फरीदाबाद और विक्टोरा लाइफ फाउंडेशन के संयुक्त प्रयास से साकार हो रही पहल
विज्ञापन


अमर उजाला ब्यूरो

फरीदाबाद। आस्था, पर्यावरण संरक्षण और नवाचार का प्रेरक संगम फरीदाबाद में देखने को मिला है। शहर में मंदिरों में चढ़ाए जाने वाले फूलों को कचरे में जाने से बचाकर उनसे प्राकृतिक गुलाल तैयार किया जा रहा है। यह पहल नगर निगम फरीदाबाद और विक्टोरा लाइफ फाउंडेशन के संयुक्त प्रयास से साकार हुई है जिसने वेस्ट टू वेल्थ मॉडल को जमीनी स्तर पर सफल उदाहरण के रूप में प्रस्तुत किया है।

महाशिवरात्रि के अवसर पर शुरू किए गए इस अभियान का उद्देश्य मंदिरों में अर्पित फूलों को अनुपयोगी कचरा बनने से रोकते हुए उन्हें पर्यावरण-अनुकूल उत्पादों में बदलना है। फाउंडेशन के अध्यक्ष एसएस बांगा के अनुसार नगर निगम आयुक्त धीरेंद्र खड़गटा के साथ हुई बैठकों के बाद इस पहल को शहर के कचरा प्रबंधन और पर्यावरण संरक्षण से जोड़ा गया है ताकि यह प्रयोग केवल प्रतीकात्मक न रहकर एक स्थायी व्यवस्था का रूप ले सके।
विज्ञापन


प्रमुख मंदिरों से रोजाना फूलों का संग्रह

अभियान के पहले चरण में शहर के प्रमुख मंदिरों सैनिक कॉलोनी के शिव मंदिर, भाखरी के खाटू श्याम मंदिर, एनआईटी क्षेत्र के हनुमान मंदिर व काली मंदिर, सेक्टर-14 के लक्ष्मी नारायण मंदिर, सेक्टर-15 के गीता मंदिर सहित अन्य धार्मिक स्थलों से प्रतिदिन फूल एकत्र किए जा रहे हैं। फाउंडेशन की वाइस प्रेजिडेंट दमन बांगा ने बताया कि फूलों को वैज्ञानिक और स्वच्छ प्रक्रिया से सुखाया जाता है जिसके बाद उनके प्राकृतिक रंगद्रव्यों से त्वचा के लिए सुरक्षित, रसायन-मुक्त और पर्यावरण-अनुकूल गुलाल तैयार किया जाता है। अभियान को जनभागीदारी से जोड़ने के लिए सेक्टर-82 की एसपीआर सोसाइटी और पूरी प्राणायाम सहित कई रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशनों को भी शामिल किया गया है। समन्वय के लिए गठित स्वयंसेवी समूह में बबिता सिंह, पूर्णिमा रस्तोगी, रूबी मल्ही और कमल कांत शर्मा सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन


आयुक्त ने की पहल की सराहना

तैयार प्राकृतिक गुलाल एस. एस. बांगा की ओर से नगर निगम आयुक्त धीरेंद्र खड़गटा को सौंपा गया। आयुक्त ने इसे स्वच्छता और रीसाइक्लिंग अभियानों को नई दिशा देने वाला मॉडल बताते हुए कहा कि भविष्य में इसे अधिक मंदिरों और संस्थानों तक विस्तार दिया जाएगा। उन्होंने अन्य सामाजिक संगठनों से भी ‘क्लीन और ग्रीन फरीदाबाद’ के लक्ष्य में भागीदारी की अपील की।

पर्यावरण पर सीधा लाभ

मानव रचना विश्वविद्यालय के पर्यावरण विभाग के प्रोफेसर डॉ. विनायक पाठक के अनुसार, यदि 100 किलोग्राम फूलों को लैंडफिल में जाने से रोका जाए तो लगभग 6.2 किलोग्राम मीथेन गैस के उत्सर्जन से बचा जा सकता है। यह प्रभाव करीब 174 किलोग्राम कार्बन डाइऑक्साइड समतुल्य उत्सर्जन के बराबर है, जो एक पेट्रोल कार को लगभग 700 से 800 किलोमीटर चलाने से होने वाले प्रदूषण के समान माना जाता है।


रोजगार और आत्मनिर्भरता की ओर कदम

इस पहल के तहत आगे चलकर अगरबत्ती, धूपबत्ती और अन्य जैविक उत्पाद तैयार करने की योजना भी है। इससे स्थानीय स्तर पर खासकर महिलाओं और युवाओं को रोजगार के अवसर मिलने की उम्मीद है। यह प्रयास दर्शाता है कि जब प्रशासन और सामाजिक संस्थाएं मिलकर काम करती हैं, तो आस्था से जुड़े फूल भी स्वच्छता, हरित विकास और आत्मनिर्भरता के मजबूत प्रतीक बन सकते हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed