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Faridabad News: फाइलों में घूम रही मल्टी लेवल पार्किंग, छह पहले की गई थी घोषणा

Thu, 25 Dec 2025 12:28 AM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Thu, 25 Dec 2025 12:28 AM IST
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Multi-level parking is circulating in files, it was announced six years ago
जिले की प्रशासनिक राजधानी कहे जाने वाले सेक्टर-12 में पार्किंग की समस्या लंबे समय से बनी हुई है
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अमर उजाला ब्यूरो
फरीदाबाद। जिले की प्रशासनिक राजधानी कहे जाने वाले सेक्टर-12 में पार्किंग की समस्या लंबे समय से बनी हुई है। अदालत, मिनी सचिवालय, डीसी कार्यालय, खेल परिसर और व्यावसायिक गतिविधियों के केंद्र इस क्षेत्र में हर दिन हजारों वाहन आते-जाते हैं लेकिन इनके लिए स्थायी पार्किंग व्यवस्था आज तक तैयार नहीं हो सकी। पिछले छह वर्षों से प्रस्तावित मल्टीलेवल पार्किंग परियोजना फाइलों में घूम रही है और जमीन पर हालात बद से बदतर होते जा रहे हैं।

सेक्टर-12 को शहर का सबसे महत्वपूर्ण प्रशासनिक इलाका माना जाता है। यहां रोजाना वकील, फरियादी, सरकारी कर्मचारी, खिलाड़ी, व्यापारी और आम नागरिक आते हैं। इसके बावजूद पार्किंग को लेकर कोई ठोस व्यवस्था नहीं है। सड़कों के दोनों ओर खड़े वाहन खड़े होने के कारण यहां पर हमेशा जाम की स्थिति बनी रहती है। वहीं आपातकाल की स्थिति वाले वाहनों को निकलने के लिए यहां से काफी कम रास्ता मिल पाता है। पार्किंग के कारण रास्ता संकरा हो जाता है।
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प्रशासन ने वर्ष 2019 में इस समस्या के स्थायी समाधान के तौर पर मल्टीलेवल पार्किंग बनाने की घोषणा की थी। प्रस्ताव था कि सेक्टर-12 में 700 से 800 वाहनों की क्षमता वाली आधुनिक पार्किंग तैयार की जाए, जिससे सड़कों से बोझ कम हो और यातायात सुचारू हो सके। शुरुआती दौर में इसे शहर के लिए बड़ी उपलब्धि के रूप में प्रचारित किया गया लेकिन समय बीतने के साथ यह योजना सिर्फ सरकारी बैठकों और टेंडर दस्तावेजों तक सीमित रह गई।
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इन छह वर्षों में प्राधिकरण ने कई बार टेंडर जारी किए लेकिन हर बार प्रक्रिया अधूरी रह गई। कभी तकनीकी खामियां बताई गईं, तो कभी बोली लगाने वालों की कमी सामने आई। अधिकारियों का कहना है कि परियोजना को सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) मॉडल पर रखा गया है जिसमें निजी कंपनियों को निर्माण के साथ-साथ संचालन भी करना है। इसी मॉडल ने इस परियोजना को सबसे ज्यादा उलझा दिया है।

पीपीपी मॉडल के तहत कंपनियों को अपनी लागत पार्किंग शुल्क से वसूली होती है। लेकिन सेक्टर-12 जैसे क्षेत्र में जहां पहले से अवैध पार्किंग और अनधिकृत वसूली का बोलबाला है वहां कंपनियों को अपने निवेश की सुरक्षा और लाभ को लेकर संदेह है। यही कारण है कि कोई भी कंपनी इस परियोजना में आगे आने को तैयार नहीं है। जानकारी के अनुसार सरकार खुद पूंजी लगाने से बच रही है और सारा जोखिम निजी क्षेत्र पर डाल दिया गया है।

परियोजना के लटकने का सबसे बड़ा फायदा अवैध पार्किंग संचालकों को मिला है। सेक्टर-12 की सड़कों पर कई स्थानों पर लोग बिना किसी अनुमति के पार्किंग करवा रहे हैं। वहीं व्यापारियों का कहना है कि पार्किंग की कमी के कारण ग्राहक बाजार में आने से कतराने लगे हैं। वहीं आम नागरिकों के लिए अदालत या सरकारी दफ्तर का काम निपटाना एक चुनौती बन गया है। कई बार लोगों को गाड़ी खड़ी करने के लिए दूर-दराज की गलियों में जाना पड़ता है, जिससे समय और मेहनत दोनों बर्बाद होते हैं।


पार्किंग के लिए कोर्ट के पास खाली जगह चिन्हित की गई है। इसका प्रस्ताव कर सरकार को भेजा जा रहा है। मंजूरी के बाद निर्माण की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। - संदीप दहिया, एसई हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण
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