इन युवाओं को सलामः किसी ने पर्यवारण के क्षेत्र पर किया फोकस, तो कोई एनिमेशन में कमा रहा नाम
- दो दोस्तों ने पर्यावरण के मुद्दे पर किया फोकस अब पूरे देश में कमा रहे नाम
- एनिमेशन में हाथ आजमा कर हिमांशु युवाओं को दे रहे न्यू मीडिया में करियर का संदेश
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फरीदाबाद में आरामदायक जिंदगी की चाहत से हटकर कुछ युवा ऐसे भी हैं जो समाज और देश के लिए कुछ बड़ा करना चाहते हैं। ये युवा समस्याओं पर विचार कर समाधान निकालने के लिए जूझते हैं और लोगों को नई उम्मीद देते हैं। पेश है ऐसे युवाओं की सोच और उनकी सफलता पर अमर उजाला की एक रिपोर्ट:
दो दोस्त मिलकर बचा रहे पर्यावरण
जिले में दो दोस्त ऋषभ और अनुराग ने बड़ी कंपनी में नौकरी छोड़ कुछ अलग करने की ठानी तो पूरे देश में अपनी पहचान बना ली। इंजीनियरिंग और फाइनेंस मैनेजमेंट की पढ़ाई के बाद मुश्किल से दो साल की नौकरी ने ही उन्हें थका दिया। दोनों ने जाना कि जिंदगी में कुछ बड़ा करना है, तो शुरुआत जल्दी करनी होगी। ऐसे में उन्होेंने वन टाइम यूज प्लास्टिक निस्तारण का स्थाई विकल्प तलाशना शुरू कर दिया। पर्यावरण संरक्षण व कूड़ा निस्तारण के लिए री-कार्ट नाम की कंपनी शुरू कर बीते छह साल से वह देशव्यापी प्रॉजेक्ट चला रहे हैं। देश में कुल 42 नगर निगम व 37 सीमेंट फैक्टरी के साथ काम कर रहे हैं।
री-कार्ट से वन टाइम यूज प्लास्टिक का सीमेंट उत्पादकों तक का सफर:
री-कार्ट वन टाइम इस्तेमाल होने वाली प्लास्टिक को दोबारा लॉजिस्टिक के जरिए सीमेंट उत्पादक कंपनी को बेचते हैं। यह कूड़ा नगर निगम के साथ करार करके घरों से उठाया जाता है, फिर सीमेंट उत्पादक 95 फीसदी कोयले व 5 फीसदी वन टाइम प्लास्टिक का इस्तेमाल कर सीमेंट बनाते हैं। इससे री-कार्ट कमाई और सफाई का बेहतरीन प्लेटफॉर्म बनकर उभरा है। री-कार्ट बीते छह साल से काम कर रही है।
एनिमेशन फिल्म से संदेश दे रहे हिमांशु
एनिमेशन का इन दिनों हर तरफ क्रेज है लेकिन समाज को जागरुक करने के लिए इसका इस्तेमाल सेक्टर-3 निवासी हिमांशु कर रहे हैं। वह लगातार इस तरह के कंटेंट क्रिएट कर सीधा, सरल संदेश एंटरटेनमेंट फॉर्म में उपलब्ध करा रहे हैं। उन्होंने हाल ही में मानवता नाम की शॉर्ट फिल्म बनाई है। मानवता का संदेश लोगों तक पहुंचाने के लिए इस फिल्म को अभिनेता सोनू सूद ने आवाज दी है। 8 दिसंबर से अब तक इंस्टाग्राम पर इस वीडियो को 31 हजार, फेसबुक पर 25 हजार लोग देख चुके हैं। यूट्यूब पर भी इस वीडियो ने हजारों लाइक बटोरे हैं।
साधारण कहानी से छोड़ रहे प्रभाव
साधारण कहानी से एनिमेशन के जरिए प्रभाव छोड़ने की कला हिमांशु ने डिजनी की फिल्मों से सीखी है। सीधे स्पष्ट संदेश बच्चों के लिए क्रिएट किए जाते हैं। इसी हुनर को पेशे के रूप में शुरू किया है। वह एनिमेशन की प्रोफेशनल ट्रेनिंग ले चुके हैं। बतौर एनिमेटर बच्चों व युवाओं को लॉकडाउन में इसका प्रशिक्षण भी नि:शुल्क दिया। मौजूदा समय में हिमांशु एक निजी कंपनी के साथ भी काम कर रहे हैं। हिमांशु ने नेत्रदान, ऑटम नाम की फिल्म बनाई, इसे 35 हजार व्यू सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर मिले। एक अजनबी नाम की फिल्म बनाकर गुड टच बैड टच का संदेश बच्चों को दिया।