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Faridabad News: 1017 अवैध कॉलोनियों की जांच में एसीबी की मदद करेंगे नायब तहसीलदार, पटवारी व कानूनगो

Thu, 12 Mar 2026 11:23 PM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Thu, 12 Mar 2026 11:23 PM IST
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Naib Tehsildar, Patwari and Kanungo will assist ACB in investigation of 1017 illegal colonies.
10 साल में विकसित हुई 1017 अवैध कॉलोनियों में कितनी रजिस्ट्री कीं, तहसीलदार नहीं दे रहे रिकॉर्ड
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एंटी करप्शन ब्यूरो की ओर से की जा रही है पूरे मामले की जांच

डीटीपी, राजस्व समेत अन्य विभागों के अधिकारियों ने मिलकर किया है सरकारी राजस्व का नुकसान
एसीबी की ओर से 4 बार पत्र लिखे जाने के बावजूद नहीं दिया गया रिकॉर्ड
सोनू यादव
फरीदाबाद। बीते 10 साल के दौरान जिले में विकसित हुई 1017 अवैध कॉलोनियों में रजिस्ट्री को लेकर पूरा रिकॉर्ड नहीं मिलने पर भी एसीबी (एंटी करप्शन ब्यूरो) जांच अब आगे बढ़ा रही है। एसीबी की ओर से अब जांच पूरी करने के लिए नायब तहसीलदार, कानूनगो व पटवारी की मदद ली जाएगी। ये तीनों राजस्व विभाग से जुड़े अधिकारी हैं। एसीबी अधिकारियों की मानें तो जांच का मुख्य बिंदु ये पता लगाना है कि विकसित हुई अवैध कॉलोनियों में की गई रजिस्ट्री से सरकार को राजस्व का कितना नुकसान हुआ। राजस्व से जुड़े ये अधिकारी ही जांच में मदद कर ये सही आंकड़ा सामने ला सकते हैं।

कई बार पत्र लिखे लेकिन नहीं मिला रिकॉर्ड
एंटी करप्शन ब्यूरो की ओर से स्मार्ट सिटी में अवैध कॉलोनी बसाने वाले डीलरों व प्रशासनिक अधिकारियों के गठजोड़ को लेकर जांच की जा रही है। एसीबी ये जांच कर रही है कि बीते 10 साल के दौरान जिले में विकसित हुई 1017 अवैध कॉलोनियों में कितनी रजिस्ट्री हुईं। इन रजिस्ट्री का डेटा तहसीलदार ही उपलब्ध करा सकते हैं। इसे लेकर एसीबी की ओर से 4 बार पत्र लिखा जा चुका है। इसमें ये पूछा गया कि इन 1017 अवैध कॉलोनियों में तहसीलवार कितनी रजिस्ट्री इस अवधि में की गईं। इनके आधार पर ये आंकलन किया जाना है कि इन अवैध कॉलोनियों में की गई रजिस्ट्री के चलते सरकार को राजस्व का कितना नुकसान हुआ है लेकिन तहसीलदारों की ओर से जांच के लिए जरूरी डेटा एसीबी को नहीं दिया गया।
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कार्रवाई के नाम पर खानापूर्ति का आरोप
मामले में अब तक जांच में सामने आया है कि प्रॉपर्टी डीलरों व प्रशासनिक अधिकारियों के इस गठजोड़ ने 10 साल में 1017 अवैध कॉलोनियां बसा दीं हैं। एचएसवीपी और डीटीपी एनफोर्समेंट की टीमों ने मिलकर इन कॉलोनियों में जाकर तोड़-फोड़ की कार्रवाई की। लेकिन इस कार्रवाई के बावजूद भी ये अवैध कॉलोनियां बसना हैरान करने वाला है। आरोप है कि महज खानापूर्ति करते हुए तोड़-फोड़ कार्रवाई का दिखावा किया गया और बाद में डीलरों से गठजोड़ कर ये कॉलोनियां बसवा दी गईं।
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प्रदेश सरकार के निर्देश पर चल रही जांच
एंटी करप्शन ब्यूरो के आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि प्रदेश सरकार के निर्देश पर ये जांच शुरू की गई है। आरोप है कि जिन अधिकारियों की जिम्मेदारी थी कि ये अवैध कॉलोनियां न बसें, उन्होंने अपना काम सही से नहीं किया। उल्टे अपनी जेबें भरकर आम जनता को इन डीलरों के जाल में फंसने के लिए छोड़ दिया। इसके लिए संबंधित अधिकारियों की ओर से दर्ज कराई गई एफआईआर का डेटा भी जांच के दौरान एंटी करप्शन ब्यूरो ने तैयार किया है।


एंटी करप्शन ब्यूरो के इंस्पेक्टर संतराम सिंह ने बताया कि बीते 10 साल के दौरान 1017 अवैध कॉलोनियां बसने की जांच की जा रही है। तोड़-फोड़ के नाम पर महज खानापूर्ति हुई और बाद में कॉलोनियां बसती चली गईं। इन कॉलोनियों में हुई रजिस्ट्री का रिकॉर्ड कई बार मांगने पर भी नहीं दिया गया। ऐसे में अब राजस्व विभाग के अधिकारियों की मदद लेकर जांच आगे बढ़ाई जा रही है।
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